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जब पुलिस को अकड़ दिखाने के चक्कर में पिटा ‘आजतक’ का पत्रकार

कोरोना वायरस को लेकर मचे हड़कंप के बीच दिल्ली में एक पत्रकार पुलिस के हाथों पिट गया। यह जानकारी उक्त पत्रकार ने ख़ुद ही सोशल मीडिया के ज़रिए दी है। पत्रकार ने दावा किया है कि वो नोएडा में अपने दफ्तर जा रहा था, लेकिन रास्ते में पुलिस ने उसे मारा-पीटा और गालियां दीं। फेसबुक और ट्विटर पर उसकी ये ‘आपबीती’ देखते ही देखते वायरल हो गई। लोगों ने इसके लिए दिल्ली पुलिस के रवैये की आलोचना भी शुरू कर दी। लेकिन कुछ ही देर में सच्चाई सामने आ गई। कई जाने-माने पत्रकारों ने इस घटना की निंदा की थी, उन्होंने भी अपने बयान वापस लेने शुरू कर दिए। दरअसल ये मामला आजतक चैनल के पत्रकार नवीन कुमार का है, जिन्होंने दावा किया कि रूटीन चेकिंग के नाम पर पुलिस ने उन्हें पीटा। अभी तक पुलिस का पक्ष सामने नहीं आया है, लेकिन आसपास मौजूद चश्मदीदों ने बताया है कि उल्टा इस पत्रकार ने ही पुलिस के साथ बदसलूकी की थी। यह जानकारी भी सामने आ रही है कि यह तथाकथित पत्रकार नक्सली विचारधारा से जुड़ा हुआ है। कहा जा रहा है कि उसने जातीय पूर्वाग्रह के कारण पिछड़ी जाति से आने वाले दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल ग्यारसीलाल यादव पर झूठे आरोप लगाए हैं। शुरुआती पड़ताल से यह बात सामने आ रही है कि कथित पत्रकार ने सहानुभूति बटोरने के लिए अपनी पिटाई का झूठ बोला था।

क्या है ये पूरा मामला?

दरअसल बाक़ी देश की तरह दिल्ली पुलिस भी लॉकडाउन पर अमल करवाने के लिए पूरी ताक़त लगा रही है। 22 मार्च को जनता कर्फ़्यू के बाद 23 तारीख़ को बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर गए थे, जिन्हें क़ाबू करने के लिए पुलिस को काफ़ी मशक़्क़त करनी पड़ी। दिल्ली में पुलिस ने कई जगह चेकपोस्ट लगाया ताकि पता किया जा सके कि कौन ज़रूरी काम से बाहर निकला है और कौन सिर्फ़ मौजमस्ती के लिए। नवीन कुमार नाम के इस विवादित पत्रकार का दावा है कि वो सफ़दरजंग एनक्लेव के पास से गुजर रहा था तभी उसे पुलिसवालों ने चेकपोस्ट पर रोक लिया और थोड़ी कहासुनी के बाद पीटना शुरू कर दिया। नवीन कुमार की ये पूरी कहानी आप इसी पोस्ट में नीचे पढ़ सकते हैं। इस कहानी में उन्होंने ख़ास तौर पर पुलिस के एक कॉन्स्टेबल ग्यारसीलाल यादव को निशाना बनाया है। बताया जा रहा है कि नवीन कुमार यूँ तो ख़ुद को पिछड़ों और दलितों का बहुत बड़ा हितैषी बताता है लेकिन इन वर्गों के लिए उसके दिमाग़ में बहुत घृणा भरी पड़ी है, जिसे इस पोस्ट में वो छिपा न सका। लेकिन इसी कारण नवीन कुमार की सच्चाई भी सामने आ गई।

क्या है मामले की सच्चाई?

दिल्ली पुलिस अभी इस मामले की विभागीय जाँच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक़ घटना का एक वीडियो भी पुलिस के हाथ लगा है जिसकी पड़ताल चल रही है। पहली नज़र में यह साफ़ है कि पुलिस की कोई गलती नहीं बल्कि इस कथित पत्रकार ने ही बदसलूकी की थी। पत्रकार ऋषिकेश कुमार ने मौक़े पर मौजूद रश्मि नाम की एक महिला से बातचीत की और उसे ट्वीट किया, उनके मुताबिक़, “ये मामला मेरे घर के बिल्कुल पास का है, जहां मैं भी मौजूद थी। दिल्ली पुलिस बहुत टाइट सिक्योरिटी चेक कर रही है। इस बीच अगर कार में बैठकर किसी जाम जैसी जगह पर किसी पुलिसवाले को होमगार्ड करके बुलाया जाए और आई-कार्ड दिखाने के बदले पत्रकारिता का टशन दिखाए तो उसके साथ क्या होगा… जहां तक बात उसके पिट जाने का है, तो अगर ऐसा होता तो अब तक वीडियो बन चुका होता।”/ लगभग यही बात कुछ अन्य लोगों ने भी बताई है, जो उस घटना के गवाह थे। आजतक चैनल में काम करने वाले पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि “कोई यह मानने को तैयार नहीं है कि नवीन कुमार सच बोल रहे हैं। वो पहले भी ऐसी कहानियां बनाते रहे हैं। उनकी पूरी पत्रकारिता ही ऐसी फर्जी कहानियों पर टिकी है। चूंकि आजतक कांग्रेस समर्थक है और उसके ज्यादातर संपादक कांग्रेस पार्टी के लिए काम करते हैं, लिहाजा उसके खिलाफ कोई कार्ऱवाई नहीं होती।”

चूँकि मामला महामारी के दौरान पुलिस पर शरारतपूर्ण तरीक़े से ग़लत आरोप लगाने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने का है, इसलिए बहुत सारे लोग माँग कर रहे हैं कि केस दर्ज करके इस तथाकथित पत्रकार के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए। फ़िलहाल फ़ेसबुक पर नवीन कुमार की कहानी आप नीचे पढ़ सकते हैं।

पत्रकारिता के पेशे से जुड़े कई लोगों ने नवीन कुमार के समर्थन में ट्वीट किए थे, लेकिन बाद में उन्होंने माफ़ी माँगते हुए डिलीट कर दिए। इसके बजाय लोग अब कॉन्स्टेबल ग्यारसी लाल यादव और उनके साथियों की कर्तव्यनिष्ठा की तारीफ़ कर रहे हैं।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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