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धूप और गर्मी से कम होता है कोरोना का ख़तरा, वैज्ञानिकों ने भी माना

दुनिया भर में इस बात को लेकर बहस छिड़ी हुई है कि क्या कोरोनावायरस धूप से कम होता है। इसे लेकर तरह-तरह की बातें चल रही हैं। कोविड-19 फैलने के बाद दावा किया गया था कि जब गर्मी बढ़ेगी तो भारत में इसका ख़तरा ख़ुद ही खत्म हो जाएगा, लेकिन फिर ख़बर आई कि ये वायरस 52 डिग्री सेल्सियस तक सक्रिय रहता है। अब पहली बार दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने माना है कि सूरज की गर्मी बढ़ने के साथ कोरोनावायरस के फैलने की रफ़्तार कम हो जाती है। लिहाज़ा अमेरिका और यूरोप समेत कई देशों में लोगों को धूप सेंकने की सलाह दी जा रही है। ताजा अध्ययनों में यह बात साबित हुई है कि जिन देशों में तापमान बढ़ रहा है, वहां वायरस के संक्रमण की दर भी घट रही है। साथ ही सूरज की रोशनी का संबंध विटामिन डी से है, जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे भी कोरोना वायरस या इस जैसे किसी भी ख़तरे से बचाव के लिए शरीर मज़बूत होता है। यह भी पढ़ें: कोरोना वायरस मरीजों पर असर कर रही है ये दवा, सरकार ने दी मंजूरी

वैज्ञानिकों ने माना धूप है मददगार

अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक़ अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के एपिडेमोलॉजी एक्सपर्ट डॉक्टर स्टीफ़न बराल (Dr Stefan Baral) ने कहा है कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में तेजी से गिरावट आएगी।यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्गकॉन्ग में पैथोलॉजी के प्रोफ़ेसर जॉन निकोलस (Dr John Nicholls) की राय में तीन चीजें हैं जो कोरोनावायरस पसंद नहीं करता है- धूप, गर्मी और आर्द्रता (humidity) उनकी राय में “सूरज की रोशनी कोविड 19 वायरस के बढ़ने की रफ्तार को 50 फीसदी तक घटा देती है। मतलब यह कि धूप में उसकी हाफ लाइफ 2.5 मिनट तक होती है, जबकि अंधेरे में ये 13 से 20 मिनट के बीच है। यह बात सही है कि धूप कोरोना वायरस को मारती है।” जर्मनी के सेंटर फॉर एक्सपेरिमेंटल एंड क्लीनिकल इन्फेक्शन रिसर्च के वायरोलॉजिस्ट थॉमस पीट्समैन (Thomas Pietschmann) ने कहा है कि “कोविड 19 वायरस ज्यादा गर्मी में बचा रहता है, लेकिन उसकी प्रतिरोधक क्षमता इतनी भी अधिक नहीं है। तापमान बढ़ने के साथ ही उसकी सक्रियता कम होती जाती है।”

अमेरिका में गर्मी का है इंतज़ार

अमेरिकी मौसम एजेंसी एक्यूवेदर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ अमेरिका के ज़्यादातर इलाक़ों में तापमान बढ़ना शुरू हो चुका है। 20 मार्च को विषुव यानी equinox के बाद वहां गर्मी बढ़ने का अनुमान है। विषुव वो दिन होता है जब सूरज धरती की भूमध्य रेखा के बिल्कुल सीध में होता है। यही स्थिति इटली में है, जहां सर्दी अपने आखिरी दौर में है। हालांकि यह बात सही है कि सिर्फ धूप में बैठने से बीमारी से बचाव नहीं हो सकता। क्योंकि धूप में हर समय नहीं बैठा जा सकता है। संक्रमण से बचने के उपाय जरूरी हैं। क्योंकि घरों के अंदर और दफ्तरों वगैरह जहां मौसम की गर्मी नहीं पहुंचती वहां बीमारी का डर बना रह सकता है। खासतौर पर लोगों के छींक वगैरह से बीमारी का खतरा बना रहेगा। धूप से वायरस के फैलने की रफ्तार कम जरूर होगी। हॉन्गकॉन्ग यूनिवर्सिटी के डॉक्टर मिशेल चीन वाई चान (Dr Michael Chi Wai Chan) के मुताबिक गर्मी के ही कारण इंडोनेशिया, फिलीपींस और भारत में बीमारी पर दूसरे देशों के मुकाबले हालात थोड़े बेहतर हैं। यह भी पढ़ें: अपने मोबाइल फोन को कोरोन वायरस से कैसे बचाएं, 5 आसान तरीके

धूप से बढ़ती है प्रतिरोधक क्षमता

धूप से शरीर में विटामिन-डी बनता है। हालाँकि यह प्रक्रिया ज़्यादातर सुबह की पहली धूप में होती है। जिन लोगों में इस विटामिन की कमी होती है उनमें स्वाभाविक रूप से वायरल और बैक्टीरिया जनित रोगों की आशंका अधिक होती है। जिन लोगों में इम्यूनिटी मज़बूत होती है वो कोरोना या ऐसे किसी भी वायरस के संपर्क में आने के बावजूद भी सुरक्षित रह सकते हैं। ज़ाहिर है इस बीमारी से बचाव के लिए धूप एक कारगर तरीक़ा है। यह भी पढ़ें: कब तक रहेगा कोरोना वायरस? एक साल पहले भविष्यवाणी करने वाले ने ये बताया

फैक्ट चेक के नाम पर फैला भ्रम

कोरोनावायरस फैलने के बाद सोशल मीडिया पर तेज़ी के साथ यह बात फैली थी कि कोरोनावायरस गर्मी आते ही बेअसर हो जाएगा। इसके बाद कई देसी-विदेशी वेबसाइटों ने इस बात का फैक्ट चेक किया और यह बताया कि कोरोनावायरस बढ़ते तापमान में भी सुरक्षित रहता है। जिस तरह पहला दावा ग़लत था उसी तरह उसे झूठ बताने वाला ये दूसरा दावा भी ग़लत है। ताज़ा वैज्ञानिक अध्ययन इस बात को साबित कर रहे हैं कि तापमान बढ़ने के साथ-साथ कोविड 19 की सक्रियता का स्तर कम होता है और सीधे धूप के संपर्क से वो तेज़ी से ख़त्म भी होता है। ऐसा धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों के कारण होता है।
(न्यूजलूज़ टीम)

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