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जानिए कहां और क्या कर रहा है निर्भया केस का ‘नाबालिग दरिंदा’

दिल्ली में दिसंबर 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप केस के चार दोषियों को फाँसी के तख्ते पर लटका दिया गया। हालाँकि कई लोग अब भी इसे अधूरा इंसाफ़ मानते हैं। उनका कहना है कि उस गैंगरेप में सबसे ज़्यादा बर्बरता करने वाला नाबालिग छूट गया और आज भी आज़ादी की ज़िंदगी जी रहा है। इस जघन्य कांड में कुल 6 आरोपी पकड़े गए थे। जिनमें से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी। जबकि जांच के दौरान एक आरोपी नाबालिग पाया गया था। उसकी तस्वीर कभी सामने नहीं आने पाई। हालांकि कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर जरूर की जाती हैं, लेकिन वास्तव में वो नाबालिग दरिंदे की नहीं हैं। 17 साल का ये बलात्कारी यूपी के बदायूं का रहने वाला था और उसे दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल से पकड़ा गया था।

आज़ाद ज़िंदगी जी रहा है पाँचवां दरिंदा

नाबालिग होने के कारण पाँचवें आरोपी का मुक़दमा जुएनाइल जस्टिस बोर्ड में चला था। जहां से उसे मात्र 3 साल की सज़ा हुई थी। क़ानून के मुताबिक़ इस दौरान दोषी को जेल में नहीं, बल्कि बाल सुधार गृह में रखा जाता है। जहां 3 साल बिताकर वो दिसंबर 2016 में आज़ाद हो गया। चूँकि वो धर्म विशेष से ताल्लुक़ रखता था इसलिए उसे लेकर तुष्टिकरण की राजनीति भी शुरू हो गई। दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने एलान किया कि वो उसे 10 हज़ार रुपये और सिलाई मशीन देकर पुनर्वास में मदद करेगी। हालाँकि इस एलान के बाद लोगों का ग़ुस्सा भड़क उठा और केजरीवाल को कदम पीछे खींचने पड़े। निर्भया के माता-पिता की तमाम कोशिशों के बावजूद पाँचवां दोषी दोबारा क़ानून के शिकंजे में नहीं फँस पाया। यह आरोप भी लगते हैं कि दिल्ली सरकार ने जुएनाइल बोर्ड में चले मुकदमे में उसके खिलाफ जानबूझकर बेहद कमजोर सबूत रखे थे, ताकि उसे कम से कम सज़ा हो।

खुफिया एजेंसियाँ बनाए रखती हैं नज़र

2017 में दिल्ली पुलिस के सूत्रों से यह जानकारी सामने आई थी कि पाँचवां दरिंदा दक्षिण भारत में किसी जगह पर कुक का काम कर रहा है। उसका पुनर्वास एक एनजीओ के ज़रिए करवाया गया था। यह जानकारी भी सामने आई कि उसका नाम बदल दिया गया है और नई पहचान के साथ वो नई ज़िंदगी जी रहा है। दिल्ली में बाल सुधार गृह में रहने के दौरान ही उसने खाना पकाने का काम सीखा था। वो जिसके यहाँ पर काम करता है वो भी उसकी वास्तविक पहचान को नहीं जानता। हालाँकि ख़ुफ़िया एजेंसियाँ उसकी गतिविधियों पर नज़र रखती हैं। क्योंकि एक बार यह भी ख़बर आई थी कि वो कुछ जिहादी संगठनों के संपर्क में है। फ़िलहाल उसकी लोकेशन को कुछ समय के बाद बदल दिया जाता है ताकि उसकी जान को कोई ख़तरा न रहे।

ड्राइवर रामसिंह के लिए करता था काम

निर्भया केस की जाँच के दौरान यह बात सामने आई थी कि इस नाबालिग के राम सिंह के यहां 8000 रुपये बकाया थे और वह लगातार राम सिंह से अपने पैसे मांग रहा था। घटना की रात वह राम सिंह के पास अपने पैसे लेने गया था और अपराध का हिस्सा बन गया था। यह बात भी सामने आई कि वो पहले से आपराधिक मानसिकता वाला था। गैंगरेप के दौरान निर्भया के शरीर में रॉड भी उसी ने घुसेड़ा था।

बचपन में ही घर छोड़कर भाग गया था

दिल्ली से महज 240 किलोमीटर दूर यूपी के बदायूँ ज़िले के इस्लामनगर गांव में रहने वाला यह नाबालिग महज 11 साल की उम्र में अपना घर छोड़ भाग आया था। घर से भागकर दिल्ली आते ही सबसे पहले उसकी मुलाकात राम सिंह से हुई। बाद में वो उसके साथ ही बसों में खलासी का काम करने लगा।

(न्यूज़लूज़ टीम)

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