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कोरोना वायरस मरीज़ों पर असर कर रही है ये दवा, सरकार ने दी मंज़ूरी

कोरोना वायरस को लेकर दुनिया भर में मची दहशत के बीच राहत की एक बड़ी ख़बर है। भारतीय डॉक्टरों ने माना है कि एचआईवी एड्स की दवा कोरोना वायरस के मरीज़ों पर असर कर रही है। देश के अलग-अलग शहरों में भर्ती इस बीमारी के मरीज़ों को यही दवा दी जा रही है। इस दवा के मरीज़ों पर सकारात्मक नतीजे भी पाए गए हैं। भारतीय ड्रग कंट्रोलर जनरल ने एड्स में काम आने वाली लोपिनाविर और रिटोनाविर (lopinavir and ritonavir) दवाओं के कॉम्बिनेशन के डॉक्टरी देखरेख में इस्तेमाल पर मुहर लगा दी है। जयपुर के सवाई माधोसिंह अस्पताल में भर्ती दो इटैलियन मरीजों पर इस दवा का इस्तेमाल कामयाब रहा, जिसके बाद इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) इमर्जेंसी आधार पर इसकी मंजूरी हासिल की। माना जा रहा है कि ये एक तरह का जुगाड़ है जो कोरोनावायरस की दवा ढूंढे जाने तक इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत की कामयाबी के बाद चीन, जापान देशों में भी इस दवा का इस्तेमाल शुरू हो चुका है।

एड्स की दवा के कारगर होने का कारण क्या?

दरअसल HIV एड्स भी वायरस से होने वाली बीमारी है। ये महज इत्तेफाक है कि इसका कोरोना मरीजों को फायदा हो रहा है। इसके सही कारण का पता लगाया जा रहा है क्योंकि इससे कोरोना वायरस की दवा विकसित करने में भी मदद मिल सकती है। फिलहाल भारत सरकार ने दवा कंपनियों को इस दवा की कॉम्बो डोज़ बनाने के लिए ऑर्डर दे दिए हैं। ऐसा भी नहीं है कि एड्स की दवा से कोरोना वायरस के इलाज का आइडिया पूरी तरह से देसी हो, इससे पहले जापान और थाइलैंड से ऐसी खबरें आई थीं कि वहां पर कुछ डॉक्टरों ने इसका इस्तेमाल किया है। लेकिन वहां पर सरकारी एजेंसियों ने इस दवा के इस्तेमाल को मंजूरी नहीं दी। लेकिन पहली बार भारत में कोरोना वायरस के लिए एचआईवी की दवा को औपचारिक तौर पर मंजूरी दी गई है। यह भी पढ़ें: कब तक रहेगा कोरोना वायरस? एक साल पहले भविष्यवाणी करने वाले ने बताया

इज़राइल में कोरोना की वैक्सीन ढूँढने का दावा

ऐसी खबरें हैं कि इजराइल के वैज्ञानिक कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के बेहद करीब हैं। करीब 50 से अधिक वैज्ञानिक इस समय इजराइल में कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इजराइल के एक अखबार Ha’aretz ने मेडिकल सूत्रों का हवाला देते हुए लिखा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की निगरानी में इजराइल के इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल रिसर्च को कोरोना वायरस की क्वालिटी और बायोलॉजिकल मैकेनिज्म समझने में बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों में एंटीबॉडीज़ पैदा करने और वैक्सीन बनाने की दिशा में बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। हालांकि ये कहा गया है कि दवा बनाने के बाद उसके कई टेस्ट होंगे और पूरी तरह से तैयार होकर लोगों को देने तक दवा बनने में कुछ महीनों का वक्त लग सकता है।

दुनिया भर में कोरोना वायरस से अब तक कुल 4300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 1 लाख 40 हज़ार लोग अब तक इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। भारत में भी कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले लगातार तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इसे देखते हुए लोगों को सलाह दी जा रही है कि वो सार्वजनिक स्थानों पर बहुत ज़रूरी होने पर ही जाएं और हाथ नियमित तौर पर धोते रहें। यह भी पढ़ें: धरती से इंसानों के ख़त्म होने का कारण बन सकते हैं चमगादड़!

(न्यूज़लूज़ टीम)

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