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‘हारे हुए’ कपिल मिश्रा के बढ़ते क़द से बेचैन क्यों हैं ‘जीते हुए’ केजरीवाल!

दिल्ली में पिछले दिनों हुए घटनाक्रम के बाद से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नींद उड़ी हुई है। इसका कारण हैं उनके पूर्व सहयोगी और अब बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा। आम आदमी पार्टी में मुख्यमंत्री के करीबी सूत्र ने हमें बताया कि दिल्ली में 25-26 तारीख़ को हुए दंगों के बाद से जिस तरह से उनकी छवि को नुक़सान हुआ है और दूसरी तरफ़ कपिल मिश्रा का क़द तेज़ी से बढ़ रहा है उसे लेकर केजरीवाल काफ़ी परेशान हैं। केजरीवाल की ये परेशानी उनके क्रियाकलापों में भी झलक रही है। इन हिंदू विरोधी दंगों में जिस तरह से आम आदमी पार्टी के चार-चार नेताओं के नाम और वीडियो सामने आए हैं उनके चलते केजरीवाल के लिए जवाब देते नहीं बन रहा है। दूसरी तरफ़ जाफराबाद में प्रदर्शनकारियों को हटाकर सड़क खोलने की बात कहकर चर्चा में आए कपिल मिश्रा की लोकप्रियता में भारी उछाल आया है। ऐसे में केजरीवाल को लगने लगा है कि कपिल मिश्रा आने वाले समय में उनके लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। यह भी पढ़ें: जब कपिल मिश्रा ने कांग्रेसी पत्रकार शेखर गुप्ता को दिखाया आईना

तेज़ी से चुनौती बन रहे हैं कपिल मिश्रा

अरविंद केजरीवाल ने अपना पूरा पिछला कार्यकाल लगभग बिना विपक्ष के बिताया था। विधानसभा में बीजेपी के सिर्फ़ 3 विधायक थे जिन्हें वो जब चाहते बाहर निकाल देते थे। बीजेपी के नेता उनकी सरकार के ख़िलाफ़ अगर कुछ बोलते भी थे तो मीडिया उन्हें ज़्यादा नहीं दिखाता था। लिहाज़ा कई बार ऐसा लगता था मानो केजरीवाल के लिए दूर-दूर तक कोई चुनौती नहीं है। लेकिन लगता है उनका ये कार्यकाल वैसा नहीं रहने वाला है। दिल्ली हिंसा के बाद से कपिल मिश्रा का सियासी क़द तेज़ी से बढ़ा है। मीडिया अब उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता। कपिल मिश्रा लगातार केजरीवाल सरकार पर हमले बोल रहे हैं, जिनका जवाब न तो केजरीवाल के पास है न उनके सिपहसालारों के पास। हमारे सूत्र ने बताया कि कपिल मिश्रा को जवाब देने के लिए सौरभ भारद्वाज और दुर्गेश पाठक को अधिकृत किया गया है। लेकिन कपिल मिश्रा के तेवरों के आगे दोनों टिक नहीं पा रहे। यहाँ तक कि ताहिर हुसैन के मसले पर सौरभ भारद्वाज को अपना ही ट्वीट डिलीट करना पड़ गया। यह भी पढ़ें: कन्हैया और ताहिर हुसैन पर केजरीवाल से 15 सवाल

कपिल मिश्रा की लोकप्रियता में उछाल

दिल्ली हिंसा के बाद से कपिल मिश्रा इकलौते नेता थे जो जनता के बीच उसकी परेशानियों के लिए लड़ते दिखाई दे रहे थे। आम आदमी पार्टी के ज़्यादातर विधायक और पार्षद दंगाइयों के मददगार की भूमिका में थे। कुछ के वीडियो सामने आ गए तो पोल खुल गई जबकि कुछ के वीडियो नहीं आ सके। फ़िलहाल कपिल मिश्रा के इन तेवरों का नतीजा हुआ कि जनता के बीच उनकी लोकप्रियता में भारी उछाल आया है। आज उन्हें केजरीवाल सरकार के ख़िलाफ़ विपक्ष की सबसे मज़बूत आवाज़ के तौर पर देखा जा रहा है। ट्विटर पर कपिल मिश्रा के क़रीब एक लाख फ़ॉलोअर मात्र कुछ दिनों में बढ़ गए। कपिल मिश्रा केजरीवाल के पुराने साथी रहे हैं, इसलिए उन्हें केजरीवाल के तौर-तरीकों और दाँवपेंच का अच्छी तरह से पता है। ज़ाहिर सी बात है कि केजरीवाल के लिए यह स्थिति वाक़ई बेचैनी पैदा करने वाली है। यह भी पढ़ें: जानिए दिल्ली हिंसा से पहले बार-बार किससे फ़ोन पर बात कर रहा था ताहिर हुसैन

(न्यूज़लूज़ टीम)

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