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योगी आदित्यनाथ सरकार से निराश हैं कैलाश मानसरोवर यात्री

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले सैकड़ों तीर्थयात्री उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के रवैये से निराश हैं। सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री ने कैलाश मानसरोवर यात्रियों की सब्सिडी बढ़ाकर एक लाख रुपये करने का एलान किया था। इसके कारण यूपी से कैलाश मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या में अच्छी-खासी बढ़ोतरी भी हुई, लेकिन पिछले साल यात्रा करके लौटे लोगों को अभी तक एक भी पैसा अनुदान नहीं दिया गया है। धर्मार्थ कार्य विभाग पर कैलाश यात्रियों को सब्सिडी देने की जिम्मेदारी है। नियम के अनुसार यात्रा पूरी करने के 90 दिन के अंदर आवेदन करना होता है। इस साल कुल 1590 लोगों ने इसके लिए आवेदन किया है, लेकिन अभी तक किसी का पैसा नहीं आया। यात्रियों ने बताया कि विभाग की तरफ से तीर्थयात्रियों को कोई सूचना भी नहीं दी जाती कि अभी कितना इंतजार करना है। यात्रियों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी होते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं। अधिकारियों के रवैये का नतीजा है कि लोग अब सब्सिडी की उम्मीद भी छोड़ने लगे हैं। यह स्थिति तब है जब इस विभाग को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता का विभाग माना जाता है।

ठप पड़ा हुआ है धर्मार्थ कार्य विभाग!

विभाग की वेबसाइट http://updharmarthkarya.in पर कैलाश यात्रियों की सहायता के लिए कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। यहां पर एक हेल्पलाइन नंबर 0522-2213945 और ईमेल आईडी dharmarthkarya57@gmail.com दी गई है। फोन कोई उठाता नहीं और अगर उठा ले तो बिना कोई जानकारी दिए फोन काट देता है। ईमेल पर भी आजतक किसी को जवाब नहीं आया। कई लोगों ने ट्विटर आईडी @DharmarthKarya पर भी पूछताछ की कोशिश की तो कोई जवाब नहीं मिला। विभाग के सोशल मीडिया पेजों पर धर्मार्थ कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नीलकंठ तिवारी का निजी प्रचार ही ज्यादा दिखाई देता है। खुद मंत्री जी भी ट्विटर पर कभी किसी शिकायत का न तो जवाब देते हैं और न ही कोई समाधान ही होता है। जब मंत्री खुद ही लापरवाह हैं तो समझा जा सकता है कि हिंदू हित से जुड़े इस महत्वपूर्ण विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों का रवैया कैसा होगा।

सब्सिडी की उम्मीद छोड़ चुके हैं लोग

धर्मार्थ कार्य विभाग ने 30 मई 2019 को ही एक विज्ञप्ति जारी करके कैलाश यात्रियों को एक लाख रुपये सब्सिडी की घोषणा कर दी थी। इस विज्ञप्ति में भी 90 दिन के अंदर आवेदन की बात है। हालांकि बाद में खबर आई कि विभाग ने आवेदन की अंतिम तारीख 31 जनवरी तक बढ़ा दी है। लेकिन अब जब ये वित्तीय साल पूरा होने को है लोगों की उम्मीद अब टूट चुकी है। लोगों को राज्य सरकार की नीयत पर संदेह होने लगा है। क्योंकि अभी तक किसी को यह भी नहीं बताया गया है कि जमा किए गए फॉर्म में कोई कमी वगैरह तो नहीं है। गाजियाबाद में रहने वाले एक रिटायर्ड कैलाश यात्री ने शक जताया कि हो सकता है कि आखिरी समय में कागजातों में कोई कमी निकालकर ज्यादातर लोगों की अर्जियां खारिज कर दी जाएं। उन्होंने बताया कि “मैंने अपनी नौकरी के पैसों में से कुछ बचाकर यात्रा की थी, उम्मीद थी कि 4-6 महीने में सब्सिडी के पैसे आ जाएँगे तो कुछ ज़रूरी पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ भी निभा दूँगा, लेकिन अब तो आस भी ख़त्म होती जा रही है। विभाग में बार-बार फ़ोन करने और ईमेल लिखने का भई कोई फ़ायदा नहीं हुआ।” यही स्थिति लगभग बाक़ी सभी यात्रियों की है।

दूसरे राज्यों में दी जा चुकी है सब्सिडी

देश के जिन राज्यों में भी कैलाश सब्सिडी मिलती है वहाँ अब तक यह प्रक्रिया पूरी भी हो चुकी है। दिल्ली में तो यात्रा के दौरान ही लोगों के अकाउंट में पैसे भेज दिए जाते हैं। उन्हें कोई आवेदन जमा करने की ज़रूरत नहीं होती है। लेकिन यूपी में यह धार्मिक यात्रा भी लालफ़ीताशाही की भेंट चढ़ गई है। यह स्थिति तब है जब यूपी सरकार कैलाश यात्रियों के लिए ग़ाज़ियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन बनवा रही है। 108 करोड़ रुपये लागत वाले इस प्रोजेक्ट का 75 फ़ीसदी काम पूरा भी हो चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आख़िर क्या कारण है कि कैलाश मानसरोवर से ही जुड़ी मुख्यमंत्री की दूसरी महत्वपूर्ण स्कीम के अमल में इतनी ढिलाई बरती जा रही है?

(न्यूज़लूज़ टीम)

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