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वेटिकन सिटी और मक्का से भी बड़ा और भव्य होगा राम मंदिर

अयोध्या में भगवान राम के मंदिर को लेकर रूपरेखा सामने आ रही है। मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनाने के बाद इसको लेकर भावी योजनाएँ बनने लगी हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मोदी सरकार ने ट्रस्ट को मंदिर बनाने की ज़िम्मेदारी सौंपी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ राम मंदिर ट्रस्ट ने जो खाका खींचा है उसके मुताबिक़ प्रस्तावित मंदिर दुनिया में सनातन धर्म का सबसे बड़ा केंद्र होगा। ठीक उस तरह जैसे दुनिया भर के ईसाइयों के लिए वेटिकन और मुसलमानों के लिए मक्का है। इस पूरी योजना पर राम मंदिर ट्रस्ट की आगामी औपचारिक बैठक में विचार होगा। जिसके बाद मंदिर निर्माण शुरू करने की तारीख़ पर भी मुहर लगेगी। यह बैठक 6 मार्च, एकादशी के दिन होनी है। सिर्फ राम मंदिर ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके को इस तरह से विकसित किया जाएगा कि दुनिया भर में ये हिंदू आस्था के सबसे बड़े केंद्र के तौर पर पहचाना जाए।

सबसे बड़े इलाक़े में होगा राम तीर्थ

ट्रस्ट की योजनाओं के अनुसार श्रीराम तीर्थ क्षेत्र कुल 111 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ होगा। इसकी तुलना में ईसाइयों का वेटिकन सिटी 110 एकड़ और मक्का मस्जिद क्षेत्र 99 एकड़ में फैले हुए हैं। राम मंदिर ट्रस्ट के पास अभी करीब 70 एकड़ जमीन उपलब्ध है। विस्तार के लिए आसपास की और ज़मीनों को शामिल करने की योजना पर विचार चल रहा है। राम मंदिर स्थल के आसपास के कई आश्रमों ने स्वेच्छा से अपनी ज़मीन दान में देने का प्रस्ताव रखा है। उदाहरण के तौर पर अरबिंदो आश्रम ने 3 एकड़ से अधिक भूमि देने की घोषणा की है। इसी तरह कई अन्य आश्रमों, मठों और दूसरी संस्थाओं से बातचीत चल रही है। कुछ ज़मीनें निजी स्वामित्व में भी हैं। उनके मालिकों से भी बातचीत शुरू की जाएगी। श्रीराम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से बात होगी और रणनीति बनाई जाएगी।

कब से शुरू होगा मंदिर का निर्माण?

कई साधु-संतों ने राम मंदिर निर्माण का काम शुरू करने के लिए कामदा एकादशी का मुहूर्त सुझाया है। यह 4 अप्रैल को पड़ रही है। कामदा एकादशी के अलावा तीन और तारीखों पर भी विचार किया जा रहा है। ये तारीख़ें हैं- 25 मार्च यानी चैत्र प्रतिपदा, इसी दिन हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। 2 अप्रैल यानी रामनवमी और 8 अप्रैल यानी हनुमान जयंती। पर भी चर्चा की जा रही है। हालाँकि ज्यादातर संतों ने 4 अप्रैल यानी एकादशी को ही मंदिर निर्माण शुरू करने का सबसे शुभ मुहूर्त बताया है। फ़िलहाल 6 मार्च को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इन सभी तारीख़ों और उनसे जुड़े तर्कों पर विचार होगा। संभवत: उसी दिन इस बारे में औपचारिक घोषणा हो जाने की भी उम्मीद है। मंदिर निर्माण का औपचारिक उद्घाटन किसके हाथों होगा इस बारे में भी बातचीत होगी। अगर 6 मार्च को तारीख़ तय नहीं हो पाई तो फिर मंदिर निर्माण समिति की सिफ़ारिश का इंतज़ार किया जाएगा।

मंदिर के मॉडल पर भी लगेगी मुहर

अब लगभग यह तय हो चुका है कि राम मंदिर दिखने में लगभग वैसा ही होगा जैसा विश्व हिंदू परिषद ने बनवाया था। इसमें कुछ तकनीकी बदलाव किए जा सकते हैं क्योंकि इस बारे में कई सुझाव मिल रहे हैं। यह डिज़ाइन 90 के दशक में तैयार किया गया था तब से लेकर अब तक तकनीक में कई बदलाव आ चुके हैं। बैठक में मंदिर की ऊँचाई पर विचार होना है। कई जानकार मानते हैं कि पहले मिट्टी का भराव कराकर ज़मीन की जांच कर ली जाए कि वह कितना भार झेलने की क्षमता रखती है। इसके लिए मिट्टी भरवाकर कम से कम बरसात के एक मौसम का इंतजार करना होगा।

दिल्ली में ट्रस्ट की पहली बैठक हुई

राममंदिर ट्रस्ट की पहली अनौपचारिक बैठक 19 फ़रवरी बुधवार को नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में बने आधिकारिक कार्यालय में हुई। यह के पारासरन का घर भी है। इस बैठक में महंत नृत्यगोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष चुना गया। साथ ही विश्व हिंदू परिषद के नेता चंपत राय को महासचिव बनाया गया। वहीं कोषाध्यक्ष का पद गोविंददेवगिरि महाराज को दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा को भवन निर्माण समिति का चेयरमैन बनाया गया है। दिल्ली की फर्म वी. शंकर अय्यर एंड कंपनी को बतौर ट्रस्ट की चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त किया गया है। अयोध्या के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में ट्रस्ट का बैंक खाता खोला जाएगा। इसमें पैसा जमा करने और निकालने का अधिकार कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि, चंपत राय और डॉ. अनिल कुमार मिश्र को होगा। हर लेनदेन के लिए इनमें से किन्हीं दो के हस्ताक्षर ज़रूरी होंगे।

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