Home » Loose Top » ‘दिवालिया’ दिल्ली में अब मुफ़्त की ख़ैरात कैसे बंटेगी केजरीवाल जी?
Loose Top

‘दिवालिया’ दिल्ली में अब मुफ़्त की ख़ैरात कैसे बंटेगी केजरीवाल जी?

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जीत पर मीडिया से लेकर दुनिया भर के मुस्लिम देशों में भारी ख़ुशी है, लेकिन अगले 5 साल केजरीवाल के लिए सबसे ज़्यादा चुनौती भरे साबित होने जा रहे हैं। पिछले 5 साल उन्होंने कुछ स्कूलों और कुछ अस्पतालों को अच्छा बनाकर खूब वाहवाही लूट ली। लेकिन उनके आगे अब जो चुनौती आने वाली है वो है पैसे की। पिछले 5 साल में बिजली-पानी सब्सिडी और डीटीसी में महिलाओं को छूट से दिल्ली के सरकारी ख़ज़ाने की हालत पतली है। दिल्ली सरकार ने एक झूठ फैलाया है कि लोगों को मुफ़्त बिजली-पानी देने के बावजूद सरकार मुनाफ़े में चल रही है। पिछले बजट के मुताबिक़ 2019 में दिल्ली सरकार की कुल आमदनी (राजस्व) 60 हज़ार करोड़ हो गई है, जो कि 2014 में 30 हज़ार करोड़ हुआ करती थी। ये आँकड़े गलत नहीं हैं, लेकिन इसके पीछे का कारण जानना ज़रूरी है। सच्चाई जानने के बाद आपको पता चलेगा कि दिल्ली कैसे दिवालिया होने की तरफ बढ़ रही है।

बढ़ता जा रहा है डीटीसी का घाटा

पिछले 5 साल में दिल्ली में डीटीसी बसों (DTC) की संख्या 5200 से कम होकर 3900 हो गई है। ज्यादातर बसें 2010 से पहले खरीदी गई थीं। इनकी उम्र पूरी हो चुकी है और अगले 2-3 साल में इन्हें हटाना होगा। अब तक फंड की कमी से ही नई बसों की खरीद का मामला अटका हुआ है। दूसरी तरफ इसी दौरान मुंबई, नागपुर, अहमदाबाद जैसे शहर अपने पब्लिक ट्रांसपोर्ट को इलेक्ट्रॉनिक बसों पर शिफ्ट कर रहे हैं। डीटीसी कंगाली की तरफ बढ़ रही है और उससे इस दिशा में ज्यादा सुधार की उम्मीद करना बेकार है। महिलाओं के लिए मुफ्त सफर के एलान से डीटीसी लगभग बर्बादी की कगार पर है। अकेले इस स्कीम के कारण हर साल 300 करोड़ का घाटा हो रहा है। और अब चुनावी वादे के मुताबिक अब तो दिल्ली के लाखों छात्र-छात्राओं को भी मुफ्त सफर की सुविधा देनी होगी। साल 2018-19 में इसका घाटा बढ़कर 1750 करोड़ के पार जा चुका है। जबकि 2014 में यह 940 करोड़ के आसपास था। डीटीसी को चलाने के लिए दिल्ली सरकार जो सब्सिडी दे रही है वो भी कहीं और से नहीं बल्कि जनता की जेब से ही आती है। यह भी पढ़ें: दिल्ली में केजरीवाल नहीं, मुस्लिम तुष्टीकरण की जीत हुई है

क़र्ज़ में डूबा है दिल्ली जल बोर्ड

बसों के अलावा जो अगला “टाइम बम” टिक-टिक कर रहा है वो है दिल्ली जल बोर्ड (DJB)। करोड़ों लोगों को पानी सप्लाई करने वाली ये सरकारी एजेंसी उस मुक़ाम पर पहुँच चुकी है जहां इसे बाहर निकलना नामुमकिन है। जल बोर्ड पर इस समय 20 हजार करोड़ से ज्यादा कर्ज है। यह कर्ज केजरीवाल के आने के पहले से है। उन्होंने 5 साल में इसका एक भी पैसा वापस नहीं लौटाया। इस रकम पर ब्याज बढ़ता जा रहा है। सरकार जब भी ये लोन चुकाएगी, तो पैसे तो जनता की ही जेब से निकालेगी। इसके बावजूद केजरीवाल सरकार मुफ्त पानी की योजना चला रहे हैं। पहले जल बोर्ड का पानी साफ हुआ करता था लेकिन नए इलाकों में पानी पहुंचाने के दबाव में कई इलाकों में बिना साफ किया सीवर का पानी पहुंचाया जा रहा है। दिल्ली में पिछले 5 साल में पानी से होने वाली संक्रामक बीमारियों की संख्या कईगुना बढ़ी है। यानी मुफ्त पानी से लोगों के जो पैसे बच रहे हैं उससे कई गुना ज्यादा अस्पताल और डॉक्टर पर खर्च हो रहे हैं। यह भी पढ़ें: कहानी केजरीवाल के हाथों ठगे गए एक अमेरिकी डॉक्टर की

फ़्री बिजली के लिए ख़ज़ाना खाली

केजरीवाल सरकार की जो सबसे बड़ी वाहवाही है वो ये कि उन्होंने बिजली मुफ़्त कर दी। 200 यूनिट तक घरेलू बिजली मुफ़्त है। इसके ऊपर बिल भरना पड़ता है। लेकिन कम लोगों को पता होगा कि दिल्ली में इंडस्ट्रियल बिजली की दरें काफ़ी अधिक हैं। घरेलू सेगमेंट में हो रहे नुक़सान की भरपाई के लिए उद्योगों की बिजली महँगी कर दी गई। ये पड़ोस के नोएडा से भी अधिक है। इस कारण दिल्ली में उद्योगों के लिए काम करना महँगा हो गया है। पिछले 5 साल में कई उद्योग पड़ोस के ग़ाज़ियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम और सोनीपत जैसी जगहों पर शिफ्ट हो चुके हैं। उद्योग बढ़ी बिजली की क़ीमत भी जनता से ही वसूलते हैं। चुनाव से पहले जानबूझकर लोगों को ज़ीरो बिल भेजे गए थे। तय है कि आने वाले दिनों लोगों को बिजली की मोटी क़ीमत चुकानी पड़ेगी। दरअसल सस्ती बिजली का दावा ही झूठ है, क्योंकि दरें तो पहले की ही तरह अधिक हैं। बस सरकार इन पर सब्सिडी देती है, जिससे लोगों का बिल कम आता है। लेकिन सब्सिडी का पैसा भी सरकार कहां से लाती है यह बताने की ज़रूरत नहीं।

जीएसटी से बढ़ी दिल्ली की कमाई

आपको याद होगा कि जब कांग्रेस जीएसटी का विरोध कर रही थी तब दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने चुप्पी साध ली थी। जीएसटी से शुरुआती दिक़्क़तों के बावजूद केजरीवाल कुछ नहीं बोले। क्योंकि उन्हें पता था कि यही उनकी सरकार को कंगाली से बचा सकता है। जीएसटी के बाद दिल्ली सरकार की आमदनी में भारी बढ़ोतरी हुई। क्योंकि अब उसे सामान और सेवाओं दोनों के टैक्स में हिस्सेदारी मिलने लगी। केंद्र सरकार की लाई जीएसटी का ही कमाल है कि दिल्ली को 20 हज़ार करोड़ से ज़्यादा बतौर जीएसटी मिल रहे हैं। पिछले साल पेश सरप्लस बजट यानी मुनाफ़े के बजट के पीछे असली कारण भी यही है। पहले दिल्ली में पेट्रोल और डीज़ल यूपी से सस्ता हुआ करता था। लेकिन केजरीवाल ने इस पर वैट को 16 फ़ीसदी से बढ़ाकर 30 फ़ीसदी कर दिया है। जिसका नतीजा यह कि दिल्ली में तेल भराना महँगा पड़ता है। लोग यह नहीं समझ पाए कि ये वो क़ीमत है जो सस्ती बिजली के बदले में वो चुका रहे हैं। लेकिन ये सारी कमाई सड़कों और बुनियादी ढाँचे को सुधारने के बजाय मुफ़्त की स्कीमों को लागू करने पर खर्च हो रही है।

प्रचार के दम पर मुद्दों से भटकाया

केजरीवाल की जो सबसे बड़ी कामयाबी थी वो ये कि उन्होंने पूरे 5 साल मीडिया को क़ब्ज़े में रखा। वो लगभग सभी अख़बारों और चैनलों को करोड़ों के विज्ञापन देते रहे, जिसका नतीजा हुआ कि उन्होंने कभी भी दिल्ली के दिवालिया होने की यह कहानी जनता को नहीं बताई। यह भी छिपाया कि सरकारी सौदों में कैसे बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार चल रहा है। इसके बजाय मीडिया ने सारी ताक़त मोदी सरकार की योजनाओं के ख़िलाफ़ माहौल बनाने पर लगाई और जनता को भी कहीं न कहीं भरोसा हो गया कि दिल्ली सरकार ने कुछ भी ग़लत काम नहीं किया। फ़िलहाल अगले पाँच साल में केजरीवाल पर मुफ़्त की अपनी स्कीमों को जारी रखने का दबाव बढ़ेगा। जनता की उम्मीदें भी बढ़ेंगी। ऐसे में देखना होगा कि वो दिवालिया होती दिल्ली की तरफ़ से कब तक लोगों का ध्यान भटकाए रखते हैं।

नए चुनावी वादों का बोझ भी बाक़ी है

केजरीवाल ने इस चुनाव में भी मुफ़्तख़ोरी वाले कई वादे किए हैं, जिन पर अमल सरकारी ख़ज़ाने पर बेहद भारी पड़ेगा।

  1. छात्र-छात्राओं के लिए भी टिकट मुफ़्त करने का एलान किया गया है।
  2. 11 हज़ार नई बसें ख़रीदने का वादा किया है जो फ़िलहाल तो असंभव है।
  3. दिल्ली में 500 किलोमीटर नई मेट्रो लाइन बिछाने का वादा किया है। दरअसल मेट्रो का खर्च केंद्र सरकार भी उठाती है। वैसे 500 किलोमीटर नई लाइन बिछाने की ज़रूरत भी नहीं है।
  4. हर घर में नल से पानी पहुँचाने का वादा किया है। जो कि दरअसल केंद्र की योजना है। यह देखना होगा कि इसका खर्च किस पर आता है।
  5. यमुना साफ़ करने का वादा किया है। जिसके लिए बड़े निवेश और प्रदूषण फैलाने वाली फ़ैक्टरियाँ बंद कराने की ज़रूरत है केजरीवाल ये काम कभी नहीं करने वाले।
  6. जहां झुग्गी वहीं मकान का वादा किया है जो कि दरअसल केंद्र की योजना है। अब अगर केंद्र ने इसका खर्च दिल्ली सरकार पर डाला तो टकराव होगा और ये काम भी कभी नहीं होगा।
  7. जहां तक साफ़-सफाई जैसे मुद्दे हैं यह तय है कि केजरीवाल आगे भी इसके लिए एमसीडी पर ठीकरा फोड़ते रहेंगे और उसे फंड भी नहीं देंगे, क्योंकि ये उनकी राजनीति के भले के लिए है।

(@accountantvarun के इनपुट्स के साथ न्यूज़लूज़ टीम)

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें

comments

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

 Loading ...

Donate to Newsloose.com

एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

या स्कैन करें

Popular This Week

Don`t copy text!