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केजरीवाल नहीं, दिल्ली में मुस्लिम तुष्टिकरण की जीत हुई है

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जीत का असली कारण क्या है इसे लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। मीडिया का एक वर्ग दावा कर रहा है कि केजरीवाल को उनके कामों के कारण सफलता मिली है, लेकिन सच्चाई यह है कि ये केजरीवाल की सांप्रदायिक राजनीति की जीत है। ऐसा कहने के पीछे कुछ ठोस कारण भी हैं। दरअसल दिल्ली में पिछले 5 साल में केजरीवाल ने जो राजनीति की उसमें हिंदुओं को मुफ़्त बिजली और मुफ़्त पानी मिला, लेकिन दूसरी तरफ़ मुसलमानों को वो मिला जो वो चाहते हैं। यही कारण है कि इस बार मुस्लिम इलाक़ों में आम आदमी पार्टी को लगभग सौ फ़ीसदी वोट मिले हैं। यह तो साफ़ था कि बीजेपी को मुस्लिम वोट नहीं मिलने वाले, लेकिन उन्होंने कांग्रेस को भी झटका दे दिया और लगभग सारे वोट आम आदमी पार्टी के खाते में गए। इसका कारण समझने के लिए आपको पिछले पाँच साल के केजरीवाल के कामों पर नज़र डालनी होगी।

मुसलमानों पर मेहरबान, हिंदुओं को झुनझुना

अरविंद केजरीवाल की यह नीति पहली बार तब खुलकर सामने आई थी जब मार्च 2016 में दिल्ली के विकासपुरी इलाक़े में डेंटिस्ट डॉक्टर पंकज नारंग की उनके घर में घुसकर परिवार के सामने हत्या कर दी गई थी। हत्यारे पड़ोस की झुग्गी बस्ती में रहने वाले बांग्लादेशी थे। लिहाज़ा अरविंद केजरीवाल ने उनके परिवार से मिलना तो दूर इस हत्याकांड के विरोध में एक औपचारिक बयान तक देना ज़रूरी नहीं समझा। ऐसा करके उन्होंने दिल्ली में जगह-जगह फैले बांग्लादेशियों और उनकी सरपरस्ती कर रहे कट्टरपंथियों को एक संदेश दे दिया। इसके बाद ऐसे मुद्दों पर उनका ये रवैया लगभग हर समय बना रहा। केजरीवाल ने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए जो दूसरा सबसे बड़ा दांव खेला वो था मस्जिदों के इमामों को 18000 रुपये महीने की सैलरी, इमाम ही नहीं मस्जिद के एक अन्य कर्मचारी को 16000 रुपये के वेतन का भी एलान किया गया। इसके अलावा नोटबंदी और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मौक़ों पर भी केजरीवाल का रवैया कहीं न कहीं मुस्लिम समुदाय को ध्यान में रखकर तय किया गया था। केजरीवाल ने भीड़ की हिंसा के शिकार बने मुसलमानों को मुआवज़े से लेकर नौकरी तक की मदद की। नागरिकता कानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में मरने वालों को भी मजहबी आधार पर 5-5 लाख रुपये बांटे, जबकि ऐसी कोई मदद कभी हिंदुओं को नहीं मिली। हिंदू समुदाय इसी बात से खुश था कि बिजली का बिल कम हो गया या पानी फ्री हो गया।

शाहीन बाग़ के पीछे केजरीवाल का समर्थन

अब यह बात लगभग साफ़ हो चुकी है कि शाहीन बाग़ में एक महीने से चल रहे रास्ता जाम के पीछे अरविंद केजरीवाल का ही हाथ था। यह बात ख़ुद उनके डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने भी खुलकर बोली थी। नागरिकता क़ानून को लेकर केजरीवाल ने जो रवैया अपनाया वह भी ख़ास तौर पर मुस्लिम तुष्टिकरण की उनकी नीति का ही हिस्सा था। जामिया और शाहीन बाग़ में 14 दिसंबर 2019 को हुई हिंसा के पीछे भी आम आदमी पार्टी का हाथ होने का आरोप लगता रहा है। इसके अलावा शरजील इमाम के देश तोड़ने वाले बयान पर भी केजरीवाल ने खुलकर विरोध नहीं किया। कन्हैया को देशद्रोह के मामले से बचाने में केजरीवाल का ट्रैक रिकॉर्ड सबको पता ही है। ये वो सारे पैंतरे थे जिनके दम पर केजरीवाल ने मुसलमानों तक यह संदेश पहुँचा दिया कि उनके मज़हबी एजेंडे को पूरा करने में वो कांग्रेस के मुक़ाबले ज़्यादा कारगर साबित होंगे। नतीजा सारे हिंदू विरोधी और मुस्लिम वोट एकतरफ़ा उनकी झोली में गिरे। इसके अलावा केजरीवाल को बांग्लादेशियों के वोटर कार्ड बनवाने में भी भरपूर मदद की।

हिंदुओं को भ्रमित करने का दांव कारगर रहा

केजरीवाल ने वोटिंग से ठीक पहले हनुमान मंदिर में जाकर दर्शन किया। उन्हें पता था कि हिंदुओं को भ्रमित करने के लिए उनका यह दांव काफ़ी था। इतने भर से कई लोगों को यक़ीन हो गया कि वो हिंदू विरोधी एजेंडे पर काम नहीं करेंगे और शाहीन बाग़ और बाक़ी ग़लत काम भुला दिए गए। इसके अलावा केजरीवाल ने दिल्ली में अपना इकोसिस्टम बनाने में भी ज़ोरदार कामयाबी हासिल की। जानते हैं ऐसे कुछ और कारण:

  1. केजरीवाल ने दिल्ली में सबसे कम समय में अपना इकोसिस्टम बनाया।
  2. अपने लोगों को हर जगह बिठाया। सरकारी सिस्टम से लेकर मीडिया तक में।
  3. हर चैनल और अख़बार में AAP कवर करने वाला उनका कार्यकर्ता ही है।
  4. AAP कवर करने वाले रिपोर्टरों को मालामाल किया। गाड़ी, फ्लैट सबकुछ।
  5. AAP के लोग दिल्ली में कॉलेजों, स्कूलों, अस्पतालों की कमेटी में बिठाए।
  6. फुलपेज विज्ञापनों से पूरे पांच साल मीडिया का मुँह बंद किए रखा।
  7. इनमें वो भी शामिल हैं जिन्हें हम राष्ट्रवादी चैनल या अख़बार समझते हैं।
  8. जिन रिपोर्टरों ने AAP के खिलाफ कुछ किया, उन्हें नौकरी से निकलवाया।
  9. गंदे पानी का मामला सामने आया तो चैनलों ने केजरीवाल को क्लीनचिट दी।
  10. एलजी और केंद्र से झगड़ों में भी केजरीवाल को पीड़ित के तौर पर दिखाया।
  11. विपक्षी होने के बावजूद मीडिया ने बीजेपी के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार किया।
  12. कल्चरल एकेडमी और इवेंट्स के नाम पर कलाकारों की ब्रिगेड तैयार की।
  13. ट्रैफ़िक और DTC मार्शल जैसे काम देकर कार्यकर्ताओं को उपकृत किया।
  14. जनता को मुफ़्त बिजली-पानी और इलाज के नाम पर ख़रीद लिया।
  15. व्यापारियों से 2 लाख का चंदा लेकर टैक्स चोरी की खुली छूट प्रदान की।
  16. आरडब्लूए के पदाधिकारियों को भी अलग-अलग तरीक़ों से उपकृत किया।

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