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हिजाब उतारकर फेंक क्यों रही हैं दुनिया भर की मुस्लिम महिलाएँ!

दुनिया भर में बड़ी संख्या में मुस्लिम लड़कियाँ और महिलाएँ अपने हिजाब उतारकर फेंक रही हैं। दरअसल सोशल मीडिया पर इन दिनों ऐसी मुस्लिम लड़कियों की बाढ़ आई हुई है जो हिजाब उतारकर फेंकते हुए तस्वीरें या वीडियो पोस्ट करती हैं। ऐसा ख़ास तौर पर उन मुस्लिम देशों में हो रहा है जहां हिजाब न पहनने वाली महिलाओं को कड़ी जेल की सज़ा काटनी पड़ती है। ख़ास तौर पर सऊदी अरब और ईरान जैसे देश जहां बिना हिजाब पहने किसी सार्वजनिक स्थान पर जाने वाली महिला को 15 से 20 साल तक की जेल की सज़ा दी जाती है। दरअसल एक फरवरी के एक दिन पहले से ही दुनिया भर में ट्विटर पर #FreeFromHijab और #NoHijabDay ट्रेंड कर रहा है। इसके तहत अब तक लाखों लड़कियां अपने वीडियो या मैसेज पोस्ट कर चुकी हैं। इनमें से कई किसी पब्लिक प्लेस पर अपने सिर और बालों को खोलकर लहरा रही हैं। मुस्लिम देशों में ऐसा करना किसी जोखिम से कम नहीं है क्योंकि कई बार आम लोग ही या पुलिसवाले ऐसी महिलाओं को पीटना शुरू कर देते हैं। यह भी पढ़ें: इस्लाम छोड़कर एक्स-मुस्लिम क्यों बन रहे हैं लोग

इस्लाम के ख़िलाफ़ बग़ावत

दुनिया भर के कट्टरपंथी मुसलमानों ने कुछ साल पहले 1 फ़रवरी के दिन को विश्व हिजाब दिवस के तौर पर मनाना शुरू किया था। इस नाम पर वो महिलाओं पर थोपे जाने वाले इस दक़ियानूसी पहनावे का महिमामंडन करते थे। इससे नाराज़ महिलाओं ने जवाबी तौर पर “नो हिजाब डे” मनाना शुरू कर दिया। इस साल पहली बार हुआ जब हिजाब के ख़िलाफ़ ट्वीट करने वाली महिलाओं की संख्या कथित रूप से समर्थन करने वाली लॉबी से काफ़ी अधिक थी। ज़्यादातर महिलाओं ने वीडियो या तस्वीरों के साथ यह भी बताया है कि कैसे खुली जगह पर बालों और चेहरे को खुला छोड़ना उन्हें आज़ादी का अनुभव देता है। कई लड़कियों ने लिखा है कि हिजाब के अंदर उनकी सांस घुटती है। ये अभियान यूँ तो अमेरिका और यूरोप के आधुनिक देशों में शुरू हुआ था, लेकिन अब ये इस्लामी देशों तक पहुँच चुका है। कई महिलाएँ बेहद जोखिम लेकर भी न सिर्फ़ हिजाब फेंक रही है, बल्कि ऐसा करते हुए अपना वीडियो भी बना रही हैं। ऐसे ज़्यादातर वीडियो में इस्लाम और उसकी परंपराओं के ख़िलाफ़ कमेंट्स भी होते हैं। यह भी पढ़ें: मैंने इस्लाम क्यों छोड़ा… पढ़ें एक पूर्व मुस्लिम का पत्र

क्या कहती हैं मुस्लिम महिलाएँ

इस्लामी देशों में महिलाओं के अधिकार बेहद सीमित हैं। कई जगहों पर तो उन्हें सिनेमा देखने जाने या स्टेडियमों में खेल-कूद में शामिल होने पर भी पाबंदी है। जहां इसकी इजाज़त है वहाँ भी पोशाक को लेकर बेहद कड़े नियम हैं। चाहे कितनी भी गर्मी का मौसम हो उन्हें हर वक़्त हिजाब में ख़ुद को ढंके रखना होता है। कई बार ये हिजाब बुर्के तक होता है जिसमें बस आँखें खुली रहती हैं। अपना हिजाब या बुर्का उतारकर फेंकने वाली कई लड़कियों ने लिखा है कि इसके बाद पहली बार उन्होंने अनुभव किया कि खुली हवा जब बालों और चेहरे पर लगती है तो कितनी ताजगी का एहसास होता है। इन महिलाओं का कहना है कि बचपन से हमें इस दक़ियानूसी पोशाक में बंद कर दिया गया था और अब वो इसे बर्दाश्त करने को तैयार नहीं। हालाँकि ऐसा करने पर कई महिलाओं को कड़ी सज़ा भी हो चुकी है। ईरान में हाल ही में 24 साल की लड़की यासमन अरयानी को इस्लामी अदालत ने 16 साल जेल की सज़ा सुनाई है। क्योंकि उसने हिजाब उतारकर खुले बाल लहराते हुए अपना वीडियो फ़ेसबुक पर डाला था। हिजाब का बायकॉट करने पर अब तक कई मुस्लिम लड़कियों पर हमले हो चुके हैं और कई की हत्या भी हो चुकी है। यह भी पढ़ें: एक मुस्लिम लड़की, जो इस्लाम छोड़कर इंसान बन गई

नीचे आप कुछ ऐसे वीडियो देख सकते हैं जिसमें महिलाओं ने बुर्के और हिजाब के ख़िलाफ़ बग़ावत को दिखाया है। हो सकता है कि आपको भाषा समझ में न आए लेकिन इन सबकी भावनाएं एक ही हैं।

हिजाब यानी चलती फिरती जेल

इस्लाम के अलावा दुनिया के कुछ और धर्मों में भी अलग-अलग नाम से पर्दे की प्रथा मिलती है। लेकिन इस्लाम इकलौता समुदाय है जहां पर इसे कथित तौर पर मज़हब के साथ जोड़ा गया है। हिंदुओं में घूँघट प्रथा कुछ गिने-चुने इलाक़ों में है और वहाँ भी ये सामाजिक बुराई की तरह है न कि किसी धर्मग्रंथ में ऐसा करने को कहा गया है। लेकिन इस्लामी देशों में हिजाब को शरीयत या अल्लाह के हुक्म के तौर पर लागू किया गया है। हिजाब वो सबसे बड़ा कारण है जिसके चलते पिछले कुछ साल में हज़ारों मुस्लिम लड़कियों ने इस्लाम छोड़ दिया। हालाँकि ऐसा करने वाली ज़्यादातर अमीर घरों की लड़कियाँ ही हैं जो अपने मुल्क को छोड़कर अमेरिका या किसी यूरोपीय देश में भागकर शरण ले सकती थीं। यह भी पढ़ें: इस्लाम छोड़कर क्यों भाग रही हैं सऊदी अरब की लड़कियाँ?

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