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मीडिया भूल गया, दिल्लीवाले नहीं भूलेंगे केजरीवाल के ये 15 पाप

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए ज़ोर आज़माइश जारी है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी दावा कर रही है कि उसने 5 साल में बहुत अच्छा काम किया। विज्ञापनों और मीडिया के दम पर उसने कुछ लोगों को इस बात का यक़ीन करवा भी दिया है, लेकिन असलियत कुछ और ही है। पिछले 5 साल में केजरीवाल सरकार ने कई ऐसे ग़लत काम किए हैं, जो दिल्ली के लोगों के दिमाग़ में बने हुए हैं। इन कामों के लिए दिल्ली के लोग केजरीवाल सरकार को कई बार सज़ा भी दे चुके हैं। यह बात नहीं भूलना चाहिए कि 2015 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद से केजरीवाल की आम आदमी पार्टी कोई भी चुनाव नहीं जीत सकी है। लोकसभा, एमसीडी और दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनावों में बार-बार उसे हार का सामना करना पड़ा है। आगे हम आपको बताएँगे केजरीवाल सरकार के वो ग़लत काम जो उसका पीछा आने वाले समय में भी नहीं छोड़ेंगे।

1. नोटबंदी के दौरान ब्लैकमनी का खेल

केजरीवाल के ही कई पूर्व सहयोगी दावा कर चुके हैं कि नोटबंदी के दौरान आम आदमी पार्टी ने सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करते हुए बड़ी मात्रा में अपनी ब्लैकमनी को सफ़ेद कराया था। केजरीवाल उन विपक्षी नेताओं में से थे जिन्होंने नोटबंदी का सबसे ज़्यादा विरोध किया था। उनके करीबी मंत्री सत्येंद्र जैन का हवाला में नाम भी आ चुका है। उनके ख़िलाफ़ अदालत में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और मुक़दमा चल रहा है। इसी तरह केजरीवाल के करीबी IAS अफसर राजेंद्र कुमार के खिलाफ भी मुकदमा चल रहा है। ये सारे मामले कहीं न कहीं नोटबंदी के दौरान हुए भ्रष्टाचार से जुड़े हुए हैं। यह स्थिति तब है जब केजरीवाल भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के दम पर राजनीति में आए थे। आज उनकी पार्टी पर कालेधन, बेनामी संपत्ति से लेकर हवाला तक के बेहद गंभीर आरोप हैं। चंदे में गबन का आरोप केजरीवाल के ही पूर्व सहयोगी लगाते रहे हैं, जिनमें कानूनी कार्रवाई चल रही है। पीडब्लूडी घोटाले में केजरीवाल के रिश्तेदारों पर आरोप लगे थे। बाद में उनके एक रिश्तेदार की रहस्यमय हालात में मौत हो गई थी।

2. दिल्ली में शराब की नदियाँ बहाईं

केजरीवाल सरकार के ख़िलाफ़ आम लोगों की बड़ी नाराज़गी उसकी शराब नीति के कारण भी है। केजरीवाल सरकार ने पिछले 5 साल में दिल्ली की गली-गली में शराब की दुकानें खुलवा दी हैं। राजनीति में आने से पहले केजरीवाल शराबबंदी की बातें करते थे। उनका कहना था कि अगर किसी इलाक़े के 50 फ़ीसदी लोग विरोध करें तो वहाँ शराब का ठेका नहीं खुलना चाहिए। लेकिन सत्ता में आने के बाद उनका अलग ही चेहरा देखने को मिला। 2017 तक दिल्ली भर में शराब के क़रीब 400 नए ठेके खोले जा चुके थे। इनके कारण दिल्ली में न सिर्फ़ अपराध, बल्कि सड़क हादसों में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आसानी से शराब मिलने के कारण स्कूली बच्चों और महिलाओं तक में शराबखोरी में भारी इज़ाफ़ा हुआ है।

3. सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत माँगे

केजरीवाल उन नेताओं में सबसे आगे थे जिन्होंने उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत माँगे। बाद में उन्होंने बालाकोट एयरस्ट्राइक पर भी सवाल खड़े करने की कोशिश की। सर्जिकल स्ट्राइक के समय केजरीवाल ने ट्वीट करके कहा था कि पाकिस्तान नहीं, बल्कि भारत दुनिया में अलग-थलग हो गया है। इस ट्वीट के बाद आम आदमी पार्टी को मिलने वाले चंदे में भारी उछाल आया था। माना जाता है कि बदले में पाकिस्तानियों ने उन्हें अच्छी-खासी रक़म भेजी थी।

4. दिवाली पर हिंदुओं को जेल भिजवाया

इस साल दिवाली पर दिल्ली में जहां कहीं भी लोगों ने आतिशबाजी की, उनके ख़िलाफ़ पुलिस में फ़ोन करके शिकायतें की गईं। बाद में यह बात सामने आई कि ऐसी ज़्यादातर शिकायतें आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों ने की थी।

5. होली पर गुर्जरों के ख़िलाफ़ भड़काया

पिछले साल होली पर गुरुग्राम के एक गाँव में गुर्जर समुदाय के लोगों और एक मुस्लिम परिवार के बीच मारपीट का मामला सामने आया था। ये आपसी झगड़ा था, जिसमें गलती दोनों पक्षों की थी, लेकिन केजरीवाल ने गुर्जर समुदाय के लोगों के ख़िलाफ़ ट्वीट किया कि कौन सा धर्म आपको मुसलमानों को पीटने को कहता है? जबकि सच्चाई यह थी कि पहला हमला मुसलमानों ने किया था।

6. आयुष्मान योजना नहीं लागू होने दी

देश भर में ग़रीबों को 5 लाख रुपये तक मुफ़्त इलाज की सुविधा की आयुष्मान योजना को केजरीवाल ने दिल्ली में लागू नहीं होने दिया। इस दौरान वो ख़ुद सरकारी ख़ज़ाने से दूसरे राज्यों में अपना इलाज करवाते रहे। यहाँ तक कि बेंगलुरु के एक आयुर्वेदिक मसाज सेंटर में 33 लाख रुपये खर्च करने का आरोप भी उन पर लग चुका है।

7. दिल्ली में ईसाई मिशनरियों को खुली छूट

दिल्ली में पिछले 5 साल में धर्मांतरण के मामलों में भारी तेज़ी आई है। ऐसे कई धर्मांतरण कार्यक्रमों में केजरीवाल ख़ुद भी शामिल हुए। पढ़ें रिपोर्ट: दिल्ली में ईसाई मिशनरियों को फैला रहे हैं केजरीवाल

8. अपने मुक़दमों की फ़ीस जनता की जेब से!

अरविंद केजरीवाल ने सत्ता में आने के पहले और बाद में नेताओं पर कई झूठे आरोप लगाए थे। इसके कारण उन पर ढेरों मानहानि के मुक़दमे चल रहे थे। इन मुक़दमों में उन्होंने राम जेठमलानी जैसे वकीलों की सेवाएँ लीं और बाद में खुलासा हुआ कि वकीलों की फ़ीस वो सरकारी ख़ज़ाने से भरने की कोशिश में हैं। बाद में उन्होंने सारे मामलों में माफ़ी मांग-मांग कर जान छुड़ाई।

9. टिकट बेचकर करोड़ों रुपये कमाए

अब तक मायावती चुनाव में टिकट बेचने के लिए बदनाम रही हैं, लेकिन केजरीवाल ने उनको भी पीछे छोड़ दिया। दिल्ली के पार्षद चुनाव में उन पर 2-2 करोड़ रुपये में टिकट बेचने का आरोप लगा था। पंजाब चुनाव में आम आदमी पार्टी के ही नेता सरदार सुच्चा सिंह ने 5 करोड़ रुपये का रेट बताया था। आम आदमी पार्टी को जब दिल्ली से राज्यसभा के लिए तीन नाम चुनने थे तब भी 2 ऐसे लोगों को चुना गया जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने पैसे के दम पर टिकट हासिल किया है।

10. दाह संस्कार पर पाबंदी की कोशिश

शायद कुछ लोग भूल चुके होंगे, लेकिन केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए जिन उपायों का सुझाव दिया था उनमें से एक दाह संस्कार पर पाबंदी की बात भी थी।

11. जामिया में दंगे भड़काने में हाथ

नागरिकता क़ानून के विरोध में दिल्ली के जामिया और शाहीनबाग इलाक़े में भड़के दंगों में आम आदमी पार्टी का सीधा हाथ माना जाता है। पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान को कई बार सरेआम भारत विरोधी भड़काऊ भाषण देते सुना गया है, लेकिन केजरीवाल का उसे पूरा समर्थन मिला हुआ है।

12. खालिस्तानियों के साथ साँठगाँठ

पंजाब चुनाव के समय आम आदमी पार्टी और खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों के बीच साँठगाँठ से जुड़े कई सबूत सामने आए थे। यह बात भी सामने आई थी कि यूरोप और कनाडा में बैठे अलगाववादी संगठन आम आदमी पार्टी को भारी मात्रा में फंड भेज रहे हैं। बदले में केजरीवाल ने कई खालिस्तान समर्थकों को चुनाव में टिकट भी दिया था।

13. विरोधियों की जासूसी करने की कोशिश

2015 में दूसरी बार सत्ता में आने के बाद केजरीवाल ने सबसे पहले एंटी-करप्शन के नाम पर एक जासूसी कंपनी बनाने का काम गुप-चुप तौर पर शुरू किया था। इसके तहत कई पूर्व जासूसी अफ़सरों की भर्ती की गई थी और जासूसी उपकरणों की ख़रीद भी शुरू कर दी गई थी। लेकिन तभी मामला खुल गया और उपराज्यपाल ने सरकार ने इस पर रोक लगा दी। क्योंकि क़ानून के तहत दिल्ली की सरकार ऐसा कोई काम नहीं कर सकती। बाद में पता चला था कि केजरीवाल इस जासूसी सिस्टम के ज़रिए अपने विरोधियों पर नज़र रखने की तैयारी में थे।

14. विज्ञापनों पर फूंके जनता के पैसे

दिल्ली में सरकारी स्कीमों के विज्ञापन के नाम पर जनता के पैसों की जमकर फ़िज़ूलखर्ची हुई। कई योजनाएँ तो ऐसी भी रहीं, जिनका विज्ञापन का बजट उन योजनाओं से ज़्यादा रहा। जैसे कि छात्रों को स्कॉलरशिप की योजना के विज्ञापन पर कई लाख खर्च हुए लेकिन इसका फ़ायदा मात्र 3-4 छात्रों ने ही लिया। यही हाल तीर्थयात्रा और नौकरी की योजनाओं का हुआ।

15. 21 संसदीय सचिवों का मामला

यह भ्रष्टाचार का वो मामला था जिसमें केजरीवाल रंगे हाथ पकड़े गए थे। क़ानून के तहत नियम है कि एक तय संख्या से ज़्यादा लोगों को मंत्री नहीं बनाया जा सकता। सत्ता की मलाई विधायकों को खिलाने के मक़सद से केजरीवाल ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव का पद दिया। जिनमें उन्हें मंत्रियों के जैसी सुविधाएँ दी गईं। वो नियुक्तियाँ कोर्ट ने रद्द कर दीं और केजरीवाल अपने मंसूबे में सफल नहीं हो सके।

हैरानी की बात है कि मीडिया इन सारे मुद्दों की अब बात भी नहीं कर रहा। ज़ाहिर है दिल्ली के लोग जब अगली सरकार चुनने के लिए वोट डालने जाएँगे तो उनके दिमाग़ में केजरीवाल सरकार के ये बुरे काम ज़रूर होंगे।

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