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महाराष्ट्र में शरद पवार के ‘महा विश्वासघात’ की इनसाइड स्टोरी

महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर पिछले दिनों मची खींचतान के अंदर की कहानी सामने आ रही है। यह बात भी पता चली है कि एनसीपी नेता शरद पवार ने किस तरह से नरेंद्र मोदी और अमित शाह को ऐसा धोखा दिया, जिसे वो शायद पूरे जीवन भूल नहीं सकेंगे। न्यूज़लूज़ को सूत्रों के हवाले से जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक शरद पवार ने ही अजित पवार को बीजेपी के पास भेजा था। बीजेपी के बड़े नेता इस झांसे में आ गए और उसी का नतीजा निकला कि देवेंद्र फडणवीस की सरकार को शपथ लेने के चौथे दिन ही इस्तीफा देना पड़ा। इस पूरे मामले में सबसे अहम जानकारी यह है कि शरद पवार ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात में समर्थन के बदले 2 बड़ी मांगें रखी थीं, पहली यह कि बीजेपी देवेंद्र फडणवीस की जगह किसी और को मुख्यमंत्री बनाए और दूसरी यह कि सुप्रिया सुले को केंद्र सरकार में कृषि मंत्री बनाया जाए। इस मुलाकात में ही पीएम मोदी ने दोनों शर्तें मानने से साफ मना कर दिया था। जिसके बाद शरद पवार ने एक ऐसा जाल बुना जिसमें बीजेपी फंस गई।

क्या थी शरद पवार की साजिश?

सूत्रों के मुताबिक शरद पवार ने अपने भतीजे अजित पवार को सबसे पहले महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के पास भेजा। अजित पवार ने उनसे कहा कि शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की मिलीजुली सरकार में उन्हें डिप्टी सीएम नहीं बनाया जा रहा है। इसलिए वो अपने समर्थक विधायकों के साथ बीजेपी को समर्थन देना चाहते हैं। अजित पवार ने दावा किया कि उनके पास करीब 40 विधायक हैं। चूंकि अजित पवार एनसीपी के विधायक दल के नेता चुने जा चुके थे, इसलिए उनकी बात पर भरोसा न करने की कोई वजह नहीं थी। क्योंकि किसी को समर्थन देने या न देने या व्हिप जारी करने का अधिकार विधायक दल के नेता का ही होता है। अजित पवार ने एक शर्त रखी कि उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जाए और उनकी पसंद के 20 मंत्री बनाए जाएं। बीजेपी इस पर राजी हो गई, क्योंकि अजित पवार ने मंत्री पद तो मांगे, लेकिन पसंदीदा मंत्रालयों की कोई शर्त नहीं रखी। उनकी एक और शर्त यह थी कि सरकार गठन और शपथ ग्रहण 23 नवंबर की सुबह ही कर लिया जाए, ताकि शरद पवार को समय न मिले। बीजेपी को यह पता था कि अजित पवार और शरद पवार के बीच सब ठीक नहीं चल रहा है, लिहाजा उन्होंने इस शर्त पर भी भरोसा कर लिया और सुबह-सुबह शपथ ग्रहण करवा दिया। बीजेपी नेताओं का मानना था कि अजित पवार खुद आए हैं, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि बीजेपी ने पवार का परिवार तोड़ा है। लेकिन यहीं पर उनसे चूक हो गई।

भतीजे अजित पवार को बनाया मोहरा

शरद पवार ने खुद अजित पवार से नहीं कहा था कि वो बगावत करके बीजेपी के पास जाएं, बल्कि इसके लिए उन्होंने बीजेपी से आए विधायक धनंजय मुंडे को मोहरा बनाया। धनंजय मुंडे ने ही अजित पवार को आइडिया दिया कि क्यों न विधायकों के साथ बीजेपी को समर्थन दे दिया जाए। अजित पवार इसके लिए तैयार हो गए। लेकिन दिन होते-होते धनंजय मुंडे विधायकों समेत वापस शरद पवार खेमे में लौट आए। यह सब देखकर अजित पवार के होश उड़ गए। इस दौरान अजित पवार को मनाने के लिए शरद पवार ने कई नेताओं को भेजा। लेकिन उन्हें यह नहीं बताया कि यह सारा खेल दरअसल उन्हीं का रचा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने जब फडणवीस को बहुमत साबित करने के लिए समय तय कर दिया। तब ऐन मौके पर शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले के पति सदानंद सुले को अकेले अजित पवार के पास भेजा। सदानंद सुले ने ही अजित पवार को पूरी बात बताई। यह भी बताया कि वापस लौटने में ही भलाई है। शरद पवार उन्हें माफ कर देंगे, क्योंकि उन्होंने ही यह बगावत करवाई है। अजित पवार ने जब इस्तीफा देने के लिए देवेंद्र फडणवीस को फोन किया तो उसी बातचीत में उन्होंने इस सियासी खेल का इशारा भी कर दिया।

मोदी शाह को थी धोखे की खबर

हमारे सूत्र के मुताबिक शनिवार 23 नवंबर की दोपहर को ही मोदी और शाह को पता चल चुका था कि शरद पवार ने उनके साथ कितना बड़ा विश्वासघात किया है। वो जानते थे कि अब कुछ नहीं हो सकता। ऐसे में सरकार गिर जाने में ही भलाई है। लिहाजा महाराष्ट्र बीजेपी के नेताओं को बता दिया गया कि वो दूसरी पार्टियों के विधायकों से संपर्क की कोशिश न करें। अब यह कहना बेहद मुश्किल है कि पवार के इस छल का मोदी-शाह की जोड़ी कैसे और कब जवाब देगी।

फडणवीस से आखिर दुश्मनी क्या थी?

यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर शरद पवार को देवेंद्र फडणवीस से क्या दुश्मनी थी जो वो उनके अलावा किसी को भी सीएम बनवाना चाहते थे? एनसीपी की शिकायत यह है कि फडणवीस की सरकार के दौरान महाराष्ट्र में उसके कई अवैध धंधों पर लगाम कसी गई। फडणवीस सरकार ने सिंचाई घोटाले की फाइल भी खुली रखी और शरद पवार के भ्रष्टाचार के मामलों में भी कोई ढिलाई नहीं दिखाई। ठीक यही स्थिति शिवसेना की थी, जिसका पूरे महाराष्ट्र में वसूली का नेटवर्क फडणवीस सरकार ने तोड़ डाला। यहां तक कि बीएमसी में भी शिवसेना के भ्रष्टाचार पर फडणवीस ने नकेल कसनी शुरू कर दी थी।

(न्यूज़लूज़ ब्यूरो)

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