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क्या दिवाली की रात हिंदुओं पर थी केजरीवाल की ‘बुरी नज़र’?

अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी पर सैकड़ों हिंदू परिवारों की दिवाली काली करने का आरोप सामने आ रहा है। सोशल मीडिया में ऐसा दावा किया जा रहा है कि दिवाली की रात पटाखे फोड़ने वालों की शिकायत करने के लिए आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के तमाम इलाकों में अपने कार्यकर्ताओं की टीम खबरी के तौर पर तैनात कर रखी थी। दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने भी माना है कि “दिवाली की रात पटाखे फोड़ने की शिकायतों में एक पैटर्न था और जितनी फोन कॉल आईं उनमें से ज्यादातर लोग एक पार्टी विशेष से किसी न किसी तरह से जुड़े हैं।” शिकायतों की जांच के बाद पाया गया कि ज्यादातर शिकायतकर्ता वो हैं जो एक राजनीतिक पार्टी की गतिविधियों में या तो नियमित रूप से शामिल होते हैं या फिर उसके समर्थक हैं। कुछ शिकायतें दूसरे इलाकों से लोगों को भेजकर भी करवाई गई थीं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे फोड़ने का समय तय कर रखा है, जिसके पहले और बाद में पटाखे फोड़ने पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में आमतौर पर तभी कार्रवाई होती है जब कोई व्यक्ति पटाखे फोड़े जाने की शिकायत पुलिस से करे क्योंकि पुलिस के लिए यह संभव नहीं कि वो हर गली और हर घर की निगरानी करे। सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि एक रणनीति के तहत दिवाली पर पटाखे फोड़ने वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायतें की गई थीं।

रात भर फोन करते रहे थे खबरी!

दिवाली की रात पटाखे फोड़ने से जुड़ी शिकायतों के लिए दिल्ली पुलिस की पीसीआर वैन को कुल 940 फोन कॉल की गई थीं। पुलिस ने इनमें से 371 शिकायतों पर केस दर्ज किया और 260 लोगों को गिरफ्तार भी करना पड़ा। शिकायतों की संख्या के हिसाब से देखें तो पुलिस ने काफी कम लोगों पर कार्रवाई की है। लेकिन जो गिरफ्तारियां हुई हैं वो भी पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक हैं। हमारे सूत्र के अनुसार “यह एक तरह का ट्रैप था क्योंकि शिकायतों पर अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो केजरीवाल सरकार इसे सुप्रीम कोर्ट में उसके खिलाफ इस्तेमाल करती।” उनका कहना है कि पार्टी ने पटाखे फोड़ने वालों को गिरफ्तार करवाने का ये खेल बहुत सोच-समझकर रचा था क्योंकि ज्यादा लोग गिरफ्तार होंगे तो लोगों में दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के लिए गुस्सा पैदा होगा। दिल्ली बीजेपी आम आदमी पार्टी की इस तैयारी को समय रहते भांप नहीं पाई। जिस तरह से योजनाबद्ध तरीके से शिकायतें करवाई गईं उससे यह शक भी मजबूत होता है कि कई लोगों को जानबूझकर गलत आरोप लगाकर फंसाया गया होगा।

पुलिस पर था कार्रवाई का दबाव?

जब इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें आ रही हों तो पुलिस पर भी कार्रवाई का दबाव पैदा हो गया। इसी का नतीजा था कि 2 सुतली बम के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। बाकी कई जगहों पर भी बहुत मामूली आतिशबाजी पर पुलिस कार्रवाई और यहां तक कि गिरफ्तारी भी हुई है। जाहिर है यह सब केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करने और हिंदू समुदाय के अंदर दिवाली पर आतिशबाजी के लिए डर बिठाने के मकसद से किया गया था। इसी रणनीति के तहत बीजेपी नेताओं को भी टारगेट किया गया। जैसे कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की एक तस्वीर हाथों में पटाखा लिए आ गई तो आम आदमी पार्टी के बड़े-बड़े नेताओं ने बयान दिया कि वो लोगों को आतिशबाजी के लिए उकसा रहे हैं। जबकि मनोज तिवारी ने बताया था कि वो ग्रीन क्रेकर था जो सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत ही उन्होंने फोड़ा था। लेकिन जिस तरह से आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया सामने आई उसने भी इस शक को मजबूत कर दिया कि दिवाली पर शिकायतों की इस बाढ़ के पीछे कोई न कोई सियासी खेल जरूर है।

सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने इस बात को लेकर आशंका जताई थी। हालांकि न्यूज़लूज़ इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता। सोशल मीडिया पर किए गए इन दावों के जवाब में आम आदमी पार्टी, बीजेपी या कांग्रेस की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। अगर वो इस बारे में प्रतिक्रिया देंगे तो हम उन्हें भी प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे।

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