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देश के 7 सबसे अजूबे मंदिर जिनके रहस्य कोई समझ नहीं पाया

करणी माता का मंदिर (Karni Mata Temple)

राजस्थान के बीकानेर का यह मंदिर अपने आप में बहुत ही अनोखा मंदिर है। इस मंदिर में रहते हैं लगभग 20 हजार काले चूहे। लाखों की संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामना पूरी करने आते हैं। करणी देवी को दुर्गा का अवतार माना जाता है। इसे चूहों वाला मंदिर भी कहा जाता है। यहां चूहों को काबा कहते हैं और इन्हें बाकायदा भोजन कराया जाता है और इनकी रक्षा की जाती है। यहां इतने चूहे हैं कि आपको पांव घिसटकर चलना पड़ेगा। अगर एक भी चूहा पैरों के नीचे आ गया तो इसे अपशकुन माना जाता है। कहा जाता है कि कोई चूहा आपके पैरों के ऊपर से गुजर गया तो आप पर देवी की कृपा हो गई समझो और अगर किसी को सफेद चूहा दिख गया तो समझिए हर मनोकामना पूरी होने वाली है।

राजस्थान के करणी माता के मंदिर में हजारों चूहे रहते हैं, जिनकी बाकायदा सेवा की जाती है।

 

2. शनि शिंगणापुर (Shani-shingnapur)

यह देश में शनि का सबसे प्रमुख मंदिर है। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में शिंगणापुर में बना यह मंदिर दुनिया भर में मशहूर है। यहां शनिदेव की पत्थर की प्रतिमा बिना किसी छत्र या गुंबद के खुले आसमान के नीचे एक संगमरमर के चबूतरे पर है। शिंगणापुर शहर में घरों में खिड़की, दरवाजे और तिजोरी नहीं बनाई जाती। दरवाजों की जगह सिर्फ पर्दे लगाए जाते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि यहां चोरी नहीं होती। कहा जाता है कि जो भी चोरी करता है उसे शनि महाराज खुद सजा दे देते हैं। शनि के प्रकोप से मुक्ति के लिए यहां पर हर शनिवार लाखों लोग आते हैं।

शनि शिंगणापुर मंदिर में हर शनिवार को मेला लगता है।

 

3. सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple)

सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। प्राचीनकाल में इसका शिवलिंग हवा में झूलता था, लेकिन आक्रमणकारियों ने इसे तोड़ दिया। माना जाता है कि 24 शिवलिंगों की स्थापना की गई थी उसमें सोमनाथ का शिवलिंग बीचोबीच था। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह के पास बने इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण खुद चन्द्रदेव ने किया था। इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है। इस मंदिर को अब तक 17 बार नष्ट किया जा चुका है और हर बार इसे दोबारा बनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण ने यहीं पर देहत्याग किया था।

12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ मंदिर का गर्भगृह

4. कामाख्या मंदिर (Kamakhya Mandir)

असम के गुवाहाटी में बने कामाख्या मंदिर को तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है। माता के 51 शक्तिपीठों में से एक इस पीठ को सबसे विशेष माना जाता है। यहां त्रिपुरासुंदरी, मतांगी और कमला की प्रतिमाएं स्थापित हैं। दूसरी ओर 7 अन्य रूपों की प्रतिमा अलग-अलग मंदिरों में स्थापित की गई है, जो मुख्य मंदिर को घेरे हुए है। माना जाता है कि साल में एक बार अंबूवाची पर्व के दौरान मां भगवती रजस्वला होती हैं और मां भगवती की गर्भगृह में महामुद्रा (योनि-तीर्थ) से निरंतर 3 दिनों तक जल-प्रवाह के स्थान से रक्त भी प्रवाहित होता है।

असम का कामाख्या मंदिर तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए मशहूर है।

5. खजुराहो का मंदिर (Khajuraho Temples)

खजुराहो मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में एक छोटा सा कस्बा है। भारत में ताजमहल के बाद सबसे ज्यादा लोग यहां पर बने मंदिरों को देखने के लिए आते हैं। यह भारतीय आर्य स्थापत्य और वास्तुकला की नायाब मिसाल है। चंदेल शासकों ने इन मंदिरों का निर्माण 900 से 1130 ईसवीं के बीच करवाया था। इन मंदिरों में विभिन्न यौन मुद्राओं में मूर्तियां बनी हुई हैं। ये सवाल उठता है कि आखिर क्या कारण थे कि उस काल के राजा ने सेक्स को समर्पित मंदिरों की एक पूरी श्रृंखला बनवाई?

खजुराहो मंदिर दुनिया में अपनी तरह का इकलौता है।

6. उज्जैन का काल भैरव मंदिर (Kaal bhairav temple, Ujjain)

इस मंदिर में काल भैरव की मूर्ति मदिरापान करती है इसीलिए यहां प्रसाद की जगह शराब चढ़ाई जाती है। यही शराब यहां प्रसाद के रूप में भी बांटी जाती है। कहा जाता है कि काल भैरव नाथ इस शहर के रक्षक हैं। इस मंदिर के बाहर साल के 12 महीने और 24 घंटे शराब उपलब्ध रहती है।

उज्जैन में काल भैरव की प्रतिमा शराब पीती है। कई बार इसके वैज्ञानिक कारणों की जांच की गई, लेकिन कुछ भी पता नहीं चला।

7. ज्वाला देवी मंदिर (Jawala Devi Mandir)

ज्वालादेवी का मंदिर हिमाचल के कांगड़ा घाटी के दक्षिण में 30 किमी की दूरी पर है। यह मां सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां माता की जीभ गिरी थी। हजारों वर्षों से यहां देवी के मुख से अग्नि निकल रही है। कहते हैं कि इस मंदिर की खोज पांडवों ने की थी। यहां एक तांबे का पाइपनुमा बना हुआ है, जिससे नेचुरल गैस निकलती रहती है। इनसे अग्नि की अलग-अलग 9 लपटें निकलती रहती हैं। कहते हैं कि ये अग्नि अलग-अलग देवियों को समर्पित हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मृत ज्वालामुखी की अग्नि हो सकती है।

हिमाचल प्रदेश के ज्वाला मंदिर में हमेशा अग्नि जलती रहती है।

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