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मुर्शिदाबाद हत्याकांड का वो ‘सच’ जो ममता सरकार छिपा रही है!

बंगाल के मुर्शिदाबाद में आरएसएस कार्यकर्ता बंधु प्रकाश पाल की पूरे परिवार समेत हत्या के मामले में नई जानकारियां सामने आ रही हैं। बंगाल पुलिस ने मंगलवार को दावा किया था कि एक बीमा एजेंट ने पैसों की लेन-देन के लिए इस हत्याकांड को अंजाम दिया। लेकिन स्थानीय सूत्रों से जो जानकारी सामने आ रही है वो कुछ और ही इशारा कर रही है। इसके मुताबिक बंगाल पुलिस की पूरी थ्योरी सच को छिपाने के मकसद से गढ़ी गई है। एक सोशल मीडिया यूज़र ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को टैग करके हत्यारों के बारे में अहम सुराग दिए हैं। इसे फेसबुक और ट्विटर पर हजारों लोग शेयर कर चुके हैं। इस दावे के मुताबिक आरएसएस बंधु प्रकाश पाल की हत्या इस्लामी कट्टरपंथियों ने की है। एक मस्जिद के निर्माण को लेकर बंधु प्रकाश पाल रोड़ा बन रहे थे, जिसके बाद उन्हें पूरे परिवार समेत रास्ते से हटा दिया गया। बंगाल पुलिस ने अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक इस दावे की जांच नहीं की है, न ही इस बारे में कोई औपचारिक खंडन ही किया है। दुर्गा विसर्जन के दिन बंधु प्रकाश पाल, उनके 6 साल के बेटे और 8 महीने की गर्भवती पत्नी की बेरहमी के साथ हत्या कर दी गई थी।

हत्या के बारे में क्या है दावा?

सोशल मीडिया पर कई बड़े-बड़े मामलों में सच सामने ला चुके डेटा साइंटिस्ट डॉक्टर गौरव प्रधान ने ट्वीट करके दावा किया है कि “मुर्शिदाबाद के लेबूटोला में बंधु प्रकाश पाल का घर चारों तरफ से मुस्लिम आबादी से घिरा हुआ है। उनके घर से सटी 17 कट्ठा जमीन है, जिस पर मुस्लिम लोग मस्जिद बनाना चाहते थे। इसे रुकवाने के लिए बंधु प्रकाश पाल ने चिट्ठी लिखी थी। चिट्ठी लीक हो गई, जिससे उनका नाम जाहिर हो गया। इसके बाद मस्जिद कमेटी ने उन्हें पूरे परिवार समेत मार डाला।” डॉक्टर गौरव प्रधान ने अपने इस ट्वीट में ममता बनर्जी को टैग किया है और अपील की है कि वो इसकी जांच करवाएं। बंगाल सरकार या पुलिस ने अब तक इस ट्वीट पर कोई जवाब नहीं दिया है। जबकि यह बेहद संवेदनशील मामला है और उम्मीद की जाती है कि वो इस मामले में सफाई देने के लिए सामने आएंगे। सोशल मीडिया के अलावा भी कई स्थानीय लोग हत्या के बाद से ही यह दावा कर रहे थे। लेकिन किसी अनजान भय से वो खुलकर सामने आने से हिचक रहे हैं। डर इतना ज्यादा है कि लोग बंगाल पुलिस पर भी भरोसा करने को तैयार नहीं हैं।

बंगाल पुलिस की थ्योरी क्या है?

मुर्शिदाबाद की पुलिस इस हत्याकांड को सुलझाने के नाम पर बेहद बचकाने तर्क दिए हैं। उसके मुताबिक मृतक बंधु प्रकाश एलआईसी के एजेंट का काम भी करते थे। उन्होंने उत्पल नामक 20 साल के एक युवक का बीमा किया था। पहली किश्त की रसीद दे दी, लेकिन दूसरी किश्त की रसीद बार-बार मांगने के बावजूद नहीं दे रहे थे। इसलिए उत्पल उनके घर गया। उसको आया देखकर बंधु प्रकाश ने दरवाजा खोला। दरवाजा खुलते ही उत्पल ने साथ लाए हंसिए से उनपर हमला कर दिया। उनकी मृत्यु होने के बाद सबूत खत्म करने के लिए उनकी पत्नी और बच्चे को भी हंसिए से मार दिया। उत्पल घर बनाने के मिस्त्री का काम करता है। उसने जो पॉलिसी ली है उसका प्रीमियम 24 हजार रुपया है। एक मिस्त्री कितना कमाता है कि साल में 24 हजार रुपया वो सिर्फ बीमा का प्रीमियम भरता है? बंधुप्रकाश ने जब दरवाजा खोला और उत्पल ने हमला किया तो उन्होंने बचाव क्यों नहीं किया? क्या कोई शोर-शराबा नहीं हुआ होगा? घर में किसी तरह की छीना-झपटी या मारपीट के निशान क्यों नहीं मिले?

यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है कि मात्र 24 हजार रुपये के लिए कोई इतना बड़ा कांड कर देगा। अगर वाकई बीमा एजेंट के तौर पर बंधु प्रकाश ने धांधली की थी तो उनकी शिकायत पुलिस में करके पैसे हासिल किए जा सकते थे। यह सवाल भी है कि अगर बीमा के पैसों को लेकर ऐसा कोई विवाद था तो क्या इसकी जानकारी आस-पड़ोस में किसी को थी? बंगाल पुलिस पर अक्सर यह आरोप लगते रहे हैं कि वो ऐसे मामलों को दबा देती है जिनमें आरोपी मुसलमान हों। पिछले दिनों कोलाकात के एक अस्पताल में 200 से ज्यादा मुसलमानों की भीड़ ने हमला कर दिया था। उस मामले में कई दिन तक डॉक्टरों की हड़ताल के बावजूद ममता बनर्जी आरोपियों को गिरफ्तार न करने पर अड़ी रही थीं। इसी तरह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भी बीजेपी के कई कार्यकर्ताओं की रहस्यमय हालात में मौत हुई थी। नीचे आप गौरव प्रधान का वो ट्वीट देख सकते हैं, जिसमें उन्होंने हत्या के बारे में नई जानकारी सामने लाने की कोशिश की है।

बंगाल में है डर का माहौल

इस हत्याकांड को लेकर बंगाल में डर का माहौल है। लोग इसके बारे में बात करने से भी बच रहे हैं, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि उनका भी यही हाल होगा। यहां तक कि लोग फोन पर भी इस मामले की चर्चा करने को तैयार नहीं होते। डर कितना है यह इसी बात से समझा जा सकता है कि बंधु प्रकाश पाल की बुजुर्ग मां ने अचानक यह कहना शुरू कर दिया कि उनके बेटे का आरएसएस से कोई लेना-देना नहीं है। जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तमाम स्थानीय नेता इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि बंधु प्रकाश पाल उनसे जुड़े हुए थे।

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