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हठयोग की आड़ में ‘शत्रु मारण यज्ञ’ कर रहे हैं दिग्विजय सिंह

भोपाल में साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ चुनाव मैदान में खड़े कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह जादू-टोने और तंत्र-मंत्र का सहारा ले रहे हैं। अक्षय तृतीया के मौके पर उन्होंने भोपाल में हठयोग के नाम पर एक बड़ा तांत्रिक आयोजन किया है। इस बात की पक्की जानकारी सामने आ रही है कि ये कोई हठयोग नहीं, बल्कि जीत के लिए कराया जा रहा शत्रु मारण यज्ञ है। इस यज्ञ का आयोजन दिग्विजय सिंह के करीबी तांत्रिक कंप्यूटर बाबा को सौंपा गया है। इसके लिए भोपाल में करीब 7000 साधुओं को बुलाया गया है। ये साधु तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच अलग-अलग जलते हुए कंडों (गोबर के उपलों) का घेरा बनाकर उनके बीच बैठे। इस पूरे आयोजन के बारे में हमने योग और तंत्र के कुछ जानकारों से बात की। उनके मुताबिक हठयोग किसी कार्य की सिद्धि तक जारी रहता है, जबकि यह आयोजन महज कुछ घंटों में ही पूरा हो गया। इसी बात से शक पैदा होता है कि असली मकसद कुछ और ही था, जिसे हठयोग की आड़ में किया गया। दिग्विजय सिंह तंत्र-मंत्र पर अपने विश्वास के लिए पहले भी सुर्खियों में रहे हैं। 2012 में खबर आई थी कि सोनिया गांधी की नजरों में दोबारा चढ़ने के लिए उन्होंने काली चौदस के दिन विशेष तांत्रिक अनुष्ठान करवाया था।

परशुराम जयंती पर मां छिन्नमस्ता का हवन

भोपाल में कंप्यूटर बाबा के एक करीबी व्यक्ति ने न्यूज़लूज़ से फोन पर बातचीत में बताया कि “हठयोग तो सिर्फ दिखावे के लिए है। असली पूजा वो है जो कंप्यूटर बाबा ने दिग्विजय सिंह से करवाई। इस पूजा में उनके साथ उनकी दूसरी पत्नी अमृता राय ने भी आहुतियां दीं।” उन्होंने बताया कि दरअसल यह मां छिन्नमस्ता का शत्रु मारण हवन था। इसके लिए परशुराम जयंती का दिन बहुत सोच-समझकर रखा गया था। छिन्नमस्ता देवी शत्रु नाश की सबसे बड़ी देवी मानी जाती हैं। भगवान परशुराम ने इसी विद्या के प्रभाव से अपार बल अर्जित किया था। भगवती छिन्नमस्ता दस महाविद्याओं में प्रचंड चंड नायिका के नाम से पूजी जाती हैं। शास्त्रों में देवी छिन्नमस्ता को प्राणतोषिनी कहा गया है। मतलब ये कि विधिवत उनकी पूजा से शत्रु की मृत्यु निश्चित होती है। यह यज्ञ आमतौर पर तब किया जाता है जब सामने कोई सात्विक और आध्यात्मिक प्रवृत्ति वाला शत्रु हो। समझना मुश्किल नहीं है कि इस मामले में दिग्विजय सिंह का शत्रु कौन है। लेकिन यह याद रखना होगा कोई हवन या यज्ञ तभी सफल होता है जब उसे करने वाले की मंशा लोककल्याण की हो।

भूत-प्रेत और टोने-टोटके की भी कोशिश!

कंप्यूटर बाबा के करीबी हमारे सूत्र ने जो सबसे चौंकाने वाली बात बताई वो यह कि दिग्विजय सिंह ने बाबा और कुछ दूसरे तांत्रिकों की मदद से टोने-टोटके की भी कोशिशें की हैं। उन्होंने बताया कि एक तांत्रिक ने ‘विनियोग मंत्र’ के जाप की जिम्मेदारी ली है। यह एक तरह की साधना है जिसमें शत्रु के पैरों की मिट्टी लेकर उसका पुतला बनाया जाता है। इसके आगे कृष्ण पक्ष की अष्टमी से लेकर चतुर्दशी तक रोज जाप करना होता है। इस पूजा में बकरे की बलि दी जाती है और फिर उसके खून से पुतले को नहला दिया जाता है। कहा जाता है कि जब ऐसा किया जाता है तो शत्रु को खून की उल्टियां आनी शुरू हो जाती हैं और कुछ दिन में उसकी मौत हो जाती है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि उस तांत्रिक को साध्वी प्रज्ञा के पैरों के नीचे की मिट्टी मिल पाई या नहीं। इस मिट्टी की तलाश में वो तांत्रिक कुछ दिन पहले साध्वी प्रज्ञा के आसपास भी मंडराता देखा गया था। ये सारी बातें कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की दिमागी हालत की तरफ भी इशारा कर रही हैं कि कैसे वो एक चुनाव की जीत के लिए तंत्र मंत्र का सहारा लेने पर उतारू हो चुके हैं।

कौन हैं कंप्यूटर बाबा?

कंप्यूटर बाबा खुद को धर्मगुरु बताते हैं लेकिन उनकी पहचान एक तांत्रिक के तौर पर है। कांग्रेस से अपनी करीबी के लिए कंप्यूटर बाबा हमेशा से जाने जाते हैं। कुछ दिन पहले ही मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है। कंप्यूटर बाबा का असली नाम नामदेव दास त्यागी है। इंदौर में जन्मे बाबा धर्म-कर्म से ज्यादा राजनीति में रुचि लेते हैं। बाबा होने के बावजूद वो अपने साथ एक कंप्यूटर रखा करते थे, जिस पर उनके गुरु ने 1998 में उन्हें कंप्यूटर बाबा का नाम दिया। बाद में वो इसी नाम से मशहूर हो गए। कंप्यूटर बाबा दिगंबर अखाड़े से ताल्लुक रखते हैं और हाल ही में हुए कुंभ में वो शाही स्नान के लिए हेलीकॉप्टर से पहुंचे थे। कुंभ से ठीक पहले अखाड़ा परिषद से निकाले जाने के कारण भी कंप्यूटर बाबा चर्चाओं में रहे थे। कांग्रेस के करीबी ढोंगी बाबा आचार्य प्रमोद कृष्णम के साथ भी कंप्यूटर बाबा की खूब छनती है। ये दोनों बाबा हिंदू धर्म के नाम पर हर वो काम करते हैं जिससे आम हिंदू धर्मावलंबियों की आस्था को ठेस पहुंचती हो।

(अजीत यादव की रिपोर्ट)

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