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जानिए क्यों भारत को सस्ते में F-21 देने को बेताब है अमेरिका

एफ-21 की ये तस्वीर Lockheed Martin India ने ट्वीट की है।

अमेरिकी लड़ाकू विमान कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने भारत को अपना सबसे ताकतवर लड़ाकू विमान एफ-21 बेचने की पेशकश की है। खास बात यह है कि अमेरिका इस विमान के बदले भारत को ‘हेवी डिस्काउंट’ देना चाहता है। दरअसल राफेल की तरह एफ-21 भी दुनिया की सबसे बेहतरीन मल्टीरोल लड़ाकू विमानों में से एक है। इसी का पुराना वर्जन एफ-16 पाकिस्तान के पास है, जिन्हें अमेरिका ने उसे दे रखा है। अमेरिकी कंपनी ने सस्ता एफ-21 देने ही नहीं, बल्कि भारत में उसकी फैक्ट्री खोलने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर अमेरिका की इस दरियादिली के पीछे असली कारण क्या है? दरअसल इस सवाल का जवाब है विंग कमांडर अभिनंदन का वो कारनामा जिसमें उन्होंने मिग-21 विमान से पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिराया था। इस घटना के बाद लॉकहीड मार्टिन का नाम बहुत खराब हुआ है, जिसके कारण आगे चलकर उसे कई देशों से मिलने वाले ऑर्डर छिनने का खतरा है। लिहाजा कंपनी ने अपने विमान की इमेज सुधारने की नीयत से भारत को अपना आधुनिकतम एफ-21 विमान बेचने की कोशिश शुरू कर दी है। ताकि उसके पास यह कहने को रहे कि भारत ने भले ही एफ-16 को मार गिराया था, लेकिन उसे भी एफ-21 की ताकत पर भरोसा है। यह भी पढ़ें: चीन के दबाव में कांग्रेस ने नहीं खरीदा था राफेल विमान, बड़ा खुलासा

हर शर्त मानने को तैयार अमेरिकी कंपनी

दरअसल भारत जब लड़ाकू विमान खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर रहा था तब लॉकहीड मार्टिन ने एफ-16 बेचने की पेशकश रखी थी। वो इससे बेहतर विमान भारत को देने को तैयार नहीं था। भारत के लिए मुश्किल यह थी कि एफ-16 पाकिस्तान के भी पास है। ऐसे में भारत के लिए संभव नहीं था कि वो इसे खरीदे। एफ-16 विमानों को खारिज करने के बाद ही भारतीय वायुसेना ने फ्रांस में बने राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का फैसला किया था। राफेल थोड़ा महंगा जरूर है, लेकिन एफ-16 या एफ-21 के मुकाबले हमेशा बेहतर और अधिक ताकतवर माना जाता है। यह भी माना जाता है कि देश में राफेल विमानों को लेकर कांग्रेस के सारे आरोपों के पीछे दरअसल लॉकहीट मार्टिन का ही हाथ है। दरअसल अमेरिका को यह उम्मीद कतई नहीं थी कि भारतीय वायुसेना अपने लिए राफेल विमानों को चुनेगी। अमेरिकी रणनीतिकारों का मानना था कि अमेरिका से रिश्ते सुधारने के दबाव में भारत एफ-16 ही खरीदेगा। लेकिन इंडियन एयरफोर्स की एक्सपर्ट टीम ने राफेल की सिफारिश कर दी और लॉकहीड मार्टिन खाली हाथ रह गई। अब जब यह तय हो चुका है कि तमाम विवादों के बावजूद भारत हर हाल में राफेल ही खरीदेगा, तब कंपनी ने हथियार डाल दिए। इसमें बड़ी भूमिका पाकिस्तानी एफ-16 गिराए जाने की भी है। यह भी पढ़ें: क्या राफेल की खरीद में घोटाला हुआ है? जानिए क्या हैं तथ्य

एफ-21 विमान खरीदने में फायदा क्या?

समाचार एजेंसी पीटीआई ने भारत में लॉकहीड मार्टिक के वाइस प्रेसीडेंट के हवाले से कहा है कि “कंपनी एफ-21 लड़ाकू विमानों को भारतीय वायुसेना की जरूरतों के हिसाब डिजाइन करेगी। इससे वो अपनी सभी सीमाओं पर सुरक्षा की मजबूत दीवार खड़ी कर सकेगा। इनके आने के बाद भारत को अपनी सीमाओं पर दूसरे देशों के मुकाबले बढ़त हासिल हो जाएगी।” दरअसल राफेल विमान सबसे ताकवर तो है लेकिन वो अपने जैसे बाकी विमानों के मुकाबले अधिक खर्चीला है। एफ-21 में ईंधन की खपत राफेल के मुकाबले बेहद कम है। राफेल की जरूरत पाकिस्तान से ज्यादा चीन के बॉर्डर पर है। जबकि पाकिस्तान के लिए एफ-21 जैसा कम खर्चीला लेकिन ताकतवर विमान ही काफी है। यह एफ-16 से अधिक एडवांस है और इसके सामने पाकिस्तान कभी अपने एफ-16 विमान भेजने की हिम्मत नहीं करेगा। एफ-21 अपने पिछले वर्जन एफ-16 से 40 फीसदी अधिक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें ले जा सकता है। कंपनी  भारत में टाटा के साथ मिलकर अपना मैनुफैक्चरिंग हब विकसित कर रही है। फिलहाल यह भारत सरकार और वायुसेना को तय करना है कि वो अमेरिकी कंपनी के इस प्रस्ताव पर क्या जवाब देते हैं। इस साल फरवरी में बैंगलोर में हुए एरो शो में लॉकहीड मार्टिन ने अपना एफ-21 विमान भी उड़ाया था।

एफ-21 विमान खरीदने में नुकसान क्या?

कई जानकार मानते हैं कि लॉकहीड मार्टिन के इस ऑफर की शर्तों को पूरे ध्यान से देखा जाना चाहिए। हथियार सौदों के मामले में अमेरिका और रूस जैसे देशों पर आंख मूंद करके भरोसा नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक एफ-16 और एफ-21 की मारक क्षमता में ज्यादा कोई फर्क नहीं है। इस बात की क्या गारंटी होगी कि कल अमेरिका पाकिस्तान को भी यही विमान देने को तैयार हो जाए। अभी अमेरिकी कंपनी की गर्दन फंसी हुई है वो किसी तरह भारत को अपना लड़ाकू विमान बेचकर खुद पर लगा दाग दूर करना चाहती है। आगे क्या होगा ये कौन जानता है।

फिलहाल लॉकहीड मार्टिन ने भारत में प्रोडक्शन का काम शुरू कर रखा है। उसके यूनिट में अभी कलपुर्जे बनाने का काम होता है। पहला मेड इन इंडिया एफ-21 विमान 2020 के बाद किसी समय आने की उम्मीद है। कंपनी ने भारत में अपनी मैनुफैक्चरिंग यूनिट पर ये शॉर्ट फिल्म कुछ दिन पहले जारी की थी।

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