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कांग्रेस की सरकार बनी तो गरीबों को दिए घर वापस लिए जाएंगे!

कांग्रेस पार्टी एक तरफ गरीबों को 72 हजार रुपये हर साल देने का चुनावी वादा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें मिल रही मौजूदा सुविधाओं और स्कीमों का फायदा खत्म किए जाने की खबरें हैं। पिछले कुछ समय से यह बहस चल रही है कि क्या 5 करोड़ परिवारों को 72 हजार रुपये सालाना रकम देना संभव है? इस रकम को जोड़ें तो इसके लिए हर साल 3 लाख 60 हजार करोड़ रुपयों की जरूरत होगी। ये रकम मौजूदा समय में गरीबों और किसानों को दी जाने वाली कुल सब्सिडी को जोड़ दें तो उससे भी अधिक होगी। ऐसे में किसी भी सरकार के लिए इस स्कीम को लागू करना संभव नहीं होगा। तो फिर सवाल कि आखिर कांग्रेस पार्टी इतने विश्वास के साथ यह दावा कैसे कर रही है? हमने इस बारे में कांग्रेस पार्टी के कुछ महत्वपूर्ण नेताओं से बात की। इसमें बेहद चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। जो सबसे अहम बात है वो ये कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो गरीबों को अभी दी गई सारी सुविधाओं और स्कीमों को वापस ले लिया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दिए गए घर और उज्जवला योजना के तहत दिए गए गैस चूल्हे और सिलेंडर शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक इसके अलावा मुफ्त बिजली कनेक्शन और आयुष्मान भारत जैसी दूसरी सहूलियतों को भी जोड़ा जाएगा और उस पर अब तक हुए खर्च को वसूला जाएगा। ये सब उन नियम और शर्तों की तरह होंगे जो आम तौर पर ग्राहकों को बाद में पता चलते हैं।

मकान और गैस छीनने की तैयारी

गरीबों को मुफ्त मकान और गैस सिलेंडर देना पीएम मोदी की सरकार की सबसे बड़ी योजनाओं में से रहा है। कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि इन स्कीमों के लिए प्रति परिवार जो खर्च हुआ है उसे भी कांग्रेस की न्याय योजना में जोड़ा जाएगा। जैसे कि अगर किसी गरीब परिवार को 2 लाख रुपये का मकान मिला तो उसकी ये रकम ‘न्याय योजना’ के तहत एडजस्ट की जाएगी। यानी ऐसे लोगों को न्याय योजना का लाभार्थी माना जाएगा और मकान के रकम की पूरी भरपाई उन्हें करनी होगी। अगर वो ऐसा करने से मना करते हैं तो कांग्रेस सरकार उनके बने-बनाए मकानों को जब्त कर सकती है। कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि इसके लिए मौजूदा सभी स्कीमों से जुड़े नियमों में बदलाव किए जाएंगे। इसी तरह से उज्जवला योजना में गैस सिलेंडर देने पर हुए मौजूदा खर्च की भी गरीब परिवारों से भरपाई करवाई जाएगी। जो फायदा उन्हें इस स्कीम में मिला है वो ‘न्याय योजना’ में कट जाएगा। गरीब परिवार चाहें तो ‘न्याय योजना’ को अलग से चुन सकते हैं, लेकिन उन्हें इसके लिए गैस चूल्हा और सिलेंडर वापस करना होगा। होमलोन पर मिलने वाली सब्सिडी की रकम की वसूली पर भी विचार किया जा रहा है। ठीक इसी तरीके से गरीब परिवारों को दिए गए मुफ्त बिजली कनेक्शन की फीस भी वसूली जाएगी।

आयुष्मान भारत योजना बंद होगी

गरीबों को 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की मोदी सरकार की स्कीम आयुष्मान भारत योजना भी खतरे में है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का कहना है कि केंद्र में उनकी सरकार बनते ही इस स्कीम को बंद कर दिया जाएगा। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस की सरकारों के आने के बाद ये स्कीमें एक तरह से बंद की जा चुकी हैं। इस स्कीम के प्रीमियम के तौर पर सरकार मोटी रकम देती है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि चूंकि सरकारी अस्पतालों में पहले से ही मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध है इसलिए गरीबों को आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं की कोई जरूरत नहीं है। ईसाई मिशनरियां पहले से ही आयुष्मान भारत योजना से नाखुश हैं, क्योंकि इसके कारण गरीब आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले आसपास के शहरों में जाकर बड़े प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवा लेते हैं। अब तक उनके पास ईसाई मिशनरियों के अस्पतालों का ही सहारा था। ऐसे में आयुष्मान योजना के कारण ईसाई धर्मांतरण को भारी झटका लगा था। यह भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ में चर्च के कहने पर बंद हुई आयुष्मान भारत योजना

पिछले दिनों जीएसटी लागू होने से कई सामान पर टैक्स में भारी कमी आई है। हालांकि इस व्यवस्था से शुरू में लोगों को थोड़ी दिक्कत थी, लेकिन अब सभी लोग इसे उपयोगी मान रहे हैं। जीएसटी के कारण ही आज महंगाई दर पूरी तरह से काबू में है। कांग्रेस पार्टी ने जीएसटी का सिर्फ एक स्लैब लागू करने की बात कही है। अगर ऐसा कर दिया गया तो कई जरूरी और खाने-पीने की चीजों पर टैक्स बढ़ जाएगा और कार जैसे लग्जरी सामान पर टैक्स कम हो जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो बोझ गरीब और मध्य वर्ग के लोगों को भुगतना पड़ सकता है। लोकसभा चुनाव में अपनी जीत के लिए आश्वस्त कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकार इन योजनाओं पर काम शुरू भी कर चुके हैं। ये पूरा खाका रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे रघुराम राजन की मदद से तैयार किया गया है। गरीबों के मकान, गैस और बिजली वापस लेने के पीछे मंशा यही है कि न्याय योजना के लिए जरूरी फंड जुटाया जाए और इसे लागू किया जाए। क्योंकि अगर इसके लिए सरकार कंपनियों और इनकम टैक्स दरों में कोई बढ़ोतरी करेगी तो इससे लोगों में गुस्सा भड़क सकता है। लिहाजा कोशिश इस बात की है कि योजना का बोझ उन्हीं लोगों पर डाला जाए जिन्हें इससे फायदा मिलना है।

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