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राहुल गांधी जी प्रियंका चतुर्वेदी के साथ कब ‘न्याय’ होगा?

कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी को लेकर सोशल मीडिया पर खबरों का बाजार गर्म है। यह जानकारी सामने आ रही है कि प्रियंका चतुर्वेदी ने मुंबई उत्तरी सीट से कांग्रेस का टिकट मांगा था, लेकिन उन पर विचार करने के बजाय उर्मिला मांतोडकर को टिकट दे दी गई। प्रियंका चतुर्वेदी मुंबई की रहने वाली हैं और वो कांग्रेस की उन कुछ प्रवक्ताओं में से हैं जिनके मृदुभाषी स्वभाव की विरोधी भी तारीफ करते हैं। प्रियंका चतुर्वेदी मुंबई में सामाजिक तौर पर लंबे समय तक सक्रिय रही हैं और उनकी लोकप्रियता भी बहुत है। लेकिन उनका नाम हटाकर अभिनेत्री उर्मिला मांतोडकर को टिकट देने से स्थानीय कार्यकर्ता भड़के हुए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कह रहे हैं कि उनकी सरकार बनी तो लोगों को ‘न्याय’ मिलेगा। लेकिन वो अपनी ही पार्टी की प्रतिभावान महिला नेता से अन्याय कर रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी नाराजगी जताई है। ऐसी भी खबरें हैं कि नाराज प्रियंका चतुर्वेदी सही समय के इंतजार में हैं और वो पार्टी को छोड़ सकते हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी की अनदेखी क्यों?

कुछ समय पहले तक प्रियंका चतुर्वेदी कांग्रेस की सबसे अग्रणी प्रवक्ताओं में से थीं, लेकिन बीते कुछ महीनों से उन्हें लगातार साइडलाइन किया जा रहा है। अपनी हाजिरजवाबी के कारण वो टेलीविजन पर होने वाली बहसों का एक जाना-माना चेहरा रही हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से कांग्रेस हाईकमान के इशारे पर उन्हें चैनलों में कम भेजा जा रहा है। एक सामान्य उच्च मध्यवर्गीय परिवार से आने वाली प्रियंका कांग्रेस के उन गिने-चुने नेताओं में से हैं जो किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और लगन से आगे आई हैं। प्रियंका चतुर्वेदी की अनदेखी की दूसरी बड़ी वजह उनका उत्तर भारतीय और वो भी ब्राह्मण होना है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार जिस तरह से जनार्दन द्विवेदी, सत्यव्रत चतुर्वेदी और सुरेंद्र मोहन जैसे ब्राह्मण नेताओं को किनारे लगा दिया गया, लगता है प्रियंका चतुर्वेदी का भी कुछ वैसा ही हश्र होने वाला है। कहा जा रहा है कि बीजेपी के संबित पात्रा और कांग्रेस की प्रियंका चतुर्वेदी ने लगभग एक ही समय में अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था, दोनों अपनी पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता बने। संबित पात्रा को बीजेपी ने ओडिशा से टिकट दे दिया, लेकिन प्रियंका चतुर्वेदी को कांग्रेस में किनारे लगा दिया गया।

प्रियंका की वफादारी पर है शक!

प्रियंका चतुर्वेदी पार्टी में अनदेखी के बावजूद अपना काम बहुत ईमानदारी से करती हैं। वो सरकार और बीजेपी पर तीखे हमलों के लिए जानी जाती हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो प्रियंका चतुर्वेदी पर कांग्रेस हाईकमान बहुत भरोसा नहीं करता है। उन्हें लगता है कि वो कभी भी मौका मिलते बीजेपी में जा सकती हैं। मुंबई उत्तरी सीट से टिकट न मिलने के पीछे ये एक बड़ा कारण है। इन हालात के कारण प्रियंका चतुर्वेदी के कई समर्थक पार्टी से खुश नहीं हैं। उनकी नाराजगी मुंबई कांग्रेस के नेता संजय निरुपम और अध्यक्ष राहुल गांधी से है। इसके अलावा कांग्रेस आईटी सेल की प्रमुख दिव्यास्पंदना उर्फ रम्या से भी प्रियंका चतुर्वेदी के मनमुटाव की खबरें उड़ती रही हैं। बताया जाता है कि कांग्रेस आईटी सेल की जिम्मेदारी पहले प्रियंका चतुर्वेदी को ही मिलने की बात थी, लेकिन ऐन मौके पर दिव्यास्पंदना बाजी मार ले गईं। दिव्यास्पंदना यूं तो साउथ की फिल्मों की जानीमानी हीरोइन हैं लेकिन उनकी पहचान मिलिंद देवड़ा की पत्नी के तौर पर भी है। इसी का फायदा उन्हें मिला और पार्टी के लिए पहले कोई काम न किए होने के बावजूद उन्हें आईटी सेल का प्रमुख बना दिया गया और प्रियंका चतुर्वेदी हाथ मलती रह गईं।

कौन हैं प्रियंका चतुर्वेदी?

19 नवंबर 1979 को प्रियंका का मुंबई में जन्म हुआ था। स्कूली से लेकर उच्च शिक्षा तक उन्होंने मुंबई में ही पूरी की। मुंबई के मशहूर नर्सी मोंजी कॉलेज से उन्होंने बीकॉम की पढ़ाई की। उनकी पहचान एक अच्छी लेखिका के तौर पर भी है। वो अपना एक अलग ब्लॉग चलाती हैं। प्रियंका काफी समय तक एनजीओ में भी सक्रिय रही हैं और वहीं से उनकी लोकप्रियता बढ़ती गई। प्रियंका चतुर्वेदी की एक बेटी और एक बेटा है। उनके पति सॉफ्टवेयर कंपनी IBM में नौकरी करते हैं। इसके अलावा प्रियंका चतुर्वेदी के माता-पिता मुंबई में ही रहते हैं। उनके पिता का नाम चंद्रकांत चतुर्वेदी है।

फिलहाल अपने साथ हुए अन्याय पर प्रियंका चतुर्वेदी ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। माना जाता है कि वो अगले राजनीतिक कदम के लिए सही समय के इंतजार में हैं। दूसरी तरफ ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर लोग #IStandWithPriyankaChaturvedi को ट्रेंड करा रहे हैं।

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