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जब हिंदू बनने के चक्कर में रंगे हाथ पकड़ी गईं प्रियंका वाड्रा

चुनावी सीज़न में गांधी परिवार खुद को हिंदू साबित करने की भरपूर कोशिश कर रहा है। इस चक्कर में उन्हें मंदिर-मंदिर चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। लेकिन असलियत फिर भी सामने आ ही गई। दरअसल चैत्र नवरात्र के पहले दिन खुद को कश्मीरी पंडित दिखाने की कोशिश में प्रियंका ने पारसी धर्म के त्यौहार की बधाई दे डाली। सोशल मीडिया पर जब लोगों ने उनकी इस गलती की तरफ ध्यान दिलाने की कोशिश की तब भी उन्होंने भूल-सुधार नहीं किया। खुद को हिंदू दिखाने के लिए उन्होंने जो फर्जी कहानी रची उसकी सच्चाई भी सामने आ गई। पूर्वी यूपी में कांग्रेस की महासचिव बनाई गई प्रियंका वाड्रा ईसाई होने के बावजूद सॉफ्ट हिंदुत्व के नाम पर हिंदुओं को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन गच्चा खा गईं। फिलहाल प्रियंका वाड्रा की इस गलती पर सोशल मीडिया पर उनका जमकर मज़ाक उड़ रहा है। इतनी बड़ी चूक के बावजूद उनकी तरफ से या कांग्रेस पार्टी की तरफ से कोई सफाई वगैरह सामने नहीं आई है।

हिंदू बनने के लिए गढ़ी झूठी कहानी

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने शनिवार को कश्मीरियों को नवरेह की जगह नवरोज की शुभकामनाएं दे दीं। इसके बाद लोगों ने उन्हें याद दिलाया कि आज नवरोज नहीं नवरेह है। प्रियंका के इस ट्वीट पर पाकिस्तानी मूल के लेखक तारीक फतेह ने ट्वीट किया कि डियर प्रियंका नवरोज पिछले महीने था। आज नवरेह का त्योहार है। ये कश्मीरी हिंदुओं का त्यौहार होता है। प्रियंका ने ट्विटर पर लिखा था कि “मेरे सभी कश्मीरी भाइयों और बहनों को नवरोज की शुभकामनाएं। मेरी मां (सोनिया गांधी) ने कहा था कि “थाली बनान मत भूलना”, इसके बावजूद मुझे थाली बनाने का समय नहीं मिला, लेकिन रोड शो के बाद जब मैं घर पहुंची, तो मुझे डाइनिंग टेबल पर सजी हुई थाली मिली। मां कितनी प्यारी होती है?” आप समझ सकते हैं कि जिसे त्यौहार का सही नाम तक नहीं पता है वो कश्मीरी होने का दावा कर रहा है। इससे पहले प्रियंका वाड्रा को कभी नवरेह मनाते नहीं देखा गया है। यह पहली बार था जब इसका प्रचार किया गया, लेकिन अनाड़ीपन के कारण झूठ खुल गया।

कश्मीरी मनाते हैं नवरेह का त्यौहार

चैत्र नवरात्र के पहले दिन को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नाम के साथ मनाया जाता है। उत्तर भारत में नवरात्र, महाराष्ट्र में गुड़ी पाड़वा और दक्षिण भारत में इसे उगादी के रूप में मनाया जाता है। ये हिंदू कैलेंडर का पहला दिन भी होता है। कश्मीर में इसी का नाम नवरेह होता है। इसे कश्मीरी पंडित हर साल बेहद धूमधाम से मनाते हैं क्योंकि ये सर्दी जाने के बाद मनाया जाता है और इस समय कश्मीर घाटी में मौसम बेहद सुहाना होता है। प्रियंका पिछले कुछ समय से लगातार कोशिश में हैं कि वो किसी तरह खुद को हिंदू साबित कर दें। हाल ही में यूपी दौरे में वो पहली बार हिंदू मंदिरों में भी गईं। यहां तक कि काशी विश्वनाथ मंदिर में भी गईं, जहां पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। प्रियंका वाड्रा के दादा फिरोज गांडी पारसी थे। उनकी मां सोनिया और पति रॉबर्ट वाड्रा ईसाई हैं। ऐसे में प्रियंका खुद को हिंदू और वो भी कश्मीरी पंडित किस आधार पर कह रही हैं?

प्रियंका वाड्रा का खुद को कश्मीरी पंडित जताना बेहद हास्यास्पद भी है क्योंकि उन्हीं की पार्टी की गलत नीतियों के कारण लाखों कश्मीरी पंडितों को अपना घर-बार छोड़कर देश के दूसरे हिस्सों में रहना पड़ रहा है। कांग्रेस पार्टी ने हाल ही में जो चुनावी घोषणापत्र जारी किया है उसमें भी कश्मीरी पंडितों को कोई जगह नहीं दी गई है, जबकि उन पर अत्याचार करने वाले कश्मीरी मुसलमानों के भले के लिए ढेरों वादे किए गए हैं।

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