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औरंगजेब की तरह हिंदुओं पर ‘जजिया’ लगाएंगे अखिलेश यादव

मुगल बादशाह औरंगजेब हिंदुओं पर जजिया टैक्स लगाने के लिए जाना जाता है। उसके मरने के करीब साढ़े तीन सौ साल बाद देश में एक बार फिर से हिंदुओं से जजिया वसूलने के मंसूबे जन्म ले रहे हैं। औरंगजेब के बाद ये इरादा किया है समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने। 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी का घोषणापत्र जारी किया है। इसमें कहा गया है कि समाजवादी पार्टी सत्ता में आई तो अगड़ी जातियों के अमीर लोगों पर टैक्स लगाया जाएगा। पार्टी ने इसे ‘सामाजिक न्याय से महापरिवर्तन’ नाम दिया है। लखनऊ में घोषणापत्र को जारी करते समय (5 अप्रैल) खुद अखिलेश यादव मौजूद थे। यह महज इत्तेफाक नहीं है कि 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश यादव जब अपने ही पिता मुलायम सिंह यादव को समाजवादी पार्टी के नेता पद से बेदखल कर रहे थे तब उनकी तुलना भी औरंगजेब से की गई थी।

औरंगजेब की नीतियों पर होगा अमल!

समाजवादी पार्टी के घोषणापत्र में कहा गया है कि अगर वो केंद्र की सत्ता में आए तो अगड़ी जाति के अमीर लोगों पर 2 फीसदी की दर से टैक्स लगाया जाएगा। ये टैक्स उनकी कुल कमाई पर लगेगा। ऐसे लोग जिनकी संपत्ति ढाई करोड़ रुपये से अधिक है वो इस टैक्स के दायरे में आएंगे। अखिलेश यादव ने जजिया की तर्ज पर सुझाए जा रहे इस टैक्स को सही ठहराया और कहा कि आबादी के 10 फीसदी लोगों के पास देश की 60 फीसदी से ज्यादा संपत्ति है। जब ये पूछा गया कि जातीय या धार्मिक आधार पर टैक्स लगाना क्या उचित है? तो इस तथाकथित समाजवादी नेता का जवाब था कि “अमीर लोग हमें सत्ता का भूखा कहकर खारिज करते हैं। ये झूठ इसलिए फैलाया जाता है ताकि उनकी सत्ता बनी रहे और कुछ लोग ही और धनवान होते जाएं।” अखिलेश ने यह भी कहा कि “अब समय आ चुका है कि अमीर अपने धन का कुछ हिस्सा गरीबों के कल्याण के लिए दें।” यह बात ठीक है कि अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगना चाहिए लेकिन अमीरी में जातिगत पैमाने का क्या तर्क है इस पर अखिलेश कोई साफ जवाब नहीं दे सके। जाहिर है उनके दिमाग के किसी कोने में औरंगजेब की नीति जरूर रही होगी।

अखिलेश के परिवार पर नहीं लगेगा टैक्स?

घोषणापत्र में जो एलान किया गया है उसके मुताबिक अगर ऐसा कोई टैक्स कभी लागू हो गया तो खुद अखिलेश यादव के परिवार पर ये लागू नहीं होगा। क्योंकि कानूनी परिभाषा में वो अगड़ी जाति के नहीं हैं। जबकि सच यह है कि अखिलेश यादव का परिवार यूपी के सबसे अमीरों में से एक है। अखिलेश जिस अमीर-गरीब खाई की बात कर रहे हैं उसके तहत अमीरों को पहले से ही ज्यादा टैक्स और सरचार्ज देने होते हैं। अमीरों पर अधिक टैक्स के सिस्टम की शुरुआत मोदी सरकार में ही हुई। वरना पहले ऊपरी टैक्स ब्रैकेट में न्यूनतम वेतन पाने वाले को और मुकेश अंबानी को भी अपनी आमदनी पर बराबर दर से टैक्स देना होता था। अखिलेश यादव का फॉर्मूला है कि अगड़ी जाति के जिन लोगों की संपत्ति ढाई करोड़ से अधिक है उन पर ये अतिरिक्त 2 फीसदी का टैक्स डाला जाएगा। यानी अगर किसी की संपत्ति की कीमत ढाई करोड़ से अधिक हो और उसकी कमाई किसी कारण से कम हो तो वो भी इस टैक्स का देनदार होगा। लेकिन ऐसा कोई टैक्स अखिलेश यादव और मायावती जैसे लोगों पर लागू नहीं होगा जिनके पास अकूत संपत्ति मौजूद है। जाहिर बात है ये हिंदुओं को दो हिस्से में तोड़ने और उनको धर्म के आधार पर सजा देने की औरंगजेबी नीति का ही विस्तार है।

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