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अगस्ता घोटाले में संदिग्ध पत्रकार शेखर गुप्ता की 5 बड़ी करतूत

अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में विवादित पत्रकार शेखर गुप्ता का नाम सामने आने के बाद से पूरे देश से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोग इस बात पर हैरानी जता रहे हैं कि कांग्रेस के लिए बिचौलिए का काम करने वाला एक व्यक्ति कैसे इतने साल तक देश के बड़े समाचार संस्थानों में संपादक के पद पर नौकरी करता रहा? साथ ही यह बात भी उठ रही है कि शेखर गुप्ता ने कैसे पत्रकारिता को ढाल बनाकर कांग्रेस पार्टी के हितों की रक्षा की। इसके बदले में उन्होंने मोटा निजी फायदा भी हासिल किया। शेखर गुप्ता देश में संपादकों की सर्वोच्च संस्था एडिटर्स गिल्ड में भी हैं और यहां पर रहते हुए भी वो कांग्रेस पार्टी के लिए काम करते रहे हैं, जबकि ये वो जिम्मेदारी है जहां पर व्यक्ति का निष्पक्ष होना सबसे जरूरी समझा जाता है। फिलहाल अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग शेखर गुप्ता की पुरानी करतूतों को भी याद करने लगे हैं। लोग उनकी पुरानी रिपोर्टों और बयानों को याद कर रहे हैं जिनसे इशारा मिलता था कि वो पत्रकारिता के बजाय एक पार्टी के भ्रष्टाचार में बराबर के भागीदार हैं।

1. 2006 के मुंबई ब्लास्ट का बचाव किया

मुंबई में 2006 में लोकल ट्रेन में हुए धमाके के बाद शेखर गुप्ता ने ये कहकर पूरे देश को चौंका दिया था कि हमले के निशाने पर सिर्फ गुजराती हिंदू थे। उनका कहना था कि नरेंद्र मोदी जिस तरह से गुजरातियों का समर्थन पा रहे हैं उससे मुसलमानों में चिढ़ है और उन्होंने उसी लोकल ट्रेन को निशाना बनाया जिसमें गुजराती समुदाय के लोग बड़ी संख्या में काम से अपने घरों की तरफ लौट रहे थे। ये वो दौर था जब मुंबई में गुजराती समुदाय पहले से ही निशाने पर था। ऐसे में शेखर गुप्ता ने एक आतंकवादी हमले को ये एंगल ये सोचकर दिया था कि इससे मुंबई में बसे गुजराती समुदाय के लोगों में दहशत फैलेगी और उनको पलायन को मजबूर होना पड़ेगा। गुजराती समुदाय पारंपरिक रूप से कांग्रेस का विरोधी माना जाता रहा है। मुंबई में भी ये लोग बीजेपी या शिवसेना को वोट देते आए हैं। लिहाजा मुंबई का गुजराती समुदाय उनके निशाने पर था। संभवत: वो गुजरातियों को मोदी के समर्थन के बदले में सबक सिखाना चाहते थे।

2. जामा मस्जिद ब्लास्ट में हिंदुओं का नाम

शेखर गुप्ता ने 2010 में दिल्ली की जामा मस्जिद में हुए हमले को ‘हिंदू कट्टरपंथियों’ का काम बताया था। जबकि तब तक यह साबित नहीं हुआ था कि उस हमले के पीछे किसका हाथ है। शेखर गुप्ता ने इस बारे में अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘न्यूज़वीक’ में एक लंबा-चौड़ा लेख भी लिखा था, जिसमें उन्होंने इशारों-इशारों में यह जताने की कोशिश की थी कि भारत में हिंदुओं में बढ़ती कट्टरता के कारण मुसलमान आतंकवाद का रास्ता अपनाने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने इस्लामी आतंकवाद को हिंदू कट्टरता की प्रतिक्रिया बताया और कहा कि हिंदू भी मुसलमानों की मस्जिदों और धार्मिक स्थलों पर आतंकवादी हमले कर रहे हैं। दरअसल यही वो चीज थी जिसे कांग्रेस ने आगे चलकर औपचारिक रूप से ‘हिंदू आतंकवादी संगठनों’ की शक्ल दी। अब जबकि कथित तौर पर हिंदू आतंकवाद के सारे मामले कोर्ट में झूठे साबित हो चुके हैं यह समझना मुश्किल नहीं है कि शेखर गुप्ता जैसा पत्रकार बड़ी सफाई के साथ कांग्रेस की दी हुई स्क्रिप्ट पर काम कर रहा था। जहां तक जामा मस्जिद ब्लास्ट की बात थी ये उसी समय साबित हो गया था कि ये इंडियन मुजाहिदीन का काम था।

3. भारतीय सेना तख्तापलट करने वाली है

यह वो सबसे बड़ी फेक न्यूज़ थी जिसे शेखर गुप्ता ने फैलाया था। ये घटना 2013 की है। यूपीए सरकार भयानक तरीके से घोटालों और घपलों में फंसी हुई थी। तभी इंडियन एक्सप्रेस ने पूरे पहले पन्ने पर खबर छापी कि आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह की एक टुकड़ी दिल्ली की तरफ कूच कर चुकी थी और वो तख्तापलट के इरादे से आगे बढ़ रही थी। जबकि उन्होंने इसका कोई सबूत नहीं दिया। इस तरह की मनगढ़ंत रिपोर्ट के 2 सबसे बड़े मकसद थे। पहला, ये कि इससे दुनिया की नजरों में भारत की छवि पाकिस्तान जैसी बने। जैसे पाकिस्तान में सेना जब चाहती है तख्तापलट कर देती है भारत भी वैसा ही है। ये भारतीय सेना दुनिया की नजरों में गिराने की कोशिश थी। दूसरा, ये कि इससे जनता में कांग्रेस सरकार के लिए सहानुभूति पैदा होती। यह तैयारी थी कि कांग्रेस यह आरोप लगाएगी कि बीजेपी सेना के साथ मिलकर बगावत करवाना चाहती है। इससे लोगों की सहानुभूति कांग्रेस के लिए होती और वो अगला चुनाव जीत जाती। बताते हैं कि ये पूरा प्लान सोनिया गांधी के करीबी अहमद पटेल ने बनाया था और उसे शेखर गुप्ता के जरिए अमल में लाया गया।

4. अगस्ता वेस्टलैंड सौदे में दलाली खाई

शेखर गुप्ता अपनी बेशुमार दौलत और शानो-शौकत के लिए जाने जाते हैं। यह सवाल उठता है कि एक पत्रकार को आखिर कितनी सैलरी मिलती है जो दिल्ली-एनसीआर में उसके पास फार्महाउस भी हो? ईडी ने दिल्ली की अदालत में जो चार्जशीट दाखिल किया है उसमें शेखर गुप्ता को बाकायदा इस मामले में बिचौलिए के लिए काम करने वाला बताया गया है। विस्तार से पढ़ें: अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में बेनकाब हुआ गांधी परिवार और ये तीन पत्रकार

5. सरकार के खिलाफ फेक न्यूज की भरमार

माना जाता है कि अगस्ता वेस्टलैंड की दलाली के पैसे का ही कमाल था कि शेखर गुप्ता ने बेरोजगार होने के बाद बड़े-बड़े रिपोर्टरों को साथ लेकर ‘द प्रिंट’ नाम से एक न्यूज़ पोर्टल शुरू कर दिया। ये पोर्टल दरअसल फेक न्यूज़ की फैक्ट्री है। जब से ये शुरू हुआ इसने कई झूठी खबरें फैलाने की कोशिश की। जैसे कि सरकारी दफ्तरों वाले शास्त्री भवन में सुरक्षा की दृष्टि से जब RFID सिस्टम लागू किया गया तो ‘द प्रिंट’ ने रिपोर्ट छापी कि मोदी सरकार पत्रकारों की जासूसी करवा रही है। जबकि ये सिस्टम तमाम प्राइवेट दफ्तरों में इस्तेमाल होता है और इसका एकमात्र मकसद चाकचौबंद सिक्योरिटी होता है। कुछ दिन पहले ही इन्होंने एक फेक न्यूज छापी कि मोदी सरकार नेगेटिव खबरें छापने मीडिया की मॉनीटरिंग करवा रही है। जबकि वो जिस मॉनीटरिंग यूनिट की बात कर रहे थे वो यूपीए सरकार के समय बनी थी और उसका काम मीडिया की खबरों के हिसाब से सरकार को फीडबैक भेजना है ताकि जनता की भावनाएं सरकार तक पहुंच सकें। इस रिपोर्ट पर तो सूचना प्रसारण मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने भी वीडियो ट्वीट करके शेखर गुप्ता को आइना दिखाया था।

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