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अगस्ता वेस्टलैंड में बेनकाब हुआ गांधी परिवार और ये 3 पत्रकार

सोनिया औऱ राहुल गांधी पहले से ही नेशनल हेराल्ड घोटाले में जमानत पर हैं। अब अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में दोनों का नाम सामने आया है।

अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टरों की खरीद में दलाली के मामले में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। गुरुवार 4 अप्रैल को दाखिल चार्जशीट में ईडी ने तमाम सबूतों और बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल से पूछताछ को आधार बनाया है। इस चार्जशीट ने देश में रक्षा सौदों में दलाली के पूरे तंत्र को बेनकाब कर दिया है। इस मामले में सीधे तौर पर गांधी परिवार का नाम सामने आया है। यह बात भी सामने आई है कि सोनिया के अलावा इटैलियन महिला के बेटे (राहुल गांधी) भी दलाली के इस खेल में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे थे। हालांकि चार्जशीट में सीधे नाम लेने के बजाय उनके कोडवर्ड को ही लिखा गया है और संभवत: यह अदालत के विवेक पर छोड़ा है कि वो यह तय करे कि ये कौन लोग हैं। हालांकि जांच एजेंसी ने यह लिखा है कि बिचौलिए ने यह माना है कि कोडवर्ड ‘AP’ का मतलब अहमद पटेल है। अहमद पटेल सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार हैं। आरोपपत्र के मुताबिक इस केस में 3 पत्रकारों के नाम भई सामने आए हैं, जिन्होंने दलाली ली। इनके नाम हम इसी रिपोर्ट में आगे बताएंगे। सबसे पहले बात गांधी परिवार की। यह भी पढ़ें: अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला, सोनिया ने अपने मायके को भी नहीं बख्शा

गांधी परिवार को मिले कुल 125 करोड़ रुपये

बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के मुताबिक अगस्ता वेस्टलैंड के लिए हुई कैबिनेट बैठक के फैसलों की जानकारी उसे मिला करती थी। उसकी ‘इटैलियन लेडी के बेटे जो भारत का प्रधानमंत्री बनेगा’ के साथ बैठकें भी हुईं और उसने भरोसा दिलाया कि वो अपनी मां से इस बारे में बात करेगा। AP यानी अहमद पटेल के जरिए परिवार ने पूरे 125 करोड़ रुपये लिए। यानी आगे चलकर इस मामले में गांधी परिवा की कोर्ट में पेशी होने की पूरी उम्मीद है। इस सौदे में बिचौलिए ने नेताओं ही नहीं, सरकारी अफसरों, सेना के अधिकारियों और पत्रकारों को भी हिस्सेदार बनाया। इस मामले में गिरफ्तार हो चुके पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी ने कोर्ट में माना कि इस सौदे में वो इकलौते नहीं थे, बल्कि तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दफ्तर की तरफ से सामूहिक फैसला लिया गया था। साल 2016 में इटली की कोर्ट ने घोटाले के आरोप में सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, अहमद पटेल और ऑस्कर फर्नांडिस को दोषी करार दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में सोनिया गांधी को इस घोटाले की ‘मेन ड्राइविंग फोर्स’ यानी मुख्य साजिशकर्ता करार दिया था। यह भी पढ़ें: कौन है क्रिश्चियन मिशेल, क्या है सोनिया गांधी के साथ रिश्ता

इन पत्रकारों ने ली अगस्ता वेस्टलैंड की दलाली

चार्जशीट में कुल तीन पत्रकारों के नाम लिए गए हैं, जबकि कुछ चैनलों, अखबारों और पत्रिकाओं का भी जिक्र है। यह साफ है कि 45 करोड़ रुपये की रकम कई पत्रकारों के बीच बांटी गई। अभी पूछताछ जारी है और ईडी ने कहा है कि कुछ और पत्रकारों के नाम सामने आ सकते हैं। इस बंटवारे की जिम्मेदारी मोटे तौर पर जिन 3 पत्रकारों पर थी उनके नाम चार्जशीट में दिए गए हैं।
1. राजू संथानम: ईडी चार्जशीट के मुताबिक इन्हें सौदे के तहत 2 लाख यूरो से अधिक रकम मिली। इसके लिए उन्होंने अपने बेटे अश्विन संथानम को जरिया बनाया। अगस्ता वेस्टलैंड में दलाली में शुरू से ही वो शामिल रहे थे। आरोपपत्र के मुताबिक उन्हें 2 लाख यूरो से अधिक रकम मिली। अगस्ता वेस्टलैंड बनाने वाली इटली की कंपनी फिनमैकेनिका ने उन्हें पूरे परिवार समेत फॉरेन टूर पर भेजा। इसके लिए टिकट और महंगे होटलों में ठहरने पर मोटी रकम खर्च की गई। राजू संथानम ने 1974 में इंडियन एक्सप्रेस अखबार से करियर शुरू किया था। शुरू से ही वो नेताओं और कारोबारियों के बीच दलाली के लिए जाने जाते थे। उनकी इसी प्रतिभा को देखते हुए ज़ी न्यूज़ ने 1998 में उन्हें अपना संपादक बना दिया। यहां पर बीच में कुछ समय के ब्रेक को छोड़कर करीब 2007 तक रहे। राजू संथानम ने पूछताछ में अपना गुनाह कबूला है। उन्होंने के डगलस नाम के बिचौलिए की सेवाएं लीं ताकि बाकी पत्रकारों को राजी किया जा सके कि वो ऐसी कोई खबर न छापें जिससे अगस्ता वेस्टलैंड सौदे पर किसी को शक हो।

2. मनु पब्बी: ये रक्षा संवाददाता के तौर पर जाने जाते हैं। जब शेखर गुप्ता इंडियन एक्सप्रेस के संपादक थे तब वो वहां पर डिफेंस कॉरस्पॉन्डेंट हुआ करते थे। शेखर गुप्ता के साथ ही उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस छोड़ दिया, फिलहाल शेखर गुप्ता के साथ वो उनके न्यूज़ पोर्टल ‘द प्रिंट’ में है। मजेदार बात यह है कि इन्हें इस बात का क्रेडिट दिया जाता रहा है कि अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले का भंडाफोड़ इन्होंने ही किया था। लेकिन ईडी की चार्जशीट में क्रिश्चियन मिशेल के हवाले से जो जानकारी दी गई है वो बेहद दिलचस्प है। इसके मुताबिक इंडियन एक्सप्रेस में रहते हुए मनु पब्बी ने वो रिपोर्ट अपने संपादक शेखर गुप्ता की रजामंदी से छापी थी, ताकि वो घोटाले की खबर देकर ब्लैकमेल कर सकें और मुंह बंद रखने के एवज में उन्हें ज्यादा रकम दी जाए।

3. शेखर गुप्ता: इनकी गिनती देश के देश के सबसे बड़ी पत्रकारों में होती रही है। लेकिन 2013 में इन्होंने अपने तब के अखबार इंडियन एक्सप्रेस में एक रिपोर्ट छापी थी जिसके मुताबिक तब के सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने मनमोहन सिंह सरकार के तख्तापलट की तैयारी की थी। बाद में ये रिपोर्ट सरासर गलत निकली और यह बात भी सामने आ गई कि कांग्रेस ने ये रिपोर्ट इसलिए छपवाई थी ताकि सेना को बदनाम किया जा सके और कांग्रेस के लिए सहानुभूति लहर पैदा की जा सके। अगस्ता वेस्टलैंड में शेखर गुप्ता की गतिविधियां शुरू से ही संदिग्ध रहीं। उन्हें सौदे में दलाली की पूरी जानकारी थी और इस बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित करवाकर उन्होंने कंपनी पर दबाव बनाया कि वो उन्हें पूरी कीमत दे। जब कीमत मिल गई तो उन्होंने इस सौदे में भ्रष्टाचार की खबरों को दबाना शुरू कर दिया। हमें ध्यान रखना होगा कि जज लोया से लेकर सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस तक में शेखर गुप्ता पीछे से सक्रिय रहे हैं। बीते कुछ साल में मोदी सरकार के खिलाफ जितनी झूठी खबरें इन्होंने उड़ाई हैं उतनी शायद ही किसी और पत्रकार ने उड़ाई हों। वो ‘एडिटर्स गिल्ड’ नाम की संस्था के चेयरमैन भी हैं, जो कांग्रेस के हितों की रक्षा करने के लिए जानी जाती है। शेखर गुप्ता ने अपनी दलाली के बदले में अच्छी कीमत भी वसूली है। आज वो ‘द प्रिंट’ नाम की एक वेबसाइट चलाते हैं। दिल्ली और आसपास में उनके कई फार्महाउस भी बताए जाते हैं।

‘इंडिया टुडे’ की भूमिका भी शक के दायरे में

चार्जशीट के मुताबिक “जब यह बात सामने आ गई कि अगस्ता वेस्टलैंड डील में किसी ने दलाली खाई है तो अब सारा फोकस था कि किसी तरह से आरोपों का रुख गलत दिशा में मोड़ा जाए।” इसके लिए इंडिया टुडे ग्रुप की मदद ली गई। 2016 में इंडिया टुडे समूह ने अपने पत्रकार संजय बरागटा को यूरोप भेजकर बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल का इंटरव्यू करवाया। इसमें बिचौलिए ने कहा कि वो सोनिया गांधी या गांधी परिवार के किसी करीबी को नहीं जानता न ही उनके साथ उसकी कोई मीटिंग हुई है। चार्जशीट में इंडिया टुडे या संजय बरागटा का नाम नहीं है। चार्जशीट के मुताबिक शेखर गुप्ता और एक अन्य बिचौलिए के कहने पर घोटाले को ‘टोन डाउन’ किया गया। जबकि ईडी से पूछताछ में क्रिश्चियन मिशेल ने माना है कि वो 1986 से ही सोनिया गांधी को निजी तौर पर जानता है। जहां तक इंडिया टुडे की भूमिका का सवाल है इस बात की कोई पक्की जानकारी नहीं है कि उसने अगस्ता वेस्टलैंड से जुड़ी खबरों को लेकर कोई कमाई की।

क्या है अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला?

मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल में इटली की कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से 12 हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए 36 अरब रुपये का समझौता हुआ था। ये हेलीकॉप्टर देश के सबसे बड़े नेताओं जैसे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के लिए खरीदे जा रहे थे। लेकिन हेलीकॉप्टर की खरीद में नियमों में कुछ बड़े बदलाव किए गए और इसके बदले कांग्रेस पार्टी के नेताओं को मोटी रिश्वत दी गई। इस दौरान इटली में रिश्वत दिए जाने का खुलासा हो गया। वहां चली अदालती कार्रवाई के बाद कंपनी के दो बड़े अफसरों को घूस देने का दोषी पाया गया और उन्हें साढ़े चार और चार साल जेल की सजा सुनाई गई। इटली की अदालत ने सोनिया गांधी समेत बाकी आरोपियों को यह कहते हुए कोई सजा नहीं दी कि वो सभी दूसरे देश में रह रहे हैं, लिहाजा उन्हें सजा देने की जिम्मेदारी वहां की अदालतों की है। इटली की अदालती कार्रवाई में सोनिया गांधी का नाम ‘सिग्नोरा गांधी’ यानी मिसेज गांधी के तौर पर दर्ज है। जांच में पाया गया कि सोनिया गांधी ने अपने करीबी अहमद पटेल के जरिए 125 करोड़ रुपये कमीशन लिया। कुल 225 करोड़ की डील हुई थी, जिसमें से बाकी रकम एयरफोर्स के अफसरों और मीडिया में बांटा गया, ताकि वो अपने मुंह बंद रखें।

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