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माफिया की बेटी और न्यूज़ एंकर के बीच फंसी यूपी कांग्रेस

बायीं तस्वीर तनुश्री त्रिपाठी की है, जबकि दायीं तरफ सुप्रिया श्रीनेत हैं।

प्रियंका गांधी वाड्रा की अगुवाई में कांग्रेस पार्टी का यूपी में चुनावी अभियान कैसा चल रहा है इसकी एक मिसाल सामने आई है। मामला है गोरखपुर के पास महाराजगंज सीट का। इस सीट पर जो कुछ हुआ वो प्रियंका गांधी वाड्रा की राजनीतिक अकुशलता का नमूना है। महाराजगंज लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने तनुश्री त्रिपाठी को अपना उम्मीदवार बनाया। तनुश्री यहां के माफिया सरगना अमरमणि त्रिपाठी की बेटी हैं। मजेदार बात यह रही कि तनुश्री को उससे पहले शिवपाल यादव की पार्टी भी टिकट दे चुकी थी और उन्होंने प्रचार भी शुरू कर दिया था। यानी कांग्रेस नेतृत्व को इतना तक पता नहीं था कि वो जिसे टिकट दे रहे हैं वो पहले से किसी और पार्टी का उम्मीदवार है और प्रचार भी कर रहा है। जब लिस्ट का एलान हुआ तो तनुश्री त्रिपाठी के नाम पर हंगामा मच गया। कांग्रेस हाईकमान ने गुरुवार शाम को तनुश्री के नाम का एलान किया था और शुक्रवार दोपहर में नाम बदलकर उनकी जगह सुप्रिया श्रीनेत को उम्मीदवार घोषित कर दिया। सुप्रिया श्रीनेत को यह कहकर लाया गया कि वो पूर्व कांग्रेस सांसद की बेटी हैं और पिता की विरासत को संभालेंगी, लेकिन उनकी कहानी भी हम आपको इसी रिपोर्ट में आगे बताएंगे। यह भी पढ़ें: जानिए चुनाव में कौन मीडिया समूह किस पार्टी के साथ खड़ा है

प्रियंका वाड्रा का ‘माफिया प्रेम’

पूर्वी यूपी में कांग्रेस की प्रभारी बनीं प्रियंका वाड्रा कहती हैं कि वो राजनीति को नई दिशा देने आई हैं लेकिन खुद प्रियंका जिस तरह के उम्मीदवारों का चयन कर रही हैं देखने लायक है। तनुश्री त्रिपाठी के बारे में हर किसी को पता है कि वो जेल में बंद समाजवादी पार्टी नेता अमरमणि त्रिपाठी की बेटी और निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी की बहन हैं। तनुश्री त्रिपाठी को कांग्रेस का टिकट मिलने से पहले शिवपाल यादव की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया ने भी महाराजगंज से ही टिकट दिया था। वो अपना चुनाव प्रचार शुरू भी कर चुकी थीं, लेकिन तब तक उनका नाम कांग्रेस की लिस्ट में आ गया। सवाल यह कि क्या प्रियंका ने उम्मीदवारों के नाम के एलान से पहले यह जांच भी नहीं की कि उम्मीदवार किसी और पार्टी में तो नहीं है। तनुश्री त्रिपाठी के पिता अमरमणि यूपी के सबसे बदनाम राजनेताओं में से एक रहे हैं। 2003 में हुए कवियत्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में तनुश्री के पिता और मां दोनों को उम्रकैद मिली हुई है। सजा सुनाए जाने के बाद से अबतक वो जेल में हैं। यूपी में पिछली अखिलेश यादव सरकार के दौरान जेल में भी अमरमणि त्रिपाठी का दरबार लगाए जाने की खबरें आई थीं। तनुश्री की पढ़ाई नैनीताल के सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल से हुई। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए लंदन चली गईं। पढ़ाई के बाद उन्होंने यूके में ही एक कंपनी में नौकरी की, लेकिन 2014 में भारत लौट आईं। इतनी खराब पृष्ठभूमि के बावजूद वो बहुत जल्द प्रियंका वाड्रा की गुडलिस्ट में आ गईं। जबकि तनुश्री का निर्दलीय विधायक भाई अमनमणि यूपी की योगी सरकार से करीबी बनाने की लाख कोशिश के बावजूद अब तक सफल नहीं हो सका है। प्रियंका के माफिया प्रेम का एक और नमूना रायबरेली के आपराधिक नेता अखिलेश सिंह की बेटी अदिति सिंह हैं, जिन्हें प्रियंका का करीबी माना जाता है। यह भी पढ़ें: मैं भी चौकीदार हूं नारे से कांग्रेस के लाखों रुपये चौपट हुए

क्या है सुप्रिया श्रीनेत का बैकग्राउंड

सुप्रिया श्रीनेत कांग्रेस का टिकट मिलने तक अंग्रेजी बिजनेस चैनल ईटी नाऊ की पत्रकार थीं। उनका जन्म फरवरी 1977 में हुआ। स्कूली शिक्षा लॉरेटो कॉन्वेंट लखनऊ से हुई। आगे की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूरी की। इनके पति धीरेंद्र सिंह एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं। लेकिन सुप्रिया की असली पहचान ये है कि वो पूर्व सांसद हर्षवर्धन सिंह की बेटी हैं। हर्षवर्धन यूपी की फरेंदा विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक और महाराजगंज से जनता दल के टिकट पर सांसद रहे हैं। बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। सुप्रिया श्रीनेत कह रही हैं कि वो पिता की विरासत को जिंदा रखना चाहती हैं, जबकि हर्षवर्धन सिंह की पहचान एक दलबदलू नेता की रही है। उन्हें एक दलित सरकारी कर्मचारी पर हमले के मामले में एक साल सश्रम कारावास की सजा भी हो चुकी है। ऐसे में सवाल यह है कि बेटी क्या पिता की इसी दलितविरोधी विरासत को जिंदा रखने की बात कह रही हैं? उससे बड़ा सवाल भी कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व पर है जो ऐसे दागी बैकग्राउंड वालों को टिकट दे रही है। जाहिर बात है कि यूपी में कांग्रेस के पास कार्यकर्ता और नेता नहीं हैं ऐसे में उन्हें नेताओं के बेटे-बेटियों को टिकट देकर उतारना पड़ रहा है। यह भी पढ़ें: चीन के दबाव में कांग्रेस ने नहीं खरीदा था राफेल विमान, बड़ा खुलासा

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