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राहुल गांधी के कहने पर छत्तीसगढ़ में अडानी को मिली कोयला खदान!

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने कोरबा ज़िले में 2 बड़ी कोयला खदानें गौतम अडानी की कंपनी को सौंप दी हैं। अडानी की कंपनी इन खदानों में एमडीओ यानी माइन डेवलपर कम ऑपरेटर के तौर पर कोयला निकालने का काम करेगी। ये एक तरह का सब-लीज़ होता है। कांग्रेस जब विपक्ष में थी तो वो इसे भ्रष्टाचार बताती थी। मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तब इसके खिलाफ ट्वीट भी किए थे। चुनाव से पहले खुद राहुल गांधी ने कोयला खदन के इलाकों में जाकर लोगों के बीच कहा था कि उनकी सरकार आदिवासियों की जमीन उद्योगपतियों के हाथों में नहीं जाने देगी। ये दोनों खदानें गिधमुड़ी और पतुरिया नाम से जानी जाती हैं। इस प्रोजेक्ट से करीब पौने दो लाख हेक्टेयर जमीन पर फैले घने जंगल खत्म हो जाएंगे, जबकि बड़ी तादाद में आदिवासी विस्थापित होंगे और उनकी जमीनें छिनेंगी। जो कांग्रेस इसे भ्रष्टाचार बता रही थी उसी का अब कहना है कि अडानी इस काम के लिए सबसे योग्य कंपनी है। छत्तीसगढ़ सरकार से जुड़े एक सीनियर मंत्री ने न्यूज़लूज़ से अनौपचारिक बातचीत में बताया कि इस डील के लिए दबाव हाईकमान से आया था। जाहिर है उनका इशारा राहुल गांधी की तरफ था। समझा जा सकता है कि इस पूरे सौदे में कुछ न कुछ डील जरूर हुई होगी, जो जांच के बाद ही पता चल सकती है।

अंबानी-अडानी का विरोध दिखावा है!

सूत्रों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार आने के बाद से ही अडानी समूह सक्रिय हो गया था। लेकिन खदान से जुड़ी सारी बातचीत दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ हो रही थी। इनका दावा है कि “छत्तीसगढ़ सरकार से इस मामले में फिलहाल कोई फैसला न करने को कह दिया गया था।” राहुल गांधी इस इलाके में आदिवासियों के अधिकार के मुद्दे में निजी तौर पर रुचि लेते रहे हैं। ये परिस्थितियां इशारा कर रही हैं कि राहुल गांधी या उनकी तरफ से नियुक्त किया गया कोई सीनियर कांग्रेसी नेता ही इस मामले में अडानी के साथ सौदेबाजी कर रहा था। राज्य कांग्रेस पार्टी के नेता अब दलील दे रहे हैं कि “ये खदानें पिछली सरकार की तरफ से जारी टेंडरों पर दिए गए हैं। कांग्रेस पार्टी एमडीओ के खिलाफ रही है और आगे भी रहेगी।” लेकिन सरकारी कामकाज से जुड़े अधिकारी इस सफाई को गलत बताते हैं। उनका कहना है कि एमडीओ तैयार करने का काम भूपेश बघेल सरकार बनने के बाद किया गया है। जाहिर है छत्तीसगढ़ सरकार के पास कोई जवाब नहीं है और वो बहानेबाजी से काम चला रहे हैं। उधर, स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि नीलामी के बजाय एमडीओ से करीब 5300 मिलियन टन कोल रिज़र्व वाली 14 कोयला खदानों को निजी कंपनियों के हाथों में दिए जाने की जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस का ‘कोयला घोटाला पार्ट-2’

स्थानीय लोग इसे कांग्रेस का कोयला घोटाला पार्ट-2 का नाम दे रहे हैं। मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार के समय कोयला खदानों के आवंटन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी डालने वाले वकील सुदीप श्रीवास्तव ने सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एमडीओ सिस्टम को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना के विपरीत बताया है और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है। माना जाता है कि अगर इस इलाके में कोयला खनन का काम शुरू किया गया तो इससे पर्यावरण को भारी नुकसान होगा। हसदेव नदी और मिनीमाता बांगो का इलाका तहस-नहस हो जाएगा। इससे आसपास के इलाकों में पानी का संकट पैदा हो सकता है। अडानी समूह के जवाब के अनुसार उसने कोयला मंत्रालय के नियमों के मुताबिक स्ट्रिपिंग रेशियो और भूवैज्ञानिक परिस्थितियों को देखते हुए किसी एक खदान की लागत की तुलना दूसरी से करना सही नहीं है। फिलहाल कोयला खदान और एमडीओ का ये विवाद कोरबा और सरगुजा ज़िले में चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है। कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर बचाव की मुद्रा में है।

कांग्रेस सरकार के ‘झूठ’ से नाराजगी

दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार के ताजा रवैये से आदिवासी और स्थानीय समुदाय में भारी गुस्सा है। यह स्थिति 2014 से पहले की है जब मनमोहन सिंह सरकार के वक्त कोयला घोटाले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कुल 214 खदानों का आवंटन रद्द कर दिया था। उसके बाद मोदी सरकार ने आने के बाद इन सभी खदानों की समीक्षा की और ज्यादातर कोयला खदानें सार्वजनिक क्षेत्र की यानी सरकारी कंपनियों को ही आवंटित की गईं। लेकिन कुछ सरकारी कंपनियों ने कोयला खनन में अपना अनुभव न होने का बहाना बनाकर निजी कंपनियों को सबलीज़ देना शुरू कर दिया। पहले इसकी कोशिश रमन सिंह सरकार ने शुरू की। अब कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद इस पर औपचारिक मुहर लगा दी। यानी खदान का आवंटन तो सरकारी कंपनी को हुआ लेकिन वास्तव में उस पर पूरा कंट्रोल एक प्राइवेट कंपनी का होगा। इसी सिस्टम को एमडीओ कहते हैं। छत्तीसगढ़ में एमडीओ के तहत अडानी समूह पहले से ही चार खदानों में काम कर रहा है। अडानी को खदान देने के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल विपक्ष में रहते हुए कई ट्वीट कर चुके हैं, लेकिन अब उन्होंने इस मामले पर चुप्पी साध ली है।

(सिद्धार्थ शर्मा की रिपोर्ट)

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