Loose Top

होली पर ‘हिंदूफोबिया’ के रंग से सराबोर हुआ टाइम्स ऑफ इंडिया

अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक बार फिर से अपना हिंदू विरोधी चेहरा सामने लाया है। होली की छुट्टी के बाद आए अखबार ने त्यौहार के नाम पर अपराध की फर्जी खबरों की झड़ी लगा दी है। जाहिर है टाइम्स ऑफ इंडिया की नीयत होली को लेकर नकारात्मक इमेज बनाने की है। आमतौर पर होली के बाद अखबारों के पहले पन्ने पर उसकी कोई अच्छी तस्वीर होती है, लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया ने ऐसी किसी फोटो को जगह नहीं दी। इसके बजाय अपराध की 2 सामान्य घटनाओं को होली से जोड़कर उसने त्यौहार को बदरंग करने की साजिश में हिस्सा जरूर लिया। टाइम्स ऑफ इंडिया वही अखबार है जो बलात्कार के आरोप में मौलवी की गिरफ्तारी पर उसे ‘साधु’ बताता है। इस अखबार ने कुछ दिन पहले एक मदरसे में यौन शोषण की घटनाओं की खबर में मदरसे की जगह ‘वेद पाठशाला’ शब्द का इस्तेमाल किया था। समझा जा सकता है कि ये अखबार किस एजेंडे पर काम कर रहा है। आइए देखते हैं टाइम्स ऑफ इंडिया के हिंदूफोबिया का ताजा नमूना। यह भी पढ़ें: ये खबर सबूत है कि मीडिया में जिहादी भरे पड़े हैं

होली के दिन मुस्लिम परिवार पर हमला!

टाइ्स ऑफ इंडिया का झूठ: अखबार ने गुरुग्राम की एक खबर छापी है जिसमें दावा किया गया है कि ‘मॉब’ (भीड़) ने होली के दिन एक मुस्लिम परिवार के घर में घुसकर मारपीट की गई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। परिवार के एक सदस्य को गंभीर चोटें आई हैं और वो अस्पताल में भर्ती है, जबकि घर पर कई सामान और बाहर खड़ी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया। अखबार ने इस खबर को ये कहते हुए हिंदू-मुस्लिम रंग दिया है कि झगड़ा इस बात से शुरू हुआ कि कुछ लोगों ने मुस्लिम परिवार को पाकिस्तान जाने को बोला था। अखबार ने बहुत प्रायोजित तरीके से इस मामले को ‘बेकसूर मुसलमानों पर हिंदू भीड़ के हमले’ का मामला बना दिया है। खबर को इमोशनल रंग देने के लिए इसमें एक तिरंगे झंडे का एंगल भी डाला गया है। जिसमें परिवार का एक सदस्य बता रहा है कि हमारे घर की छत पर तिरंगा लहराता है। ये झंडा हम सभी का है और हमें किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। यह खबर आप नीचे इसी पेज पर देख सकते हैं।यह भी पढ़ें: ये अखबार आतंकवादियों को बागी और शहीद मानते हैं

क्या है सच: सबसे बड़ी बात तो ये कि घटना का होली से कोई लेना-देना नहीं है। ये मामला गुरुग्राम के भोंडसी थाना क्षेत्र के भूपसिंहनगर का है। होली के दिन यहां क्रिकेट मैच के दौरान झगड़ा शुरू हुआ। लोकल थाने की पुलिस के मुताबिक कुछ मुस्लिम युवक क्रिकेट खेल रहे थे। इसी दौरान गेंद से एक हिंदू युवक को चोट लग गई। इस पर वहां झगड़ा शुरू हो गया और मुस्लिम युवकों ने हिंदू लड़के की जमकर पिटाई कर दी। इसके बाद उसने अपने दोस्तों को बुला लिया और करीब 15-20 की संख्या में मुस्लिम युवक के घर पर धावा बोल दिया। उन्होंने काफी देर तक ईंट-पत्थर भी बरसाए। घर में घुसकर अलमारी और शीशे तोड़ डाले और घर में मौजूद महिलाओं से भी मारपीट की। ये दोनों तरफ से मारपीट का मामला है जिसमें दोनों पक्षों के लोग घायल हुए हैं। हमला करने वाले हिंदू लड़कों में से कुछ ने शराब पी रखी थी। यानी मामले का न तो होली से लेना-देना है न तो धर्म से और न ही तिरंगे झंडे से। पुलिस दोषियों पर कार्रवाई कर रही है। यह भी पढ़ें: जब दलित अत्याचार पर मीडिया का झूठ पकड़ा गया

गाजियाबाद में होली पर युवक की हत्या

टाइम्स ऑफ इंडिया का झूठ: गाजियाबाद के विजयनगर में होली की हुड़दंग कर रहे कुछ लोगों ने एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी। टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपने तीसरे पेज पर ये खबर प्रमुखता से छापी है। मारे गए युवक का नाम अनुराग वर्मा है और वो यहां पर ठेली लगाता था। अखबार की रिपोर्ठ के मुताबिक कुछ लोग होली पर हुड़दंग मचा रहे थे और रास्ता जाम कर रखा था। अनुराग ने उन्हें रास्ता देने को कहा तो उसे गोली मार दी गई। अखबार ने अनुराग के भाई राजेश के हवाले से लिखा है कि “मेरे परिवार ने तय किया है कि अबसे हम कभी भी होली नहीं मनाएंगे।” टाइम्स ऑफ इंडिया ने पूरी खबर इस तरह से लिखी है मानो होली के कारण ही उस शख्स की हत्या की गई। इसी खबर में यह भी बताया है कि आरोपी 24 साल का आकाश नाम का शख्स है जो पहले से कई आपराधिक मामलों में जेल की हवा खा चुका है। यह खबर आप नीचे इसी पेज पर देख सकते हैं।यह भी पढ़ें: दलित अत्याचार की ये खबर मीडिया ने क्यों दबा दी?

क्या है सच?: हमने इस घटना पर लोकल पुलिस और इलाके के कुछ लोगों से बात की तो अलग ही कहानी पता चली। इस घटना का भी होली से कोई लेना-देना नहीं है। होली से इसका वास्ता बस इतना ही है कि घटना होली के दिन हुई। यहां भीमनगर इलाके में प्रिंस और आकाश नाम के लोग रहते हैं। इन दोनों की आपस में पुरानी रंजिश है और आए दिन उनके बीच झगड़े होते हैं। होली के दिन भी दोनों परिवारों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। इस पर उनके पड़ोसी अनुराग ने बीच-बचाव की कोशिश की। इसी दौरान आरोपी आकाश अपने घर से तमंचा लेकर आया और लहराने लगा। तमंचे की गोली बीच-बचाव के लिए आए अनुराग के सीने में लग गई और वो खून से लथपथ होकर वहीं गिर गया। जैसा कि टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है कि आरोपी होली की हुड़दंग मचा रहे थे वैसा कुछ नहीं था। दूसरी बात यह कि किसी परिवार में किसी त्यौहार के दिन अगर मौत हो जाए अक्सर लोग उस त्यौहार को नहीं मनाते। पीड़ित के भाई ने जो भी कहा उसे अखबार ने अपनी ‘हिंदूफोबिक’ एंगल दे डाला। यह भी पढ़ें: वो हिंदू हैं इसलिए मीडिया को असहिष्णुता नहीं दिखी

भारतीय मीडिया हिंदू विरोधी क्यों है?

होली के अगले ही दिन टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार की ये दोनों खबरें इस बात की तरफ इशारा हैं कि समाचार संस्थानों में किस तरह के लोग काम कर रहे हैं। किसी भी मुस्लिम या ईसाई त्यौहार के बाद ऐसी नकारात्मक रिपोर्टिंग आपको देखने को नहीं मिलेगी। दिवाली के बाद गंदगी और प्रदूषण की खबरें नियमित तौर पर छपती हैं, लेकिन बकरीद या क्रिसमस के बाद होने वाली बर्बादी और गंदगी कभी खबरों में जगह नहीं पाती। ताजिया ले जाने के दौरान ढेरों हादसे होते हैं, लेकिन इनकी खबर भी कभी मीडिया नहीं दिखाता। दरअसल इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि अखबारों और चैनलों में काम कर रहे ज्यादातर संपादक कांग्रेसी या वामपंथी सोच वाले हैं। रिपोर्टर चाहे जो खबर लाए ये लोग अपनी विचारधारा के हिसाब से खबरों में तड़का लगाना नहीं भूलते। ऐसे कई पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को बाकायदा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से फंडिंग भी मिलती है। इसका खुलासा कुछ दिन पहले ही हमने न्यूज़लूज पर किया था। पढ़ें रिपोर्ट: पाकिस्तान के लिए काम कर रहे हैं कई पत्रकार, पहली बार मिला सबूत

गुरुग्राम में मुस्लिम परिवार से मारपीट की टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर:

गाजियाबाद में हुई हत्या पर टाइम्स ऑफ इंडिया की फर्जी खबर:

(न्यूज़लूज़ टीम)

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।
एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:
Donate with

comments

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Popular This Week

Don`t copy text!