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जब वाराणसी में प्रियंका वाड्रा के लिए बीजेपी नेताओं ने जुटाई ‘भीड़’

बायीं तस्वीर बनारस के अस्सी घाट की है। ये उस समय का दृश्य है जब प्रियंका की नाव घाट पर पहुंची थी। भीड़ देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं।

वाराणसी दौरे पर गईं कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा के रोड शो की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इनमें देखा जा सकता है कि प्रियंका वाड्रा के साथ मुश्किल से 25-50 कार्यकर्ता और कुछ तमाशबीन थे। इन तस्वीरों की सच्चाई जानने के लिए हमने स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं से बात की और जो जानकारी हाथ लगी वो बेहद दिलचस्प है। 20 मार्च बुधवार के दिन प्रियंका का वाराणसी में कार्यक्रम था। जबकि अगले दिन यानी 21 मार्च को होली थी। यानी प्रियंका गांधी छोटी होली के दिन वाराणसी पहुंचीं थीं। स्थानीय कांग्रेस नेताओं को पहले से ही आशंका थी कि प्रियंका के स्वागत के लिए ज्यादा भीड़ नहीं जुटेगी, लिहाजा उन्होंने भीड़ दिखाने के लिए लोकल बीजेपी नेताओं से मदद मांगी। यह मदद ‘निजी रिश्तों’ और ‘नाक बचाने’ के नाम पर मांगी गई थी। जिसके बाद बनारस बीजेपी के कुछ नेताओं ने अपने कुछ समर्थकों से बिना कोई झंडा वगैरह लिए प्रियंका के प्रोग्राम में जाने को कहा। तब जाकर प्रियंका के कार्यक्रमों में थोड़ी-बहुत भीड़ जुट पाई। हालांकि यह ‘मदद’ निजी स्तर पर की गई, न कि पार्टी के लेवल पर। ऐसी मदद संभवत: समाजवादी पार्टी और बीएसपी से भी मांगी गई थी। भीड़ न जुट पाने की एक वजह खुद प्रियंका वाड्रा भी हैं जिन्होंने गंगा यात्रा से ठीक पहले भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर रावण को अपना भाई बना लिया था। इस बारे में इसी इसी रिपोर्ट में हम आपको आगे बताएंगे। यह भी पढ़ें: प्रियंका वाड्रा के बोलने से डर क्यों रही है कांग्रेस?

बीजेपी समर्थकों ने सुना प्रियंका का भाषण!

प्रियंका बुधवार दोपहर करीब 12.30 बजे रामनगर से बोट पर बनारस के अस्सी घाट पर उतरीं। वहां उनके स्वागत के लिए मुश्किल से 50 कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक थे। बाकी वो लोग थे, जो बीजेपी के समर्थक हैं। ये चुपचाप बिना किसी उत्साह वहां पर प्रियंका के स्वागत का हिस्सा बने और वापस चले गए। इससे कांग्रेस को यह दिखाने का मौका मिल गया कि प्रियंका के स्वागत के लिए भारी भीड़ पहुंची है। भेजे गए बीजेपी समर्थकों में कुछ ने मोदी-मोदी के नारे भी लगाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें उनके साथियों ने ही चुप करा दिया। इनमें ही एक वो लड़की भी थी जो ‘नमो अगेन’ की टी-शर्ट पहनकर अपने पिता के साथ अस्सी घाट पर पहुंची थी। जब मीडिया ने उस लड़की से बातचीत करने की कोशिश की तो कांग्रेस के कार्यकर्ता इस बात से बिदक गए और उन्होंने लड़की से धक्कामुक्की शुरू कर दी। इस घटना से बीजेपी के वो नेता भड़क गए जिन्होंने कांग्रेस के अपने साथियों की ‘पर्सनल लेवल पर’ मदद की कोशिश की थी। प्रियंका ने बनारस में मल्लाहों के जिस कार्यक्रम में हिस्सा लिया उसमें भी बीजेपी समर्थक थे। इस बारे में जब हमने स्थानीय कांग्रेस नेताओं से बात की तो उन्होंने निजी बातचीत में इस बात की पुष्टि की कि मदद मांगी थी। जिसके बाद बीजेपी के समर्थक अस्सी घाट और प्रियंका के कार्यक्रम की अलग-अलग जगहों पर पहुंचे भी थे। लेकिन जब-जब सड़कों पर प्रियंका का काफिला निकला कोई भी उनकी गाड़ियों के साथ दौड़ने को तैयार नहीं हुआ। हालांकि कार्यकर्ता समागम में सबसे अधिक करीब 500 लोग जुटे। लेकिन इनमें भी ज्यादातर संख्या बच्चों और महिलाओं की थी। ज्यादातर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिवार के लोग थे। यह भी पढ़ें: प्रियंका वाड्रा के ओपन लेटर पर यूपीवाले भैया का जवाब

पहले ही खराब हो चुका था प्रियंका का मूड

बनारस में अस्सी घाट पहुंचने से पहले ही प्रियंका वाड्रा उखड़ी हुई थीं। रामनगर में उनका बच्चों से मिलने का प्रोग्राम था। लेकिन सिर्फ 4-5 बच्चे ही जुटे। लिहाजा इस कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा। यहां प्रियंका ने कुछ बच्चों के साथ फोटो खिंचवाई और आगे बढ़ गईं। प्रियंका जब प्रयागराज से चली थीं तो उन्हें लगा था कि आगे रास्ते में हजारों-लाखों की भीड़ गंगा के दोनों तरफ उनका इंतजार कर रही होगी। लेकिन ज्यादातर जगहों पर इक्का-दुक्का तमाशबीनों से ज्यादा कोई नहीं दिखा। इससे प्रियंका का मूड बिगड़ा हुआ था। लेकिन भदोही पहुंचते-पहुंचते उनका धैर्य जवाब दे गया। मंगलवार को भदोही में वो कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी पर भड़क गईं। प्रियंका ने कहा कि उनकी यात्रा का इंतजाम ठीक से नहीं किया गया है। ज्यादातर जगहों पर वो तय समय के कई घंटे बाद पहुंचीं। जब वो विंध्याचल में विंध्यवासिनी मंदिर पहुंचीं तो वहां मौजूद भक्तों और पुजारियों ने मोदी-मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए। बनारस पहुंचने के बाद भी यही स्थिति बनी रही। अस्सी से लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर तक प्रियंका को लेकर लोगों का ठंडा रिस्पॉन्स कांग्रेस नेताओं को भी हैरान कर रहा है। हालांकि वो इसके लिए होली की छुट्टी को जिम्मेदार बता रहे हैं। कोई भी कांग्रेसी नेता इस बारे में सामने आकर बोलने को तैयार नहीं है। यह भी पढ़ें: क्या अमेठी में राहुल गांधी को हरा पाएंगी स्मृति ईरानी

बनारस में कांग्रेस के पास पब्लिक क्यों नहीं?

अगर देखा जाए तो प्रियंका वाड्रा ऐसी नेता हैं जिनमें लोगों की बहुत दिलचस्पी है। कांग्रेस नेताओं को राहुल से ज्यादा प्रियंका में उम्मीदें नजर आती हैं। फिर ऐसा क्यों है कि प्रियंका जब बनारस आईं तो उन्हें देखने और सुनने के लिए भीड़ का इंतजाम करना भारी पड़ गया? दरअसल इसकी कई वजहें हैं। बनारस में कांग्रेस का संगठन इन दिनों अब तक की सबसे बुरी हालत में है। कई मठाधीश पुराने कांग्रेसी के तौर पर पहचाने तो जाते हैं लेकिन उनका अब कोई जनसमर्थन नहीं बचा है। छह घंटे के पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रियंका के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला, राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी, यूपी विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता अजय सिंह लल्लू, माफिया सरगना और पूर्व विधायक अजय राय, पूर्व सांसद राजेश मिश्रा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा और महानगर कांग्रेस के अध्यक्ष सीताराम केशरी मौजूद रहे। लेकिन इनमें से किसी का इतना प्रभाव नहीं बचा है कि बनारस में वो भीड़ जुटा सके। प्रियंका के कार्यक्रम के लिए आसपास के जिलों से भी कार्यकर्ताओं को वाराणसी पहुंचने को कहा गया था। लेकिन होली और बच्चों के इम्तिहान का बहाना बनाकर कोई नहीं आया। अजय राय ने 2014 में मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन स्थानीय होने के बावजूद उन्हें मात्र 7 फीसदी वोट मिले थे। जबकि कथित तौर पर बाहरी उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को बनारस की 57 फीसदी आबादी ने वोट देकर जिताया था।

चंद्रशेखर रावण के कारण नाराज कांग्रेसी नेता

इतने बड़े-बड़े दिग्गजों के बावजूद प्रियंका के कार्यक्रम में भीड़ न होने के बारे में हमने कई स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बात की। ज्यादातर ने कार्यक्रम में भीड़ न होने के सवाल पर चुप्पी साध ली। लेकिन थोड़ा और कुरेदने पर हर किसी की जुबान पर चंद्रशेखऱ रावण का नाम आया। दरअसल कुछ दिन पहले ही प्रियंका वाड्रा मेरठ में अस्पताल में भर्ती रावण से मिलने पहुंचीं थीं और उन्होंने रावण को अपना भाई तक बता डाला था। इसके बाद खबर आई कि कांग्रेस रावण को बनारस से मोदी के खिलाफ टिकट देने पर विचार कर रही है। इस खबर से स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी भड़क उठे। उनकी नाराजगी इस बात से है कि पार्टी बनारस में किसी बाहरी को टिकट देने जा रही है और वो भी लोकल यूनिट से सलाह-मशविरा किए बिना। पार्टी के कई स्थानीय नेता टिकट के जुगाड़ में हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने से उनको पब्लिसिटी मिलेगी और करियर चमक जाएगा। जबकि पार्टी उनकी जगह किसी रावण को टिकट देने की बात कर रही है।

कांग्रेस के कार्यक्रम के मुताबिक प्रियंका मल्लाहों के महासम्मेलन में हिस्सा लेने वाली थीं। नीचे ये तस्वीरें उसी ‘महासम्मेलन’ की हैं, जिन्हें यूपी कांग्रेस ने ट्वीट किया है। बताया जा रहा है कि प्रियंका से मिलने मल्लाह समुदाय के कुल 5 से 10 लोग आए थे।

नीचे के ट्वीट में आप उत्साहित कांग्रेस नेताओं को देख सकते हैं जो प्रियंका के काफिले के आगे नारेबाजी कर रहे थे। इनकी कुल संख्या उतनी ही थी जितनी इस वीडियो में दिख रही है। इन्होंने भी मुश्किल से 3-4 मिनट महफिल जमाई। फिर थक गए।

प्रियंका के रोड शो का ये वीडियो स्थानीय लोगों ने ही सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।

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