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बिस्कुट वाले लाला ने भी पुण्य प्रसून को निकाला, ये रही वजह!

विवादित पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी को एक बार फिर नौकरी से लात मारकर निकाल दिया गया है। वो पिछले करीब 2 महीने से सूर्या समाचार नाम के एक चैनल के संपादक बने हुए थे। ये चैनल प्रियागोल्ड बिस्कुट कंपनी के मालिक बीपी अग्रवाल ने शुरू किया था। चैनल के सूत्रों के मुताबिक पुण्य प्रसून वाजपेयी और उनकी पूरी टीम से कह दिया गया है कि वो 31 मार्च तक अपना अगला ठिकाना देख लें। इस चैनल में आने के दिन से ही पुण्य प्रसून बाजपेयी ने सरकार के खिलाफ फर्जी खबरों की भरमार लगा दी थी। हालांकि ये चैनल ज्यादा देखा नहीं जाता है तो इन खबरों का कोई खास असर देखने को नहीं मिला। पुण्य प्रसून बाजपेयी को नौकरी से निकाले जाने की जो वजह सामने आई है वो हैरान करने वाली है। चैनल के सूत्रों ने हमें बताया कि पुण्य प्रसून को निकाले जाने की वजह बनी है लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के उम्मीदवारों की लिस्ट। बताया जा रहा है कि पुण्य प्रसून वाजपेयी ने प्रियागोल्ड बिस्कुट के मालिक को झांसा दिया था कि वो उन्हें लोकसभा चुनाव में नोएडा से कांग्रेस का टिकट दिलवा देंगे। लेकिन जब लिस्ट सामने आई तो कहानी उलट गई। यह भी पढ़ें: इस पूर्व पत्रकार ने खोली पुण्य प्रसून बाजपेयी की पोल

इस तरह कटा ‘क्रांतिकारी’ पत्रकार का पत्ता

बताया जा रहा है कि कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवारों की लिस्ट में अपना नाम न देखकर बिस्कुट कंपनी और अब सूर्या समाचार चैनल के मालिक भड़क उठे। और उन्होंने देखते ही देखते पुण्य प्रसून का पैक-अप करवा दिया। चैनल में बीते कुछ दिनों से यह चर्चा आम थी कि पुण्य प्रसून बाजपेयी मालिक को चुनाव का टिकट दिलाने के लिए काफी भागदौड़ कर रहे हैं। उन्होंने इस सिलसिले में कांग्रेस के कई नेताओं से इंटरव्यू के बहाने मुलाकात भी की थी। लेकिन बात नहीं बन पाई। दरअसल कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी यूपी का इंचार्ज बनाया है और उन्होंने नोएडा से अपने बेहद करीबी माने जाने वाले डॉ. अरविंद सिंह को टिकट दिलवा दिया। लिहाजा पुण्य प्रसून बाजपेयी हाथ ही मलते रहे गए। ऐसी चर्चा है कि मंगलवार दोपहर में बिस्कुट वाले लाला ने क्रांतिकारी पत्रकार को अपने कमरे में बुलाया और कहा कि मुझे चैनल में छंटनी करनी है। आप पत्रकारों की लिस्ट तैयार कीजिए। इस पर पुण्य प्रसून पहले से काम कर रहे करीब दर्जन लोगों की लिस्ट लेकर पहुंच गए। लेकिन मालिक ने कहा कि ये तो कम पैसे पर काम कर रहे लोग हैं, आप उन लोगों के नाम लाइए जो आपके साथ यहां पर मोटी सैलरी पर आए हैं। जब उन्होंने कहासुनी की कोशिश की तो मालिक ने फरमान सुना दिया कि आप ‘कुछ और इंतजाम’ कर लीजिए। यह भी पढ़ें: पीएमओ की दखल और क्रांतिकारी पत्रकारिता

टिकट के लालच में अब तक चुप था मालिक

सूर्या समाचार में रहते हुए पुण्य प्रसून ने पिछले दिनों लोकसभा चुनाव की जोरदार तैयारियां की थीं। उनके जाने के बाद से ही चैनल पर सिर्फ वो खबरें चलती थीं जो सरकार के खिलाफ और कांग्रेस के समर्थन में हों। उन्होंने लाखों रुपये के पैकेज पर अपने कई करीबियों को चैनल में नौकरी भी दिलवाई। जबकि वहां पर पहले से काम कर रहे कई पत्रकारों को बाहर का रास्ता भी दिखा दिया। माना जाता है कि जब तक टिकट की उम्मीद थी चैनल के मालिक ने आंखें बंद कर रखी थीं। लेकिन जैसे ही उसे पता चला कि कांग्रेस का टिकट नहीं मिल रहा, वो अपने असली रूप में आ गया। फिलहाल चैनल के फैसले के बाद अब पुण्य प्रसून समेत उनके करीब एक दर्जन साथियों की छुट्टी तय है। यह भी खबर है कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी के कुछ बड़े नेताओं से मदद मांगनी शुरू भी कर दी है। संभवत: कपिल सिब्बल का चैनल उनका अगला ठिकाना बन सकता है। वैसे पुण्य प्रसून का अपनी हरकतों के कारण चैनलों से निकाले जाने का पुराना इतिहास रहा है। एक नजर कुछ ऐसी ही घटनाओं पर:

  • 2005 में उन्हें एनडीटीवी से निकाला गया था।
  • 2007 में वो कैमरे पर लालू यादव से सेटिंग करते पकड़े गए थे। जिसके बाद सहारा समय चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।
  • 2013 में वो ज़ी न्यूज़ में थे, तब भी खबरों के चयन में ऐसी ही बेइमानियों के चलते उन्हें बाहर का रास्ता दिखाय गया था।
  • 2014 में वो पूरी तरह केजरीवाल के सलाहकार की भूमिका में आ गए। इसी दौरान आजतक चैनल में रहते हुए केजरीवाल के साथ सेटिंग करते हुए रंगे हाथ पकड़े गए।
  • कुछ साल बाद जब आजतक चैनल से उन्हें निकाला गया तो उन्होंने यह कहना शुरू कर दिया कि बाबा रामदेव ने मुझे दबाव बनाकर निकलवाया है।
  • 2018 में उन्होंने एबीपी न्यूज़ पर अपने प्रोग्राम की टीआरपी कम आने पर हल्ला मचाना शुरू कर दिया कि जब उनका प्रोग्राम आता है तो सरकार ट्रांसमिशन खराब करवा देती है।
  • एबीपी न्यूज ने उनके आरोपों को बेबुनियाद बताया और पुण्य प्रसून को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
  • इसके बाद से बाजपेयी के लिए सूर्या समाचार ठिकाना बना था, लेकिन आखिरकार पता चल गया कि ये नौकरी उन्हें कैसे और क्यों मिली थी।

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