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बीमार पर्रीकर के साथ सेल्फी खींचना चाहते थे राहुल गांधी, कर दिया था मना!

गोवा की सैर पर गए राहुल गांधी ने 29 जनवरी को मनोहर पर्रीकर से मुलाकात की थी। उन्होंने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया था और कहा था कि वो उनका हाल पूछने जा रहे हैं, लेकिन बाद में उन्होंने इस पर राजनीति शुरू कर दी थी। उस मुलाकात से जुड़ी एक अहम जानकारी न्यूज़लूज़ के हाथ लगी है। गोवा में मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात एक कर्मचारी ने हमें बताया कि जब राहुल के आने से पहले मनोहर पर्रीकर बहुत सहज थे। जब उन्हें बताया गया कि राहुल गांधी गोवा में हैं और मिलने आना चाहते हैं तो वो अपनी चिरपरिचित अंदाज में हल्का सा मुस्कुराए और हां की मुद्रा में सिर हिला दिया। राहुल गांधी के आने के बाद भी वो पूरी तरह सहज और मुस्कुराते रहे। राहुल करीब 5 मिनट तक उनके साथ रहे होंगे। इस दौरान ज्यादातर औपचारिक बातें होती रही थीं। जाते समय राहुल ने अपना फोन निकालकर सेल्फी लेने का इशारा किया तो पर्रीकर ने इशारे से मना कर दिया। इस मुलाकात के दौरान पर्रीकर के हेल्थ स्टाफ और कुछ दूसरे सहयोगी साथ में ही थे। बाद में जब राहुल गांधी ने इस मुलाकात को लेकर गलतबयानी शुरू की तब वो बहुत व्यथित हो उठे थे। यह भी पढ़ें: आईआईटी छात्र जो स्वयंसेवक भी रहा

सेल्फी खींचना चाहते थे कांग्रेस अध्यक्ष

सिक्योरिटी स्टाफ ने बताया कि “पर्रीकर साहब और राहुल गांधी की मुलाकात कुछ अजीब थी। शायद साहब समझ रहे थे कि मिलने आया आदमी बुरी नीयत से आया है। फिर भी वो पूरी तरह सहज रहे। हमारे सूत्र के मुताबिक उस दिन पर्रीकर काफी कमजोरी महसूस कर रहे थे और सिर्फ बेहद जरूरी मुलाकातियों से ही मिल रहे थे। लेकिन राहुल गांधी से मिलने के लिए शायद इसलिए हां कर दी ताकि बाद में कोई विवाद न पैदा हो जाए। पूरी मुलाकात के दौरान वो अपने फोल्डिंग बेड पर बैठे रहे थे और राहुल गांधी सामने मुलाकातियों की कुर्सी पर बैठे। पर्रीकर की आवाज बहुत धीमे थी और वो बहुत कम बोल रहे थे। उन्होंने राहुल गांधी से पूछा कि गोवा कैसा लगा? कहां-कहां पर घूमने गए?” चलते समय राहुल गांधी ने अपने कुर्ते की जेब से मोबाइल फोन निकाला और कुछ इशारा किया। मनोहर पर्रीकर ने हाथ का इशारा करके मना कर दिया। हमारे सूत्र के मुताबिक ‘ऐसा लगा कि शायद राहुल जी सेल्फी लेना चाहते थे।’ वहां मौजूद सभी लोगों को यह थोड़ा अजीब लगा क्योंकि बीमार व्यक्ति के साथ इस तरह से फोटो खिंचवाना शिष्टता नहीं माना जाता।

राहुल के झूठ पर खुद लिखवाया बयान

मुलाकात के बाद राहुल गांधी उस दिन तो चुप रहे। लेकिन अगले ही दिन बाद ही बयान दिया कि “जब मैंने पर्रीकर से मुलाकात की थी तो उन्होंने मुझे बताया कि मेरा राफेल डील से कोई लेना-देना नहीं था और सारे फैसले सीधे प्रधानमंत्री ने लिए।” इस बयान से पर्रीकर इतने व्यथित हो उठे कि काफी देर तक चुप रहे। फिर उन्होंने कहीं फोन किया और फिर अपने सेक्रेटरी को बुलाकर खुद बोलकर बयान लिखवाया। उन्होंने कहा कि “राहुल जी आपने मेरे साथ 5 मिनट का समय बिताया। इस दौरान न तो आपने राफेल का कोई जिक्र किया न मैंने। न ही हमारी इससे जुड़े किसी मुद्दे पर बात हुई। आपके बयान से लगता है कि इस मुलाकात पर आप ओछी राजनीति करना चाहते हैं। यह राजनीतिक अवसरवादिता है। जिससे आपको बचना चाहिए।” इतना ही नहीं पर्रीकर ने लिखा कि “शिष्टाचार मुलाकात में इतने निचले स्तर की राजनीति करते हुए झूठा बयान देकर मेरे मन में आपकी यात्रा की ईमानदारी को लेकर सवाल पैदा हो गए हैं। मैं मीडिया में आई खबरें पढ़कर व्यथित हूं कि आपने कहा कि मैं इस प्रक्रिया में शामिल नहीं था।”

फजीहत के डर से पलटे थे राहुल गांधी

मनोहर पर्रीकर के बयान के बाद राहुल गांधी का झूठ पूरी तरह उजागर हो चुका था। इसके बाद फजीहत के डर से उन्होंने यह तो कबूल लिया कि मुलाकात में राफेल पर कोई बात नहीं हुई। लेकिन यह कहना शुरू कर दिया कि मनोहर पर्रीकर पीएम नरेंद्र मोदी से वफादारी दिखाने के दबाव में हैं। राहुल गांधी की इस सियासी पैंतरेबाजी से गोवा के लोगों में बहुत नाराजगी थी। लोग सच्चाई को समझ रहे थे, लिहाजा गोवा कांग्रेस को आगे आकर यह कहना पड़ा कि राफेल पर कोई बातचीत नहीं हुई। यानी गोवा कांग्रेस ने राहुल गांधी की बयानबाजियों से खुद को अलग कर लिया। ताकि उन्हें राज्य की जनता की नाराजगी न झेलनी पड़े। पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी के लिए ये शर्मिंदगी का मौका था। लेकिन उसे शर्म कैसी जिसके पूरे परिवार की राजनीति झूठ और फरेब पर आधारित है।

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