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राजस्थान में दलितों पर अत्याचार पर चुप क्यों हैं मेवाणी और रावण?

बायें से पहली तस्वीर भीलवाड़ा में मारे गए गंगाराम की है, बीच में चुरु जिले में रहने वाला हेतराम और तीसरी तस्वीर उस घटना की है जब राहुल गांधी की नजदीकी विधायक दिव्या मदेरणा ने एक दलित सरपंच को अपमानित किया।

राजस्थान में कांग्रेस की सरकार आते ही दलितों पर अत्याचार के मामलों में बढ़ोतरी हो गई है। बीते कुछ दिनों में दलित अत्याचार की 3 बड़ी घटनाओं ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। हैरानी की बात है कि मीडिया ने इन दोनों ही मामलों को ज्यादा तूल नहीं दिया। कांग्रेस की सरकार के सत्ता में होने के कारण उसके पैदा किए तथाकथित दलित नेताओं ने इन दोनों ही घटनाओं पर एक बयान तक जारी नहीं किया। पहली घटना भीलवाड़ा जिले की है जहां एक कांग्रेसी नेता की खदान में काम करने वाले दलित मजदूर को टायरों से बांधकर जिंदा जला दिया गया। दूसरी घटना राजस्थान के चुरू की है जहां पर एक दलित युवक को निर्वस्त्र करके इतना पीटा गया कि उसकी जान चली गई। जबकि तीसरी घटना में राजस्थान कांग्रेस की विधायक दिव्या मदेरणा ने एक महिला सरपंच को अपनी बराबरी में नहीं बैठने दिया क्योंकि वो दलित जाति से ताल्लुक रखती थी। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि बीजेपी की सरकार वाले राज्यों में छोटी-बड़ी घटनाओं पर भी कोहराम मचाने वाला मीडिया अब कहां है? साथ ही जिग्नेश मेवाणी और चंद्रशेखर रावण जैसे तथाकथित दलित नेता इन घटनाओं पर चुप क्यों हैं? अकेले मार्च महीने में हुई इन तीन बड़ी घटनाओं के अलावा भी राजस्थान में बीते 2-3 महीनों में दलितों पर अत्याचार के मामलों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। इन सभी मामलों में राजस्थान बीजेपी दलितों को इंसाफ की लड़ाई लड़ रही है।यह भी पढ़ें: कर्नाटक में छुड़ाए गए गुलाम दलितों पर मौन क्यों हैं राहुल गांधी

कांग्रेसी नेता की खदान में दलित को जिंदा जलाया

राजस्थान के भीलवाड़ा ज़िले में 1 मार्च की सुबह को दलित मजदूर गंगाराम को जिंदा जला दिया गया। मामला भीलवाड़ा के बिजोलिया थाना क्षेत्र का है जहां 60 साल के गंगाराम सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के एक नेता की पत्थर खनन कंपनी में बागवानी का काम करते थे। माइनिंग कंपनी के दफ़्तर के सामने एक खाली जगह पर उनको टायरों से बांधकर जला दिया गया। माइनिंग कंपनी ने मुआवजे के तौर पर एक लाख रुपया देकर पल्ला झाड़ लिया। पुलिस जांच के नाम पर कुछ संदिग्ध लोगों से पूछताछ तो कर रही है, लेकिन मामला कांग्रेस नेता से जुड़ा होने के कारण लगता है कि उसके भी हाथ बंधे हुए हैं। अभी तक पुलिस यही तय नहीं कर पाई है कि ये हत्या था या आत्महत्या। गांव वाले पूछ रहे हैं कि क्या कोई व्यक्ति आत्महत्या करने के लिए अपने शरीर को टायरों में बांधकर जलाता है? लोगों का कहना है कि आत्महत्या की थ्योरी पुलिस ने असली आरोपी को बचाने के लिए लगाई है। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले गंगाराम अकेले कमाकर पूरे परिवार का पेट पालते थे। अपने उनके परिवार के पास कोई सहारा नहीं रहा। राजस्थान की कांग्रेस सरकार की तरफ से भी उन्हें किसी मदद का एलान नहीं किया गया है। यह भी पढ़ें: दलितों और पिछड़ों के विकास से किसे डर लगता है?

चुरु में दलित की पीट-पीटकर हत्या

राजस्थान के चूरू जिले में 10 मार्च के दिन हेतराम नाम के एक दलित युवक को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया। यहां लालासर गांव में 26 वर्षीय दलित हेतराम की लाठी-सरियों से बेरहमी से पिटाई की गई। पीड़ित को गंभीर हालत में अस्पताल में पहुंचाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हेतराम के परिवारवालों का आरोप है कि आरोपियों को एक स्थानीय कांग्रेस नेता की शह मिली हुई है। शुरू में उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन जब दबाव बना तब जाकर पुलिस ने 7 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया। आरोपियों में गांव का सरपंच भी शामिल है जो कांग्रेस पार्टी के एक विधायक का करीबी बताया जा रहा है। हेतराम के पिता ने जो एफआईआर लिखाई है उसके मुताबिक उनका बेटा पशु चराने का काम करता था। एक पशु की तलाश के लिए वो लालासर गांव गया था, जहां पर सरपंच सूरजभान उसे पकड़कर लाठी-डंडों और सरिये से तब तक पीटा जब तक उसकी जान नहीं चली गई। परिवार वालों को इंसाफ की कोई उम्मीद नहीं है। उनका कहना है कि पुलिस ने शुरू में ही इसे आपसी रंजिश का केस बना दिया। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था। यह भी पढ़ें: इस गांव के दलितों ने कहा, मर जाएंगे लेकिन धर्म नहीं बदलेंगे

महिला विधायक ने दलित सरपंच को भगाया

भंवरी देवी नाम की लोकगायिका से अवैध रिश्ते और फिर उसकी हत्या के दोषी कांग्रेसी नेता परसराम मदेरणा की विधायक बेटी दिव्या मदेरणा की करतूत सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जोधपुर के ओसियां इलाके से कांग्रेस की विधायक दिव्या मदेरणा ने एक दलित विधायक को मंच पर अपनी बराबरी में नहीं बैठने दिया। मामला यहां के खेतासर गांव का है। सरपंच एक चुनी हुई जनप्रतिनिधि होती है। ऐसे कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल के मुताबिक उसे मंच पर जगह दी जाती है। लेकिन उसके दलित होने के कारण विधायक साहिबा को यह मंजूर नहीं था कि वो बराबरी की कुर्सी पर बैठे। कार्यक्रम में अपमान के बावजूद सरपंच चंदू देवी चुप रह गईं और जाकर पंडाल में बैठ गईं। बाद में जब लोगों ने पूछा तो उन्होंने बताया कि गांव का कार्यक्रम होने के नाते मुझे मंच पर जगह मिलनी चाहिए थी। लेकिन कांग्रेस विधायक ने अपमानित करते हुए जाने को कह दिया। उनका कहना है कि “मैं तो ग्रामीणों के आग्रह पर ही स्वागत करने पहुंची थी। पंचायत की जनता की ओर से विधायक के पास ही गांव की प्रथम नागरिक होने के कारण मेरे लिए कुर्सी लगाई गई थी। इस घटना का वीडियो आप नीचे लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं:

दलित सरपंच का अपमान करने वाली दिव्या मदेरणा राहुल गांधी की बेहद करीबी मानी जाती हैं। दोनों की तस्वीर देखकर आप खुद समझ सकते हैं।

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