Loose Views

प्रियंका वाड्रा के ओपन लेटर पर यूपी वाले भइया का जवाब

Picture Tweeted By Priyanka Vadra

मेरी प्यारी प्रियंका दीदी,
आपका खुला हुआ पत्र मिला। पहले लगा कि डाकिये ने पहले ही खोलकर पढ़ लिया। फिर पता चला कि आपने खुला हुआ ही भेजा। वैसे दीदी आपने इतनी हिंदी लिखी कैसे? इतनी हिंदी तो आपके पूरे खानदान ने आजतक मिलकर नहीं लिखी होगी। सही-सही बताइएगा…. लगता है आपको रवीश जी या केजरीवाल जी से हेल्प मिल रही है। वइसे भी ये दोनों ‘खुला पत्र’ लिखने के एक्सपर्ट हैं। हां तो दीदी आप लिखती हैं कि राहुल गांधी जी ने आपको पूर्वी यूपी में कांग्रेस पार्टी की जिम्मेदारी दी है। आपको क्यों दी है? अच्छा शायद इसलिए क्योंकि वो आपके सगे भाई हैं। वरना तो कितने कांग्रेस कार्यकर्ता पूरी जिंदगी खपा देने के बाद भी कोई जिम्मेदारी नहीं पाते। आप तो पॉलिटिक्स में उतरते ही सीधे चौधरी बन गईं। आप यह भी लिखती हैं कि पूर्वी यूपी से आपका नाता बहुत पुराना है। इतना इमोसनल हो गईं आप कि लिखवा दिया कि ‘आत्मिक रूप’ से जुड़ी हुई हैं। दीदी आत्मिक का मतलब जानती हैं? आपका नाता तो बस अमेठी और रायबरेली से रहा, वो भी वोट का रिश्ता था। वहां के लोगों को कितना भला हुआ वो तो हम लोग देख ही रहे हैं। आप तो कभी बगल के जौनपुर बनारस तक भी नहीं आईं। 42 जिले में से 2 जिले में रहीं और नाता पुराना और वो भी आत्मिक कैसे हो गया? अभी तो आइए फिर जान-पहिचान भी होगी। आत्मिक रिश्ता का तो पता है चुनाव हारते ही आप लंदन में दिखाई देंगी।

एक बार भी अभी तक इलाके में आईं नहीं और आपको कैसे पता चल गया कि युवा, महिलाएं, किसान और मजदूर परेशान हैं? परेशान तो दलाल भी हैं जिनका आप नाम ही नहीं ले रहीं। वो घूसखोर लोग भी परेशान हैं जिनका लाखों-करोड़ों नोटबंदी में डूब गया। वो बिजनेसमैन भी बहुत परेशान हैं जो अब तक एक रुपया भी टैक्स दिए बिना करोड़ों का माल छापते थे। पत्रकार लोग तो बहुते परेशान हैं जिनको अब मुफ्त का सरकारी माल खाने को नहीं मिल रहा। दीदी ये गलत बात है। आपकी पार्टी के असली वोटर लोगों को आप इस तरह से नजरअंदाज कर दीजिएगा तो चुनाव कैसे जीतिएगा? रही बात किसान, मजदूर, युवा और महिलाओं की तो वो तो पहले से परेशान हैं…. उनकी तो परेशानी आपकी पार्टी की ही देन है। अब जाकर उनकी परेशानी दूर करने की कोशिश शुरू हुई तो आप काहे इतना परेशान होने लगीं? रहिए दिल्ली में आराम से और शाम होते ही जाम छलकाइए। कहां ये काऊ बेल्ट में आ के धूल-धक्का खाइएगा। सुने थे कि इंडिया गेट पर आपके वर्कर लोग ही आपके साथ उंगलीबाजी करने लगे थे। यहां वाले तो और भी जानवर टाइप के हैं।

दीदी पहले आपकी दादी जब इस इलाके में वोट मांगने आती थीं तो गरीब का बच्चा गोदी में लेके फोटो खिंचवाती थीं। फिर बच्चे को वापस देकर साबुन से हाथ धोती थीं। वो सब किस्सा तो यहां सबको पता है। अब जमाना बदल गया है साबुन की जरूरत तो नहीं होगी, आप सैनेटाइजर की शीशी जरूर ले आइएगा। रही बात गंगाजी की तो आपकी चिंता बिल्कुल सही है। लेकिन आप पहिली बार आ रही हैं तो बता दें कि गंगा जी अब बहुत शुद्ध हैं। आपके पापाजी जैसा छोड़ के गए थे गंगा जी अब उससे बहुत ठीक हैं। अखबार में संकट मोचन फाउंडेशन की फर्जी खबर छपवाने से गंगा जी गंदी नहीं हो जाएंगी। प्रयागराज बनारस के लोग गंगाजी का पानी अंजुरी में उठाकर देखते हैं तो फट से बोलते हैं अरे ई मोदिया त सच में गंगा जी के साफ कर दिहिस। भरोसा न हो तो अखिलेश भैया को फोन करके पूछिएगा कुंभ में तो वो भी नहाने आए थे। अरे हां दीदी…. आप भी तो कुंभ नहाने आने वाली थीं। चैनल वाले बड़ा चमका के चला रहे थे कि प्रियंका कुंभ से करेंगी राजनीति की शुरुआत। लेकिन आप आईं नहीं। हम लोग आपको जोहते ही रह गए। आतीं तो खुदै देख लेतीं। फिर दुबारा यहां राउंड मारने का कष्ट नहीं करतीं।

‘गंगा जी गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक हैं’ टाइप की फर्जी बात रहने ही दीजिए। पब्लिक आपकी राजनीति का परिर्वतन कर चुकी है अब आप क्या परिवर्तन करेंगी… रहने दीजिए दीदी। आइए बोटिंग शोटिंग कीजिए। फोटो-वोटो खिंचवाइए। गंगा जी को बखस दीजिए। उनको आपके खानदान वाले जितना छुएंगे वो फिर से मैली हो जाएंगी। बाकी सुनाइए जीजा जी कइसे हैं? सुना है उनपर बहुत जुल्म हो रहा है? वइसे तो वो अब आप पर बोझ बन चुके हैं, लेकिन पतिव्रता नारी का ढोंग करते रहिए। भले ही आप दोनों एक साथ एक छत के नीचे अब नहीं रहते हों। भले आप शिमला में पहाड़ पर बंगला बनवाईं लेकिन उनको एक बार देखने के लिए भी नहीं बुलाईं। जनता अब आपके खानदान का मर्म समझ गई है। कुछ दिन और स्वांग दिखा लीजिए फिर आगे का भी सोच लीजिएगा कि कहां पर सैटल होना है लंदन वाले बंगले में या इटली में अपने ननिहाल में? या फिर तिहाड़ में?

आपका शुभाकांक्षी

नाम छोड़िए नाम में क्या रखा है
जिला गाजीपुर से

नीचे आप वो चिट्ठी देख सकते हैं जो प्रियंका वाड्रा ने यूपी की जनता के नाम कथित तौर पर लिखी है।

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।
एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:
Donate with

comments

Polls

क्या कांग्रेस का घोषणापत्र देश विरोधी है?

View Results

Loading ... Loading ...