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‘मैं भी चौकीदार हूं’ नारे से कांग्रेस के लाखों रुपये चौपट हुए!

बीजेपी ने ‘मैं भी चौकीदार’ कैंपेन लॉन्च करके कांग्रेस को सदमे में ला दिया है। ऐसी खबर है कि इस स्लोगन ने कांग्रेस के पूरे चुनावी अभियान को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। दरअसल कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए दुनिया की आधा दर्जन से अधिक टॉप विज्ञापन एजेंसियों को स्लोगन बनाने का ठेका दिया था। उनके बनाए स्लोगन पर बैठकों का कई दौर हो चुका था और जल्द ही कोई एक नारा चुनकर कैंपेन लॉन्च की तैयारी की जा रही थी। उससे पहले बीजेपी के ‘मैं भी चौकीदार’ नारे ने कांग्रेस को वापस ‘चौकीदार चोर है’ के नारे की तरफ धकेल दिया है। कांग्रेस के रणनीतिकारों को लग रहा था कि सिर्फ ‘चौकीदार चोर है’ के नारे से जनता को लुभाया नहीं जा सकता, क्योंकि यह नारा नकारात्मक है। कांग्रेस मोदी के पिछले चुनाव के नारे ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ की तर्ज पर कोई सकारात्मक नारा ढूंढ रही थी।

दुनिया की टॉप एजेंसियों को ठेका

राहुल गांधी की इमेज सुधारने और विरोधी दल के खिलाफ प्रोपोगेंडा के लिए कैंब्रिज एनालिटिका नाम की एजेंसी को ठेका दिए जाने की बात पहले ही सामने आ चुकी है। जबकि नए नारे के लिए अमेरिका की लियो बर्नेट, निक्सन एडवर्टाइजिंग, वर्ल्ड इंक, एफसीबी उल्का, परसेप्ट होल्डिंग्स, डिजाइन बॉक्स और क्रेयॉन कम्युनिकेशंस को ठेके दिए गए हैं। इसके अलावा कई मल्टीमीडिया क्रिएटिव एजेंसियों से भी कैंपेन का प्लान मंगाया गया है। कांग्रेस के इलेक्शन टीम के हमारे सूत्र ने बताया कि पिछले कुछ समय से 2-3 स्लोगन पर विचार चल रहा था। एक नारा था- “बहुत हुई जुमलों की मार, आओ बदलें मोदी सरकार”, दूसरा नारा था- बंदे में है दम, साथ चलेंगे हम। इनके लिए 2 राउंड की बैठकें भी हो चुकी थीं और कुछ ही दिन में नए नारे के साथ कैंपेन लॉन्च किया जाना था। लेकिन उससे पहले बीजेपी ने ‘मैं भी चौकीदार हूं’ नारा लॉन्च कर दिया, ऐसे में अब कांग्रेस को अपने पुराने नारे का बचाव करते रहना होगा या फिर कोई नया नारा ढूंढना होगा। अब तक जो नारे शॉर्टलिस्ट हुए हैं अब उनके अलावा कोई दूसरा नारा तलाशने को कह दिया गया है।

सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा नहीं

कांग्रेस पब्लिसिटी कमेटी का अध्यक्ष आनंद शर्मा पिछले कुछ समय से लगातार एजेंसियों के साथ बैठकें कर रहे थे। इनमें सबसे पहले वोटरों को प्रभावित करने वाले मुख्य मुद्दों की पहचान की गई। इसके लिए एजेंसियों से सर्वे करवाया गया। जो नतीजा आया उसके मुताबिक मोदी सरकार के खिलाफ जनता में नाराजगी का कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। लिहाजा यह तय किया गया कि भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के मुद्दे पर ही फोकस रखा जाएगा। लेकिन इन दोनों मुद्दों की छाप छोड़ने के लिए जरूरी है कि एक ऐसा नारा ढूंढा जाए जो असरदार हो। बीजेपी के कैंपेन के बाद कांग्रेस को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा है। क्योंकि कांग्रेस पार्टी के नेता यही सोचते रहे कि बीजेपी ‘मोदी है तो मुमकिन है’ के नारे के साथ चुनाव में जाएगी। जो हाल कांग्रेस का है वही सपा-बसपा और आम आदमी पार्टी का है। ये भी अभी तक नारा तय नहीं कर पाई हैं क्योंकि उनके पास भी कोई बड़ा मुद्दा नहीं है।

निगेटिव कैंपेनिंग में फंसे राहुल गांधी

गुजरात के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ‘विकास पागल हो गया है’ का नारा दिया था। इसके अलावा राहुल गांधी मंचों से जीएसटी को ‘गब्बर सिंह टैक्स’ बता रहे थे। लेकिन पार्टी को कोई फायदा नहीं हुआ। विज्ञापन के जानकारों की राय में ये सभी नेगेटिव कैंपेन हैं और बड़े चुनावों में नकारात्मक प्रचार से चर्चा भले मिल जाए, लेकिन वोट नहीं मिलते। अब ये देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस के रणनीतिकार आने वाले दिनों में कौन सा नया नारा चुनते हैं। फिलहाल तो वो एडवर्टाइजिंग और पब्लिसिटी एजेंसियों को दी गई मोटी फीस का हिसाब लगा रहे होंगे, क्योंकि अब तक गढ़े गए नारों से ‘मैं भी चौकीदार हूं’ का मुकाबला आसान नहीं होगा।

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