Loose Top

मोदी जी बीजेपी को संजू वर्मा जैसे ‘कांग्रेसी सोच’ वालों से बचाइए

ऐसे समय में जब देश को कांग्रेस-मुक्त करने की निर्णायक लड़ाई चल रही है, बीजेपी के अंदर बैठे कांग्रेसी मानसिकता वाले नेताओं ने सिर उठाना शुरू कर दिया है। इसी का एक नमूना सामने आया मुंबई में। जहां छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के बाहर हुए फुटओवर ब्रिज हादसे के बाद बीजेपी की एक तथाकथित नेता संजू वर्मा ने ऐसा बयान दिया जिसे सिर्फ और सिर्फ शर्मनाक कहा जा सकता है। टाइम्स नाऊ चैनल के कार्यक्रम में संजू वर्मा ने कहा कि “इस हादसे के लिए पैदल चलने वाले लोग जिम्मेदार हैं और यह एक प्राकृतिक आपदा है।” यह एक ऐसी सोच से उपजा बयान है जो आम तौर पर कांग्रेस या उसकी विचारधारा वाली पार्टियों के नेताओं में पाई जाती है। संजू वर्मा का अहंकार सातवें आसमान पर था और उन्होंने अपने मुंह से निकली बात पर खेद जताने के बजाय ये कहना शुरू कर दिया कि चैनल ने उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। जबकि उन्होंने जो कुछ कहा उसे सबने देखा और सुना। चैनल ने कार्यक्रम का वो हिस्सा भी जारी किया है जिसमें ये बेहूदी बयानबाजी वो कर रही हैं। हम आपको बताते हैं संजू वर्मा का एक मामूली निर्दलीय नेता से आम आदमी पार्टी की नेता बनने और फिर बीजेपी में जगह पा जाने की पूरी कहानी।

कौन हैं ‘बीजेपी नेता’ संजू वर्मा?

संजू वर्मा मुंबई की रहने वाली हैं और खुद को मुंबई बीजेपी की इंटेलेक्चुअल सेल की सह-संयोजक और प्रवक्ता बताती हैं। हालांकि वो ऐसे जताती हैं मानो बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता हों। आम तौर पर अंग्रेजी चैनलों पर वो बीजेपी का पक्ष रखने के लिए जाती हैं। वो खुद को अर्थशास्त्री भी घोषित करती हैं। हालांकि उनकी ताजा बयानबाजियों को देखते हुए अब इस बात पर संदेह होता है। ये बीजेपी की कुछ उन प्रवक्ताओं में से हैं जिन्हें न तो पार्टी की विचारधारा के बारे में कुछ पता है और न ही मुद्दों की कोई समझ है। इसके बजाय वो टीवी चैनलों पर चिल्ला-चिल्ला कर अपनी बात सही साबित करने की कोशिश करती हैं। ऐसा करते हुए वो बीजेपी का बचाव करने से ज्यादा उसकी जगहंसाई ही करवाती हैं। बताया जाता है कि संजू वर्मा के सिर पर महाराष्ट्र बीजेपी के एक कद्दावर नेता का हाथ है और उसी के संपर्कों का फायदा उठाते हुए उन्होंने महज 2-3 साल में पार्टी के अंदर अपनी जगह बना ली। संजू वर्मा का राजनीतिक इतिहास आप जानेंगे तो समझ जाएंगे कि वो सत्ता के लिए यहां हैं और जिस दिन बीजेपी के हाथ से सत्ता छिनी वो भी नया ठिकाना देख लेंगी।

2014 का चुनाव भी लड़ चुकी हैं

संजू वर्मा खुद को अर्थशास्त्री और प्रोफेशनल बताती हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा सामान्य से अधिक हैं। 2014 में उन्होंने मुंबई की नॉर्थ-सेंट्रल सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा था। उनकी नीयत यहां से खड़ी बीजेपी उम्मीदवार पूनम महाजन के वोट काटने की थी। इस चुनाव में संजू वर्मा को मात्र 626 वोट मिले थे और उनकी जमानत जब्त हो गई। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने आम आदमी पार्टी ज्वाइन की थी। संजू वर्मा के मीडिया में जबर्दस्त कनेक्शन हैं। इसका नतीजा है कि दो-कौड़ी की नेता होने के बावजूद उनकी खबरें हर जगह छपती थीं। उन्होंने आम आदमी पार्टी का टिकट पाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन अरविंद केजरीवाल ने टिकट किसी दूसरे नेता को थमा दिया। इससे निराश होकर उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा। तब संजू वर्मा ने अपनी ऐसी इमेज बनाने की कोशिश की मानो वो अपना बेहद सफल करियर छोड़कर राजनीति के माध्यम से जनता की सेवा करने के लिए आई हैं। उन दिनों वो अरविंद केजरीवाल की बहुत बड़ी फैन हुआ करती थीं। तब चुनावों में उन्होंने अपनी 10 करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति घोषित की थी।

मुंबई बीजेपी के एक नेता ने हमें बताया कि संजू वर्मा पहले कांग्रेस के नेताओं की भी करीबी रह चुकी हैं। अशोक चव्हाण के समय में वो कांग्रेस में घुसने की भी कई कोशिशें कर चुकी थीं। लेकिन पद या टिकट का कोई भरोसा नहीं मिलने के कारण उनकी कांग्रेस में एंट्री नहीं हो पाई। संजू वर्मा की ताजा बयानबाजी से यह सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी को ऐसे मौकापरस्तों को पार्टी में लेकर ऊंचे ओहदों तक पहुंचने देना चाहिए? नीचे आप टाइम्स नाऊ के उस कार्यक्रम का हिस्सा देख सकते हैं जहां पर संजू वर्मा ने शर्मनाक बयानबाजी की है।

संजू वर्मा ने ये बेहूदी बयानबाजी तब की जब खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ये बयान दे चुके थे कि अगर हादसा हुआ है तो गलती भी जरूर है। और इसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों को सजा होगी।

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।
एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:
Donate with

comments

Polls

क्या नरेंद्र मोदी सरकार इसी कार्यकाल में जनसंख्या कानून लाएगी?

View Results

Loading ... Loading ...

Popular This Week

Don`t copy text!