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सही कहा राहुल गांधी जी, सुकन्या देवी भी यूपी की थी!

राहुल गांधी ने चेन्नई के एक कॉलेज में छात्राओं को संबोधित करते हुए एक ऐसी बात कही जिससे यूपी और बिहार के लोगों के लिए उनके मन में छिपी सोच जाहिर हो गई। राहुल गांधी ने कहा कि “महिलाओं की स्थिति के मामले में दक्षिण भारत की स्थिति काफी अच्छी है। लेकिन अगर आप उत्तर भारत में जाएं… खास तौर पर यूपी और बिहार में आप वहां पर महिलाओं के लिए पुरुषों का बर्ताव देखकर हैरान रह जाएंगे।” (इस बयान का वीडियो आप नीचे देख सकते हैं) यह बयान इसलिए भी चिंता में डालने वाला है कि राहुल गांधी और उनके पूरे परिवार ने उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के समर्थन के दम पर ही करीब 70 साल देश पर राज किया। इतने सालों में देशभर में यूपी-बिहार वालों को पहले ही काफी बदनाम किया गया है, अब राहुल गांधी जैसे नेता के मुंह से निकले ऐसे बयानों से इस सोच को और भी हवा मिलेगी कि यूपी-बिहार वाले असभ्य होते हैं और उन्हें महिलाओं से तमीज से पेश आना नहीं आता। इस बयान के पीछे राहुल गांधी की एक मंशा देश में उत्तर-दक्षिण के बीच बंटवारे को हवा देना भी था। ऐसा करना कांग्रेस की राजनीति को हमेशा भाता रहा है। लेकिन इस पूरे मामले ने यूपी के अमेठी में सुकन्या देवी कांड की तरफ फिर से ध्यान खींच दिया है, जो आज तक देश के लोगों के लिए एक रहस्य बना हुआ है। सवाल यह है कि क्या यूपी-बिहार में हुए सुकन्या देवी केस का सच कभी सामने आ पाएगा?

क्या है सुकन्या देवी गुमशुदगी केस?

दरअसल ये एक ऐसा रहस्यमय मामला है जिसके बारे में कोई भी खुलकर बात करने को तैयार नहीं होता। कुछ साल पहले सोशल मीडिया के जरिए सुकन्या देवी का मामला सार्वजनिक हो गया था। यह केस सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन अखबारों और चैनलों ने इस खबर पर पूरी तरह सेंसर कर रखा है। लिहाजा लोगों को इस बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चल पाया। कांग्रेस के नेता कहते हैं कि राहुल गांधी को इस मामले में कोर्ट से क्लीनचिट मिल चुकी है लेकिन तकनीकी रूप से देखें तो यह दावा गलत है। यह बात समझने के लिए आपको पूरे मामले की विस्तार से जानकारी रखनी होगी। दरअसल, 2007 की शुरुआत में इंटरनेट पर प्राइवेट ब्लॉग्स के जरिए कई लोगों ने राहुल गांधी पर आरोप लगाए। इनमें कहा गया था कि 3 दिसंबर 2006 की रात को अमेठी के सर्किट हाउस में राहुल गांधी और उनके कुछ दोस्तों ने एक स्थानीय कांग्रेसी नेता की बेटी सुकन्या देवी के साथ कुछ ‘गैर-कानूनी कृत्य’ किया। इनमें दावा किया गया था कि लड़की और उसके परिवार ने दिल्ली आकर सोनिया गांधी से शिकायत की, लेकिन उसके बाद से पूरा परिवार गायब है। उस वक्त उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। इस दौरान मीडिया और दूसरे तमाम माध्यमों पर इस मसले का कोई जिक्र तक नहीं मिलता है। ऐसे दावे किए जाते हैं कि उस दौर में तमाम चैनलों और अखबारों को इस मामले से दूर रहने की सख्त नसीहत दी गई थी।

सपा नेता की पहल पर खुला मामला

मार्च 2011 में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक अर्जी देकर आरोपों की जांच और सुकन्या देवी और उसके परिवार का पता लगाने की याचिका डाल दी। पहली नजर में इस मामले को तथ्यपूर्ण पाए जाने के बाद एक जज की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार, यूपी पुलिस और राहुल गांधी को नोटिस जारी किया। लोकल अखबारों में ये खबर छपी, लेकिन दिल्ली के न्यूज चैनलों ने अब भी चुप्पी साधे रखी। याचिका में समाजवादी पार्टी के नेता ने दावा किया था कि वो खुद सुकन्या देवी के गांव गए थे और पाया कि घर पर कोई नहीं है। गांववालों को कुछ पता नहीं था कि परिवार अचानक कहां गायब हो गया। इससे भी हैरानी वाली घटना तब हुई जब दो दिन बाद ही कृति सिंह नाम की एक लड़की सामने आई और उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट की ही एक अन्य बेंच में अर्जी डालकर कहा कि मैं ही सुकन्या देवी हूं और याचिकाकर्ता किशोर समरीते के खिलाफ जांच की जाए। उसका आरोप था कि किशोर समरीते ने उसके चरित्र हनन के मकसद से कोर्ट में याचिका दी है। इस मामले में किशोर समरीते का पक्ष पूछे बगैर ही जज ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। ये आदेश उन सभी ब्लॉग्स के खिलाफ था जिन पर इस मामले से जुड़ी कहानियां छापी गई थीं। पता करने को कहा गया कि इन रिपोर्ट्स को छपवाने के पीछे क्या साजिश है। अदालत ने किशोर समरीते पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोंक दिया। इस आदेश का नतीजा यह हुआ कि पहली बेंच का राहुल गांधी को भेजा गया नोटिस अपने आप ही अमान्य हो गया।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा सुकन्या केस

याचिकाकर्ता किशोर समरीते ने डिवीजन बेंच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने डिवीजन बेंच के फैसले पर रोक लगा दी और 2012 में केस की सुनवाई शुरू हुई। लेकिन अचानक किशोर समरीते ने आरोप वापस ले लिए और कहा कि मेरे पास निजी तौर पर घटना की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि मैंने याचिका समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव के कहने पर डाली थी। उन्होंने यहां तक कहा कि याचिका डालने का फैसला दिल्ली में मुलायम सिंह यादव के घर पर हुआ था। राहुल गांधी के वकील के तौर पर पीपी राव कोर्ट में हाजिर हुए थे और उन्होंने तीन दिन तक जिरह किया था। उनका जोर इस बात पर था कि शिकायत एक राजनीतिक साजिश के तहत डलवाई गई है, ताकि राहुल गांधी को राजनीति में आगे बढ़ने से रोका जा सके। अक्टूबर 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने किशोर समरीते की याचिका को खारिज कर दिया और इसे राजनीतिक साजिश मानते हुए याचिकाकर्ता पर 10 लाख का जुर्माना लगा दिया। कुछ दिन पहले वेबसाइट pgurus.com ने इस मामले के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसके मुताबिक सुकन्या मामले में कुछ सवाल आज भी बने हुए हैं:

सवाल नंबर-1 कोर्ट के फैसले से यह साफ नहीं हुआ कि किशोर समरीते ने सुप्रीम कोर्ट में यू-टर्न क्यों ले लिया?

सवाल नंबर-2 अगर ये मुलायम सिंह और अखिलेश यादव की साजिश थी तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

सवाल नंबर-3 दोनों नेताओं ने कभी इस मामले पर एक भी शब्द क्यों नहीं बोला?

सवाल नंबर-4 2017 में यूपी चुनाव से ठीक पहले राहुल गांधी ने उन्हीं अखिलेश यादव से दोस्ती क्यों कर ली, जिन्होंने कभी उनके खिलाफ इतनी घिनौनी साजिश रची थी?

सवाल नंबर-5 अगर हम मान भी लें कि आरोप राजनीतिक साजिश के तहत लगाए गए थे तो सुकन्या देवी और उसका पूरा परिवार कहां गया? क्या उन्हें तलाशने की कोई कोशिश हुई?

सुकन्या देवी से जुड़े कानूनी पहलुओं पर हमने जो भी जानकारी दी है वो pgurus.com वेबसाइट में छपे तथ्यों को आधार बनाते हुए दी है। लिहाजा इससे जुड़े किसी भी स्पष्टीकरण के लिए उनसे ही संपर्क करें। हम इस केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को न्यायसंगत मानते हैं और उस पर सवाल खड़े करने की हमारी कोई मंशा नहीं है। यह सवाल भी उठता है कि जब राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट से इस केस में बरी हुए थे तो उन्होंने न्यायपालिका पर आस्था जताई थी, लेकिन जब इसी सुप्रीम कोर्ट ने राफेल जैसे मामलों में उनके आरोपों को गलत ठहराया तो उन्होंने अदालत को ही कठघरे में खड़ा करना क्यों शुरू कर दिया?

राहुल के बयान में कोई सच्चाई नहीं

राहुल गांधी ने कहा कि दक्षिण भारत में महिलाओं की स्थिति उत्तर से बेहतर है। लेकिन आंकड़ों की नजर से देखें तो सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। राहुल गांधी ने खास तौर पर बिहार का जिक्र किया था, जो बलात्कार के मामले में कई दक्षिण भारतीय राज्यों से पीछे है। 2016 के आंकड़ों के मुताबिक बिहार का स्थान कर्नाटक, केरल, तेलंगाना जैसे राज्यों के बहुत बाद आता है। जहां तक उत्तर प्रदेश की बात है आबादी के अनुपात के हिसाब से देखें तो उत्तर प्रदेश भी कई दक्षिण भारतीय राज्यों से बेहतर स्थिति में है। यह सही बात है कि महिलाओं पर अत्याचार के मामले में पूरे देश में तस्वीर बहुत अच्छी नहीं है। लेकिन इस आधार पर उत्तर और दक्षिण का बंटवारा करने के पीछे क्या नीयत है? कहीं ऐसा तो नहीं कि वो चेन्नई में तालियां बटोरने के लिए यूपी बिहार के लोगों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे थे?

नीचे आप राहुल गांधी का वो वीडियो देख सकते हैं जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उत्तर भारत खासतौर पर यूपी और बिहार में महिलाओं के खिलाफ बहुत बुरा बर्ताव होता है।

राहुल गांधी के इस बेवकूफी भरे बयान पर पूरे देश में प्रतिक्रिया हो रही है। कई दक्षिण भारतीयों ने भी इस मामले पर राहुल गांधी के बचकाने रवैये का विरोध किया है।

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