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जो अकबर न कर सका कांग्रेस ने किया, कुंभलगढ़ किले में ‘नमाज़’!

कांग्रेस पार्टी का इस्लामी चरित्र एक बार फिर से सामने आ गया है। मामला है राजस्थान के मशहूर कुंभलगढ़ किले का, जहां पर अशोक गहलोत सरकार ने मुसलमानों के धार्मिक कार्यक्रम इज्तेमा की इजाज़त दी। इस मौके पर हजारों की तादाद में मुसलमान कुंभलगढ़ किले में जुटने की खबरें थीं। सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम का एक पोस्टर सामने आया है, जिसके आधार पर यह दावा किया जा रहा है। कुछ न्यूज वेबसाइटों ने भी इन दावों की पुष्टि की है। हमने जब इस बारे में दिल्ली में राजस्थान सरकार के अधिकारियों से बात की तो कोई भी इस बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ। जब हमने इस बारे में स्थानीय लोगों से संपर्क किया तो उनका कहना था कि यह कार्यक्रम अब रद्द कर दिया गया है। हालांकि लोग इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि राजपूताना गौरव के प्रतीक इस किले को इस तरह से इस्लामी गतिविधियों के लिए देने के पीछे राजस्थान की कांग्रेस सरकार की नीयत क्या थी? यह बात भी सामने आ रही है कि सत्ता में आने के बाद से ही कांग्रेस सरकार लगातार राजस्थान में मुस्लिम तुष्टिकरण में जुटी हुई है। इन्हीं कोशिशों के तहत हिंदू प्रतीकों को अपमानित करने और मुस्लिम गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम जोरशोर से चल रहा है।

क्या है कुंभलगढ़ में नमाज का मामला?

कुंभलगढ़ इलाके में छपे पोस्टरों के मुताबिक 12 मार्च दिन मंगलवार को किले के अंदर इस्लामी धार्मिक कार्यक्रम इज्तेमा का आयोजन तय था। इसमें आसपास के जिलों से हजारों मुसलमानों के पहुंचने की अपील की गई थी। जैसा कि आम तौर पर होता है ऐसे मामलों में मीडिया एक रहस्यमय चुप्पी साध लेता है। राजस्थान के किसी भी बड़े अखबार या चैनल ने इस बारे में एक शब्द भी नहीं पूछा कि एएसआई के संरक्षित इस ऐतिहासिक किले में इतने बड़े आयोजन की इजाज़त देने के पीछे मंशा क्या है? हालांकि खबर सोशल मीडिया पर आ गई और लोगों ने दबाव बनाया जिसके कारण आयोजकों और कांग्रेस सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े। फेसबुक और ट्विटर पर हजारों लोगों ने इस मुद्दे पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को टैग करके अपनी नाराजगी जताई। इस विरोध को देखते ही स्थानीय प्रशासन को भी लग रहा था कि अगर कार्यक्रम स्थगित नहीं किया गया तो कानून-व्यवस्था की दिक्कत पैदा हो सकती है।

करणी सेना ने मामले पर साधी चुप्पी

कुंभलगढ़ का मामला सोशल मीडिया पर आने के बावजूद कथित तौर पर राजपूतों के सम्मान की लड़ाई लड़ने वाली करणी सेना ने चुप्पी साधे रखी। संगठन के किसी भी नेता ने इस मामले में एक शब्द नहीं बोला। इससे यह शक जा रहा है कि राजस्थान सरकार ने इस मामले में करणी सेना के नेताओं को विश्वास में ले रखा था। फिल्म पद्मावती और एक गैंगस्टर के एनकाउंटर के मुद्दे पर आसमान सिर पर उठा लेने वाला ये संगठन हमेशा से कांग्रेस का करीबी रहा है, ताजा घटनाक्रम से यह बात एक बार फिर से साबित हो गई है। इससे पहले राजस्थान विधानसभा चुनावों में करणी सेना के तमाम घटकों ने खुलकर कांग्रेस के लिए प्रचार किया था। ऐसे में सोशल मीडिया पर यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि राजपूतों के सम्मान की बात करने वाली करणी सेना इस मामले में चुप क्यों है? क्या महाराणा प्रताप के इस किले में नमाज पढ़ा जाना राजपूताना का अपमान नहीं है?

क्या है कुंभलगढ़ किले का इतिहास

इस किले का निर्माण 15वी सदी में राजा राणा कुंभा ने करवाया था। यह मेवाड़ किला बनास नदी के किनारे पर बना है। पर्यटक बड़ी संख्या में इस किले को देखने आते हैं क्योंकि यह किला राजस्थान का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण किला है। यह किला 13 गढ़, बुर्ज और पर्यवेक्षण मीनारों से घिरा हुआ है। कुम्भलगढ़ किला अरावली की पहाड़ियों में 36 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। इसमें महाराणा फ़तेह सिंह का बनवाया एक गुंबददार महल भी है। लंबी घुमावदार दीवार दुश्मनों से रक्षा के लिए बनवाई गई थी। ऐसा माना जाता है कि लंबाई के मामले में इसका स्थान चीन की दीवार के बाद दूसरा है। इस किले में सात बड़े दरवाजे हैं। इनमें से सबसे बड़ा राम पोल के नाम से जाना जाता है। किले के अंदर कई प्राचीन मंदिर बने हुए हैं। ये सभी मंदिर मुगलों से राजपूताना संघर्ष का गवाह हैं। ऐसे में कुंभलगढ़ किले की परंपरा से छेड़खानी की कांग्रेस सरकार की ये कोशिश एक बड़े खतरे की तरफ भी इशारा कर रही है।

नीचे आप वो पोस्टर देख सकते हैं जिले पूरे इलाके में चिपकाया गया है।

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