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इमरान ख़ान + मसूद अज़हर = इमरान मसूद, कांग्रेस का नेता

लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों की पहली लिस्ट सामने आ गई है। इसमें जो नाम खास तौर पर गौर करने वाला है वो है सहारनपुर से उम्मीदवार इमरान मसूद का नाम। पहली लिस्ट की खासियत है कि इसमें उन नेताओं के नाम शामिल हैं जिनकी सीट लगभग तय ही मानी जाती है, जैसे रायबरेली से सोनिया गांधी, अमेठी से राहुल गांधी। लेकिन इन नामों के बीच इमरान मसूद का नाम हैरतअंगेज इसलिए भी है क्योंकि इमरान मसूद कट्टरपंथी मुसलमान हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इमरान मसूद की सभा का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वो नरेंद्र मोदी की बोटी-बोटी काटने की धमकी दे रहे हैं। यह वीडियो सामने आने के बाद काफी हंगामा मचा था लेकिन कांग्रेस ने अपने इस कट्टरपंथी नेता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। ये वो समय था जब कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति पर चला करती थी, अब जब कांग्रेस ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राह पर चलने का दावा कर रही है पहली ही लिस्ट में इमरान मसूद जैसे नेता का नाम कई सवाल खड़े कर रहा है। ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर बमबारी के मामले में कांग्रेस ने लगातार ऐसी नीति अपनाई, जिससे इमरान खान और आतंकियों से सहानुभूति रखने वालों के बीच एक अच्छा मैसेज जाए। कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस दोबारा अपनी कट्टरपंथी मुस्लिम और ईसाई पार्टी वाली छवि पर लौटना चाहती है?

कांग्रेस के लिए क्यों खास इमरान मसूद

यह सवाल उठ रहा है कि इमरान मसूद में ऐसी क्या खासियत है कि पहली ही लिस्ट में उनका नाम फाइनल हो गया? पश्चिमी यूपी से इमरान मसूद की एक नेता के तौर पर कुछ खास हैसियत नहीं है। उनके पिता रशीद मसूद कांग्रेस पार्टी से राज्यसभा सांसद थे। वो सहारनपुर से ही 5 बार जनता पार्टी, जनता दल और समाजवादी पार्टी के टिकटों पर सासंद रहे। 2013 में भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें 4 साल की सजा हुई और इसके बाद उनकी राज्यसभा की सदस्यता भी चली गई। बेटे इमरान मसूद ने उनकी विरासत संभाली और जुबान से ज़हर उगलना शुरू कर दिया। ‘मोदी की बोटी-बोटी काट दूंगा’ वाले बयान के बाद वो पहली बार कांग्रेस हाईकमान की नजरों में आए। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट भी मिला लेकिन हार गए। इससे पहले 2012 और बाद में 2017 में इमरान मसूद विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं, लेकिन एक भी चुनाव वो नहीं जीत सके। इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का उपाध्यक्ष बना दिया। उपाध्यक्ष रहते हुए भी इमरान मसूद कुछ खास कमाल नहीं कर सके और लखनऊ या दिल्ली के बजाय सहारनपुर में ही सक्रिय रहे। हालांकि इस दौरान वो यूपी में राहुल गांधी के कार्यक्रमों में कभी-कभार पीछे दिखाई देते रहे।

मसूदों के बीच फंसी कांग्रेस की रणनीति

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मसूद अज़हर और इमरान मसूद पर कांग्रेस पार्टी का रुख इस ओर इशारा करता है कि सॉफ्ट हिंदुत्व एक चुनावी पैतरे से ज्यादा कुछ नहीं था। ऐसे में इमरान मसूद का नाम एक प्रतीक की तरह है जिसमें इमरान खान और मसूद अज़हर दोनों की छवि सामने आती है। कांग्रेस जिस तरह से मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति पर चल रही है उसमें इमरान मसूद जैसे नेता उसके लिए बिल्कुल फिट बैठते हैं। राजनीतिक जानकारों की राय में “कांग्रेस पार्टी को यह लगने लगा है कि पिछले 2 साल में ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की जो पॉलिसी उसने अपनाई उससे मुसलमान दूर हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि ऐसे चेहरे सामने लाए जिससे पूरे समुदाय में एक भरोसा पैदा हो।” पहली ही लिस्ट में इमरान मसूद का नाम डालकर कांग्रेस ने साफ तौर पर यही कोशिश की है। दरअसल कांग्रेस ये काम पिछले कुछ समय से कर रही है। इसी रणनीति के तहत पुलवामा हमले के बाद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतंकी के लिए ‘सो-कॉल्ड टेररिस्ट’ यानी ‘तथाकथित आतंकवादी’ शब्द का प्रयोग किया था। इसके बाद पार्टी के नेताओं ने हर वो बयानबाजी की जिससे वो ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की अपनी इमेज को थोड़ा बैलेंस कर सके। इसी कड़ी में इमरान मसूद का नाम आया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में वो हाईकमान की शह पर ऐसी बयानबाजियां कर सकते हैं जिससे पूरे यूपी में मुसलमानों को कांग्रेस की तरफ वापस खींचा जा सके।

देखिए इमरान मसूद का वो चर्चित वीडियो, जिसके कारण वो राहुल गांधी की नज़रों में आए:

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