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‘चीन के दबाव में कांग्रेस ने नहीं खरीदा था राफेल’, बड़ा खुलासा

बायीं तस्वीर राफेल लड़ाकू विमान की है, जबकि दायीं तरफ एके एंटनी की तस्वीर है।

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई देश कौन से हथियार खरीदे और कौन से न खरीदे, इसका फैसला उसका दुश्मन देश करे? केंद्र की पिछली यूपीए सरकार में कुछ ऐसा ही हुआ है। यह बात करीब-करीब साफ होती जा रही है कि 10 साल तक कांग्रेस सरकार इसलिए राफेल का सौदा नहीं कर पाई क्योंकि उस पर चीन का भारी दबाव था। तब के रक्षा मंत्री और सीनियर कांग्रेस नेता एके एंटनी ने राफेल सौदे को लेकर जो बयान दिया है उससे यह बात साफतौर पर झलक रही है। दरअसल एके एंटनी ने कहा है कि उनकी सरकार ने ‘राष्ट्रीय हित’ को देखते हुए राफेल की खरीदारी में देरी की। एंटनी ने यह साफ नहीं किया कि एक दशक से भी ज्यादा समय से देश की सेनाओं को नए और हाइटेक लड़ाकू विमान की जरूरत है, तो फिर इसकी खरीदारी में देरी करने के पीछे क्या ‘राष्ट्रीय हित’ था? इस सवाल का जवाब रक्षा मंत्रालय के एक बड़े रिटायर्ड अधिकारी ने न्यूज़लूज़ से बातचीत में दिया, जिसे हम सिलसिलेवार ढंग से आपके सामने रख रहे हैं। यह भी पढ़ें: क्या गांधी परिवार के इशारे पर धमकियां दे रहा है चीन

राफेल में चीन ने कैसे डाला अड़ंगा?

एके एंटनी ने अपने ताजा बयान में साफ-साफ कहा है कि उन्होंने ‘राष्ट्रीय हित’ को देखते हुए राफेल सौदे को लटकाया। समझना मुश्किल नहीं है कि वो ‘राष्ट्रीय हित’ क्या था। दरअसल जुलाई 2013 में एके एंटनी चीन के दौरे पर गए थे। ये वो समय था जब 126 राफेल विमानों की खरीद की प्रक्रिया बहुत तेजी से आगे बढ़ रही थी। तब यह माना जा रहा था कि 2013 के अंत तक सौदे पर दस्तखत हो जाएंगे। ऐसा होने पर 2017 तक राफेल विमानों की पहली खेप भारत पहुंचना तय था। लेकिन एके एंटनी के चीन से लौटते ही माहौल पूरी तरह बदल गया। वो इस मामले में आनाकानी करने लग गए और डेसॉल्ट कंपनी से होने वाली बातचीत में भारतीय पक्ष का रवैया बेहद अड़ियल हो गया। राफेल बनाने वाली कंपनी डेसॉल्ट ने जब यूपीए सरकार से इस बात कि गारंटी मांगी कि चुनाव के बाद अगर कोई दूसरी पार्टी सत्ता में आती है तो भी सौदे की प्रक्रिया जारी रहेगी तो एके एंटनी ने साफ मना कर दिया। जबकि हथियार सौदों में ऐसी गारंटी आम बात होती है। क्योंकि कंपनियां किसी सरकार से नहीं, बल्कि देश के साथ डील करती हैं। ऐसी टाल-मटोल नतीजा हुआ कि छह महीने से अधिक बीत गए और सौदे पर कोई प्रगति नहीं हुई। फरवरी 2014 में जब मीडिया ने एके एंटनी से इस बारे में पूछा तो उन्होंने ये कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि हमारी सरकार के पास इतने पैसे ही नहीं हैं कि राफेल विमान खरीदा जा सके। यानी यूपीए सरकार ने 126 विमान खरीदने का प्रॉसेस बिना ये सोचे ही शुरू कर लिया था कि उसके पास पैसे हैं भी या नहीं। हमारे सूत्र ने बताया कि एके एंटनी के इस रवैये के पीछे 2 बड़ी वजहें थीं। पहला, चीन का दबाव और दूसरा, डेसॉल्ट कंपनी की तरफ से ‘एक परिवार’ को कम से कम 10 फीसदी का कमीशन देने के लिए राजी न होना। दरअसल विमान सौदे में डेसॉल्ट ने सबसे कम की बोली लगाई थी। कंपनी की दलील थी कि इतनी कीमत पर वो राफेल विमान तो दे सकती है, लेकिन ‘परिवार’ को कमीशन देना संभव नहीं होगा। अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में सामने आ चुका है कि 10 परसेंट का कमीशन मांगने वाला ये परिवार कौन था। यह भी पढ़ें: तो चीन के कहने पर राफेल का दाम पूछ रहे हैं राहुल गांधी?

राफेल विमान से क्यों डरता है चीन?

करगिल युद्ध के बाद यह बात सामने आई थी कि अगर भारत के पास आधुनिक लड़ाकू विमान होते तो हमारे इतने जवानों और अफसरों की जान न जाती। 1999 में वाजपेयी के समय इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। ये वो समय था जब अमेरिका अपने F16 लड़ाकू विमान पाकिस्तान को दे रहा था। चीन के पास उसके अपने अत्याधुनिक विमानों चेंगदू (Chengdu) का जखीरा था। रूस से सुखोई विमान खरीदे जा सकते थे, लेकिन यह महसूस किया जा रहा था कि रूस पर एक सीमा से ज्यादा आश्रित होना रणनीतिक रूप से ठीक नहीं होगा। क्योंकि अब तक भारत के ज्यादातर लड़ाकू विमान रूस के ही थे और उन्हें लेकर कोई बहुत अच्छा अनुभव नहीं रहा। सुखोई के साथ दिक्कत यह भी थी कि वो चीन की सीमा से लगे ऊंचे पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने की क्षमता नहीं रखता। फ्रांस की कंपनी डेसॉल्ट का राफेल लड़ाकू विमान भारत की जरूरतों के लिहाज से हर तरीके से सही था। ये विमान भारत की सीमा में रहते हुए दुश्मन देश के अंदर 300 किलोमीटर तक हमला कर सकता है। यानी विमान को लेकर दुश्मन देश के अंदर जाने की जरूरत ही नहीं। इसके आगे अगर वार करना हो तो मिसाइल की टेक्नोलॉजी पहले से ही उपलब्ध है। राफेल की यही खूबी चीन को परेशान करती रही है। चीन की रणनीति हमेशा यह रही है कि भारत अपनी युद्ध की तैयारी पाकिस्तान को ध्यान में रखते हुए करे न कि चीन को। यही कारण है कि उसने राफेल सौदे को रुकवाने की कोशिश शुरू कर दी। पहले 10 साल तक कांग्रेस ने ये सौदा नहीं होने दिया। जब मोदी सरकार ने आने के बाद ये सौदा कर लिया तो चीन की शह पर ही कांग्रेस अब इसमें घोटाले के आरोप लगा रही है। राफेल के अलावा जर्मनी की यूरोफाइटर कंपनी के ‘टाइफून’ विमान पर भी विचार हुआ था।

राफेल में एटम बम हमले की ताकत

मोदी सरकार ने फ्रांस की सरकार के साथ राफेल की जो डील की है उसमें विमान की खूबियों की जानकारी छिपा ली गई। इसके कारण ही चीन का यह शक मजबूत हो गया कि राफेल विमान में एटम बम दागने की क्षमता है। सितंबर 2016 में मोदी सरकार और फ्रांस के बीच 36 राफेल विमानों की खरीद पर दस्तखत हुए। इसके बाद चीन अपने खुफिया तरीकों से इस सौदे की डीटेल्स जानने में जुट गया। जैसे ही उसकी यह जानकारी पक्की हो गई उसने इस सौदे को रद्द कराने के लिए कोशिशें शुरू कर दीं। आपको याद होगा कि जुलाई 2017 में राहुल गांधी रात के अंधेरे में चोरी-छिपे चीन के दूतावास गए थे। कांग्रेस पार्टी ने पहले इसका खंडन किया, लेकिन जब तस्वीरें भी सामने आ गईं तो उसे मुलाकात की बात कबूलनी पड़ी। 1999 में जब पहली बार राफेल विमानों पर विचार शुरू हुआ था चीन तभी से इस सौदे पर नज़र टिकाए हुए था। इस बारे में 1999 में इंडिया टुडे पत्रिका ने एक लेख भी छापा था कि चीन इस बात से बेहद परेशान है कि भारत कहीं राफेल विमान न खरीद ले। उसे रूस या अमेरिका से लड़ाकू विमान खरीदे जाने से कोई दिक्कत नहीं है। इंडिया टुडे पत्रिका ने तब चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपे लेख के हवाले से बताया था कि चीन नहीं चाहता कि भारत राफेल विमान खरीदे। केंद्र में जब तक यूपीए की सरकार रही चीन ने इस सौदे में टांग अड़ाए रखा। अब जब मोदी सरकार आ चुकी है चीन अब भी कांग्रेस पार्टी के जरिए हरसंभव कोशिश में है कि राफेल सौदा न होने पाए। यह भी पढ़ें: कहीं इसलिए तो चीन के राजदूत से नहीं मिले थे राहुल गांधी?

यह भी पढ़ें: चीन के राजदूत से क्यों चोरी-छिपे मिले राहुल गांधी?

(सुदर्शन भारती की रिपोर्ट)

Sources:

1. https://indianexpress.com/article/india/india-others/no-money-this-fiscal-for-rafale-jets-a-k-antony/

2. https://www.rediff.com/news/report/what-guarantee-france-wont-get-one-for-rafale-deal/20140330.htm

3. https://www.financialexpress.com/archive/rafale-fighter-jet-deal-deferred-no-money-left-shocks-a-k-antony/1223812/

4. https://www.indiatoday.in/world/story/india-may-deploy-n-capable-rafale-jets-on-china-pak-borders-344180-1999-11-30

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