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टॉप-5 भारतीय नेता जो पाकिस्तान में ज्यादा पॉपुलर हैं!

भारत के हजारों साल के इतिहास में एक से बढ़कर एक महान विभूतियों और महापुरुषों का जिक्र आता है, लेकिन इन सबके साथ उन गद्दारों का भी नाम आता है जिनके कारण यहां के लोगों को हमेशा कष्ट भोगने को मजबूर होना पड़ा। रानी पद्मावती के समय उनके ही दरबारी राघव चेतन से लेकर जयचंद की कहानी इसी का उदाहरण है। देश जब अंग्रेजों का गुलाम बना तब भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग थे, जिन्होंने अपनी निष्ठा चंद पैसों के लिए अंग्रेजों के हाथों गिरवी रख दी थी। बाद के समय में यही काम कांग्रेस पार्टी ने शुरू कर दिया। अब जब देश पाकिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक युद्ध लड़ रहा है, हमारे देश के अंदर से ही ऐसी आवाजें उठ रही हैं, जिनसे कहीं न कहीं पाकिस्तान और उसके पाले पोसे आतंकवादियों को फायदा पहुंचता है। पाकिस्तान की बोली बोलने वाले इन नेताओं की लोकप्रियता आज अपने देश से ज्यादा पाकिस्तान में है।

नंबर-1 ममता बनर्जी

उरी हमले के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक के समय जिस तरह से सबूत मांगने को लेकर हो-हल्ला मचाया गया था, इस बार उसकी शुरुआत ममता बनर्जी ने की है। वो पहली बड़ी नेता हैं, जिन्होंने ऑपरेशन बालाकोट को झूठ ठहराने की कोशिश की। ममता ने यह भी कहा कि इस हमले में पाकिस्तान के कितने लोग मारे गए और मरने वालों में कौन लोग थे? सरकार को इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। इतना ही नहीं बंगाल की सीएम यहां तक कह गईं कि ‘हम सब को अपने देश से प्यार है, लेकिन हम चुनावी राजनीति के नाम पर अपनी सेना के जवानों को कुर्बान नहीं कर सकते।’ ममता के इस बयान का नतीजा यह रहा कि पाकिस्तानी मीडिया ने उनके बयान को हाथों हाथ लिया। यहां तक कि एक पाकिस्तानी चैनल ने यहां तक कह डाला कि ममता बनर्जी को ही भारत का अगला प्रधानमंत्री बनाया जाना चाहिए। इस चैनल ने भारत के मुसलमानों से अपील की कि वो ममता बनर्जी को वोट देकर उन्हें पीएम पद तक पहुंचाएं।

नंबर-2 अरविंद केजरीवाल

जब भी बात देश को नीचा दिखाने और अपमानित करने की आती है अरविंद केजरीवाल का नाम खुद ही जुबान पर आ जाता है। अरविंद केजरीवाल ने 28 फरवरी को दिल्ली विधानसभा में एक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने एक तरह से आरोप लगाया कि पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हमला पीएम नरेंद्र मोदी ने करवाया है। केजरीवाल के भाषण से साफ लग रहा था कि वो बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर पर हुए हमले से बहुत भड़के हुए हैं। उन्होंने पीएम मोदी पर चुनाव जीतने के लिए ‘बेगुनाहों’ का खून बहाने का आरोप मढ़ दिया। सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान में वायुसेना की कार्रवाई में जो आतंकी मारे गए हैं क्या केजरीवाल उनको ‘बेगुनाह’ मानते हैं। वैसे भी केजरीवाल का चरित्र हमेशा से संदिग्ध रहा है। न्यूज़लूज़ पर हमने कुछ समय पहले ये खुलासा किया था कि वो जब भी कोई देशद्रोही बयानबाजी करते हैं तो उनकी पार्टी को खाड़ी देशों के रास्ते पाकिस्तान से मिलने वाला चंदा बढ़ जाता है। पिछली सर्जिकल ऑपरेशन के समय केजरीवाल ने सबसे पहले सबूत मांगने शुरू किए थे। तब न्यूज़लूज पर हमने खुलासा किया था कि केजरीवाल के उस बयान के बाद केजरीवाल के पार्टी फंड में पाकिस्तानियों ने करोड़ों रुपये चंदा जमा कराया था। पढ़ें: जानिए क्यों पाकिस्तान की बोली बोल रहे हैं केजरीवाल

नंबर-3 राहुल गांधी

जिस दिन भारत ने बालाकोट में जैशे-ए-मोहम्मद के ठिकाने पर हमला किया, पाकिस्तान से ज्यादा बौखलाहट कांग्रेस पार्टी में देखने को मिली। राहुल गांधी ने इसके लिए ट्वीट करके ‘एयरफोर्स के पायलटों’ को बधाई दी, सेना या सरकार को नहीं। 26 फरवरी को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सर्वदलीय बैठक करके बालाकोट ऑपरेशन की जानकारी सभी दलों के नेताओं को दी। लेकिन अगले ही दिन राहुल गांधी ने ये कहते हुए सभी दलों की एक और बैठक बुला ली कि सरकार सर्वदलीय बैठक नहीं बुला रही। जब पूछा गया कि एक दिन पहले जो हुई थी वो क्या थी? तो कांग्रेस नेताओं ने यह दलील देनी शुरू कर दी कि प्रधानमंत्री मोदी को सर्वदलीय बैठक करनी चाहिए। खैर राहुल गांधी समेत पूरे विपक्ष की ये पैंतरेबाजी पाकिस्तानी लोगों को बेहद पसंद आई। वहां की मीडिया ने राहुल गांधी और दूसरे नेताओं के बयान जमकर दिखाए।

नंबर-4 नवजोत सिद्धू

अक्सर लोग कहते हैं कि बीजेपी से कांग्रेस में जाने के बाद लगता है सिद्धू को कुछ हो गया है। कभी देशप्रेम और स्वाभिमान की बातें करने वाले नवजोत सिद्धू इन दिनों अपने पाकिस्तान प्रेम के लिए मशहूर हैं। पुलवामा हमले के बाद जब पूरे देश में गुस्सा था तो नवजोत सिद्धू वो पहले नेता थे जो पाकिस्तान के बचाव में सामने आए और कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म या देश नहीं होता। यानी एक तरफ देश पाकिस्तान के भेजे आतंकवादियों से परेशान है और दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के ये नेता उसे क्लीनचिट देने में जुटे थे। बताया जाता है कि खुद राहुल गांधी ने सिद्धू से यह बयान दिलवाया था ताकि देश के मुसलमानों में कांग्रेस पार्टी पर भरोसा मना रहे। उनका ये बयान पाकिस्तानी चैनलों पर खूब छाया रहा।

नंबर-4 रामजी लाल सुमन

पाकिस्तान पर हमले के बाद जहां सारा देश सेना की कार्रवाई पर जश्न मना रहा हैं, वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन ने कार्रवाई को कठघरे में खड़ा कर बेतुके सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से पूछा कि बदले की कार्रवाई में कितने आतंकी मारे गए हैं, उनकी लाशें कहां हैं? माना जाता है कि रामजी लाल सुमन ने ये बयान समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव के इशारे पर दिया था। ताकि चुनाव के दौरान कट्टरपंथी मुसलमानों का समर्थन पा सकें।

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