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जिनेवा संधि नहीं, इस कारण अभिनंदन को छोड़ने को मजबूर हुआ पाक

पाकिस्तान के एफ 16 लड़ाकू विमान का पीछा करके उसे मार गिराने वाले पायलट अभिनंदन वर्तमान को छोड़ने के पाकिस्तान के फैसले के पीछे की पूरी कहानी सामने आ रही है। न्यूज़लूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक इमरान खान के इस फैसले के पीछे जिनेवा संधि नहीं, बल्कि भारत के हमले का अल्टीमेटम था। एक सरकारी सूत्र ने हमें बताया कि पायलट के पाकिस्तान के कब्जे में होने की खबर के बाद पीएम नरेंद्र मोदी बेहद नाराज थे और उन्होंने इसकी जवाबी कार्रवाई जल्द से जल्द करने का मन बना लिया था। इस दौरान भारत ने अमेरिका समेत कई देशों को यह साफ कर दिया कि अगर पाकिस्तान ने 24 घंटे के अंदर विंग कमांडर अभिनंदन को वापस नहीं लौटाया तो भारत पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए स्वतंत्र होगा। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कूटनीतिक जरियों से इस बात की जानकारी पाकिस्तानी सरकार को दी और कहा कि अगर वो गुरुवार शाम तक अभिनंदन को वापस करने का एलान नहीं करता है तो उसके बाद के घटनाक्रम की अमेरिका की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। खास बात यह रही कि चीन और सऊदी अरब के विदेश विभागों ने भी पाकिस्तान सरकार से साफ कर दिया कि पहले वो भारतीय पायलट को रिहा करे, वरना हालात हाथ से निकल सकते हैं।

गुरुवार रात तय था भारत का हमला

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना ने गुरुवार और शुक्रवार की रात को पाकिस्तान के खिलाफ सभी मोर्चों पर एक साथ जंग छेड़ने का फैसला कर लिया था। इनमें मिसाइलों से हमले की भी तैयारी थी। पाकिस्तानी सेना और सरकार को जब इस बात की भनक लगी तो बुधवार की रात भर उनकी सांसें अटकी रहीं। पाकिस्तान को यह लगता रहा कि कहीं भारत बुधवार को ही हमला न कर दे। इस डर का इशारा इमरान खान ने पाकिस्तानी संसद में दिए अपने भाषण में भी किया है। इमरान ने पाकिस्तानी संसद को संबोधित करते हुए कहा कि ‘हमें डर था कि भारत कहीं मिसाइल हमला ना कर दे इसलिए पूरा देश अलर्ट पर रखा गया था। हवाई सेवाएं रोक दी थी और सेना को किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार रहने कहा था।’ बुधवार की रात बीतने पर पूरे पाकिस्तान ने चैन की सांस ली। सुबह से ही इमरान खान और सेना के बड़े अफसरों की बैठकों का दौर शुरू हो चुका था। इस दौरान अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बार फिर से दोपहर 12 बजे के आसपास पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को फोन करके याद दिलाया कि समय बीता जा रहा है।

सौदेबाजी की कोशिश में था पाकिस्तान

भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने पायलट अभिनंदन के बदले सौदेबाजी की कोशिश भी शुरू कर दी थी। इसी के तहत पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने वहां के टीवी चैनल जियो न्यूज़ को फोन पर इंटरव्यू में कहा कि अगर भारतीय सेनाएं पीछे हट जाएं तो वो अभिनंदन को छोड़ने को तैयार हैं। लेकिन विदेश विभाग ने इस पेशकश का जवाब यह दिया कि ‘पाकिस्तान से कोई सौदेबाजी नहीं होगी और अगर उसने विंग कमांडर अभिनंदन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो उसकी खैर नहीं।’ गुरुवार दोपहर 2 बजे के आसपास भारतीय टीवी चैनलों पर विदेश मंत्रालय के ऐसे सख्त तेवरों की खबर आने के बाद पाकिस्तान समझ गया कि सौदेबाजी की कोशिशें उसे महंगी पड़ सकती हैं। पाकिस्तानी सेना से हरी-झंडी मिलने के बाद इमरान खान ने आनन-फानन में संसद में रिहाई का एलान करने का फैसला किया। इस ऐलान से पहले अमेरिकी सरकार और इस्लामाबाद में भारतीय राजदूत को फोन पर यह जानकारी दे दी गई थी कि रिहाई का थोड़ी देर में ऐलान होने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इस वक्त वियतनाम के हनोई में उत्तर कोरिया के किम जोंग उन से मिलने के बाद मीडिया को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने वहां पर मीडिया को यह जानकारी दी कि थोड़ी देर में कुछ अच्छा होने वाला है। उनका इशारा इसी बात की तरफ था।

आतंक से लड़ाई में अब आगे क्या होगा?

हमारे सूत्र ने बताया कि भारत ने पूरे विश्व समुदाय को जता दिया है कि पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क के सफाये के बिना वो अब चुप नहीं बैठेगा। भारत ने कहा है कि या तो पाकिस्तान खुद इन ठिकानों को खत्म करे या भारत को यह काम करना पड़ेगा। साफ है कि भारत ने जता दिया है कि वो आगे फिर से पाकिस्तान के अंदर हमले करेगा। इस बात की भी जानकारी भी अमेरिका से लेकर चीन और सऊदी अरब जैसे पाकिस्तान के हितैषी देशों को दे दी गई है। भारत सरकार ने यह शर्त भी रखी है कि पाकिस्तान हाफिज सईद और जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकवादियों को उसे सौंपे। पूरी दुनिया इस बात को समझ रही है कि भारत इस मामले में अब झुकने को तैयार नहीं है। ऐसे में आगे भी पाकिस्तान को ही झुकना होगा, जिसकी शुरुआत इमरान खान ने कर दी है। देखें इमरान खान का वो बयान:

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