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क्या भारत में भी घुसने की फिराक में हैं ‘आतंक की दुल्हनें’?

बायीं तस्वीर हुदा मुथाना की है जो अमेरिका से भागी थी, जबकि दायीं तस्वीर शमीमा बेगम की है जिसके पास ब्रिटिश नागरिकता है।

दुनिया भर में इन दिनों इन दो महिलाओं की कहानी चर्चा में है। एक का नाम हुदा मुथाना है जबकि दूसरी का नाम शमीमा बेगम है। ये वो मुस्लिम महिलाएं हैं जो अबू बकर अल बगदादी के संगठन आईएसआईएस (ISIS) के आतंकवादियों को सेक्स मुहैया कराने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से भागकर इराक और सीरिया गई थीं। दरअसल ये कहानी सिर्फ इन्हीं दो लड़कियों की नहीं है, ऐसी सैकड़ों लड़कियां अमेरिका, यूरोप और यहां तक कि एशियाई देशों से भी भागकर गई थीं। ये वो मुस्लिम औरतें हैं जिन्हें लग रहा था कि इस्लामिक स्टेट की लड़ाई यानी जिहाद में वो अपने तरीके से योगदान देंगी। चूंकि ISIS के लड़ाकों को सेक्स की जरूरत महसूस होती होगी तो वो उनकी इस जरूरत को पूरा करेंगी। अब जब इस्लामिक स्टेट का सफाया हो चुका है, ISIS पूरी तरह से खत्म हो चुका है, ये औरतें वापस अपने देशों में लौटने की फिराक में हैं। ऐसी कई लड़कियां भारत से भी गई थीं, उनमें से ज्यादातर का कुछ अता-पता नहीं है। सवाल यह है कि क्या वो भी देश लौटने की कोशिश कर सकती हैं। यह भी पढ़ें: आईने में शक्ल देखे इस्लाम, डरावनी हो चली है

कौन हैं ‘आतंक की दुल्हनें’?

ISIS के आतंकवादियों को ‘यौन सुख’ देने के लिए खुद को अपनी मर्जी से वेश्या या सेक्स स्लेव बनाने वाली ऐसी लड़कियों को पश्चिमी देशों में ‘Bride of Terror’ नाम दिया जाता है। इनमें अमेरिका की हुदा मुथाना सबसे ज्यादा चर्चा में थी। जो सीरिया में एक कैंप में मिली। जब वो अमेरिका से भागकर सीरिया गई थी तब उसकी उम्र 20 साल थी, आज वो 24 साल की हो चुकी है। वो अमेरिका के अलबामा में एक कॉलेज में पढ़ती थी। वो अचानक अपनी फीस के पैसों से तुर्की का टिकट खरीदकर भाग गई थी, जहां से वो सीरिया पहुंच गई। खुद हुदा मुथाना बताती है कि उसने करीब 500 से ज्यादा इस्लामी आतंकवादियों की हवस पूरी की। इस दौरान वो एक बच्चे की मां भी बन गई। ये बच्चा अब 18 महीने का हो चुका है। फिलहाल वो सीरिया के एक कुर्दिश कैंप में रह रही है और अमेरिका में अपने घर लौटने की फिराक में है। अमेरिका सरकार ने उसे नागरिकता देने से इनकार कर दिया तो उसके पिता अली अहमद मुथाना ने कोर्ट में याचिका दायर कर दी। हुदा का पिता कोई मामूली आदमी नहीं, बल्कि यमन में यूएन का राजदूत रह चुका है। अमेरिका के मुस्लिम संगठन मांग कर रहे हैं कि हुदा को वापस नागरिकता दी जाए। यह भी पढ़ें: इस्लाम छोड़कर एक्स-मुस्लिम क्यों बन रहे हैं लोग?

कुछ ऐसी ही कहानी ब्रिटेन में जन्मी बांग्लादेशी मूल की शमीमा बेगम की कहानी है। 15 साल की उम्र में ये लड़की 2015 में आईएस में शामिल होने के लिए लंदन से भाग गई थी। उसने भी बगदादी के आतंकवादियों को यौन सुख देने का काम किया और एक बच्चे की मां बन गई। ब्रिटिश सरकार ने उसकी नागरिकता खत्म कर दी है। लेकिन वापस लौटने की कोशिश जारी है। ब्रिटेन के कुछ कट्टरपंथी इस्लामी संगठन इस आतंक की दुल्हन को मानवीय आधार पर दोबारा बसाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक कमउम्र की लड़की के साथ नाइंसाफी की जा रही है। शमीमा एक स्कूल में पढ़ाई करती थी और वहीं से वो अपनी 2 अन्य मुस्लिम दोस्तों के साथ तुर्की के रास्ते सीरिया भाग गई थी। उसने शरण के लिए नीदरलैंड्स और बांग्लादेश की सरकारों से अपील की लेकिन इन दोनों ने भी इनकार कर दिया। फिलहाल वो भी सीरिया के एक शरणार्थी शिविर में रह रही है। शमीमा पहले भी 2 बच्चों को जन्म दे चुकी है, लेकिन उनकी कुपोषण और बीमारी से मौत हो चुकी है। शमीमा इतनी कट्टर है कि इसे आज भी अपने किए पर कोई अफसोस नहीं है। उसे लगता है कि वो अल्लाह की सेवा करने के लिए गई थी और उसने वही काम किया। यह भी पढ़ें: क्यों इस्लाम छोड़कर भाग रही हैं सऊदी अरब की लड़कियां

आतंक की औलादों का क्या होगा?

इस्लामी देशों में यह मान्यता रही है कि जब जिहाद यानी धर्मयुद्ध हो तो महिलाओं को जिहादियों की सेवा के लिए आगे आना चाहिए। उन्हें जिहादियों को यौन सुख देने के साथ-साथ भारी तादाद में बच्चे भी पैदा करने चाहिए ताकि वो बड़े होकर लड़ाई को आगे बढ़ा दें। हुदा मुथाना और शमीमा बेगम जैसी औरतें अपने देश तो लौटना चाहती हैं लेकिन उन्हें आज भी अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। समझना मुश्किल नहीं है कि उनकी संतानें बड़ा होकर क्या करेंगी। अभी वो मानवीय आधार पर अपने गैर-इस्लामी देशों में लौटने की फिराक में हैं, लेकिन यह तय है कि उनकी संतानें भी बड़ी होकर आतंकवादी बनेंगी।

ये दोनों लड़कियां ऑस्ट्रिया से ISIS में शामिल होने सीरिया गई थीं। 2014 में इन दोनों ने ऑस्ट्रिया की सरकार से अपील की थी कि उन्हें वापस अपने देश आने दिया जाए। लेकिन उन्हें इसकी इजाज़त नहीं मिली।

भारत समेत दुनिया भर में खतरा

दरअसल ऐसी जिहादी दुल्हनें पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं। सीरिया और इराक से वापसी के बाद वो अपने-अपने देशों में घुसने की कोशिश में हैं। भारत में केरल और महाराष्ट्र से कई लड़कियों के तब भागकर ISIS में भर्ती होने की खबरें आई थीं। कुछ को बीच रास्ते में गिरफ्तार भी किया गया था। इनमें से ज्यादातर का अब कोई अता-पता नहीं है। माना जा रहा है कि कुछ जिंदा भी हो सकती है और किसी तरह से भारत में घुसने की कोशिश कर सकती हैं। इसे देखते हुए खुफिया एजेंसियों और हवाई अड्डों पर निगरानी रखने वाली एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है। कुछ ऐसी ही स्थिति ऑस्ट्रेलिया की है, जहां कई लड़कियों को वापस लौटने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया। इसे देखते हुए वहां की सरकार ने इनकी वापसी पर पाबंदी लगा दी है। खुद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने माना था कि उसके 230 नागरिक जिहादी संगठनों में शामिल होने के लिए भागे हैं।

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