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मोदी के खिलाफ मसूद और कांग्रेस के बयानों में क्या है कनेक्शन?

पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड और जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मौलाना मसूद अजहर ने एक ऑ़डियो टेप जारी करके सफाई दी है। भारत के बढ़ते दबाव के बीच उसने ये कहते हुए पलटी मार दी कि हमले में मैं शामिल नहीं था। जबकि हमले के फौरन बाद उसने इसकी जिम्मेदारी खुद ली थी। लेकिन मौलाना मसूद अजहर के ताजा बयान के साथ एक अजब संयोग भी देखने को मिला। उसका ऑडियो टेप जब सोशल मीडिया के जरिए सामने आया, ठीक लगभग उसी समय कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी बुलाई। हैरानी की बात यह रही कि दोनों की तरफ से आए बयानों में कुछ बातों में कमाल की समानता देखने को मिली। जैश की तरफ से आया ऑडियो टेप खुद मौलाना मसूद अजहर की आवाज में था, जबकि कांग्रेस पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस उनके प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने संबोधित की थी। इन दोनों के बीच के तारतम्य को कई आम लोगों ने महसूस किया और सोशल मीडिया पर इस बात को खुलकर लिखा भी है। उदाहरण के तौर पर मसूद अजहर ने कहा कि हमलावर आत्मघाती कोई आतंकवादी नहीं, बल्कि शहीद था। उसी तरह से कांग्रेस के प्रवक्ता ने उसे ‘सो कॉल्ड टेररिस्ट’ कहकर संबोधित किया।

जैश और कांग्रेस में मोदी को लेकर चिंता

अगर आप मौलाना मसूद अजहर का ऑडियो टेप सुनें तो उसकी बातों से साफ तौर पर यह चिंता झलक रही है कि पुलवामा में जो हमला हुआ है उससे मोदी को चुनावी फायदा न हो जाए। यही कारण है कि उसने खुद को और अपने गुर्गों को दिलासा दिलाते हुए कहा है कि “पुलवामा हमले से मोदी को चुनाव में फायदा नहीं, बल्कि नुकसान होगा।” इसी तरह कांग्रेस पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी यही चिंता छाई रही कि पुलवामा हमले का नरेंद्र मोदी को राजनीतिक फायदा न हो जाए। कांग्रेस की चिंता तब है जब खुद मोदी सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर अपील की थी कि कोई दल इस मामले पर राजनीति न करे। कांग्रेस इस मामले में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के जिस बयान को आधार बना रही है वो बयान भी लोगों को यह आश्वासन देने के लिए था कि देश इस हमले का पाकिस्तान से बदला जरूर लेगा। कुल मिलाकर देखें तो जैश और कांग्रेस दोनों के निशाने पर पीएम मोदी और बीजेपी की सरकार है।

मसूद अजहर को बचाना चाहती है कांग्रेस?

बहुत सारे लोगों ने यह बात नोटिस की है कि रणदीप सुरजेवाला ने पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक बार भी पाकिस्तान, जैश-ए-मोहम्मद या मौलाना मसूद अजहर के खिलाफ कोई सख्त बयान नहीं दिया। उनके हमलों का रुख सिर्फ और सिर्फ मोदी सरकार पर था। यही बात कई लोगों को खटक रही है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मौलाना मसूद अजहर को कांग्रेस बचाना चाहती हो। वैसे भी यह बात सामने आ चुकी है कि इस हमले का कहीं न कहीं ‘उरी’ फिल्म की सफलता से लेना-देना है। इस फिल्म के कारण लोगों में मोदी सरकार की काफी तारीफ हुई थी। यह बात शुरू से ही कही जाती रही है कि मोदी-विरोधी ताकतें सरकार की इस सफलता पर पानी फेरने के लिए चुनाव से ठीक पहले ऐसा हमला करवा सकते हैं। मशहूर डेटा साइंटिस्ट गौरव प्रधान ने भी कुछ दिन पहले ऐसा ही कुछ शक जताया था। उनकी बातें आप नीचे दिए लिंक पर पढ़ सकते हैं: क्या इस शख्स को पुलवामा हमले के बारे में पहले से पता था? 

नीचे आप सुरजेवाला का वो बयान देख सकते हैं, जब उन्होंने आत्मघाती आतंकवादी को ‘so called terrorist’ कहकर संबोधित किया था। इसका मतलब हुआ कि भारत सरकार भले ही उसे आतंकवादी मानती हो, लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं मानती।

 

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