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मोदीजी, कांग्रेस-मुक्त भारत से पहले ‘धिम्मी मुक्त भाजपा’ बनाइए

तस्वीर में वर-वधू के साथ बीच में सफेद शॉल ओढ़े खड़े सज्जन बीजेपी के दिग्गज नेता रामलाल हैं। उनके दायीं तरफ योगी सरकार में मंत्री स्वाति सिंह को देखा जा सकता है।

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव रामलाल इन दिनों सुर्खियों में हैं। रामलाल की भतीजी ने एक मुसलमान लड़के के साथ लव मैरिज की। वैसे देखा जाए तो ये लड़की और लड़के की मर्जी का मामला है, लेकिन जिस तरह से इस शादी में खुद रामलाल ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया उससे लोग हैरान हैं। लखनऊ में हुई इस शादी में बीजेपी के कई बड़े नेता सज-धज कर मियां-बीवी को आशीर्वाद देने पहुंचे। रामलाल ने इस शर्मिंदगी के मौके को पार्टी में अपने रसूख और शक्ति प्रदर्शन की तरह से इस्तेमाल किया। रामलाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे हैं और उनकी छवि हिंदुत्ववादी नेता की रही है। यह सवाल उठ रहा है कि आखिरकार ये कैसा हिंदुत्ववादी नेता है जिसने अपनी भतीजी की शादी मुसलमान से हो जाने दी। वो भी तब जब आरएसएस, बीजेपी और दूसरे हिंदुत्ववादी संगठन ‘लव जिहाद’ के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं। यह बात साबित हो चुकी है कि मुसलमान एक साजिश के तहत हिंदू लड़कियों से शादी करने उनका धर्मांतरण करा रहे हैं। अगर भतीजी की मर्जी थी तो भी विचारधारा के नाते रामलाल खुद को इस शादी से अलग कर सकते थे। जो बीजेपी नेता इस शादी में पहुंचे वो इससे बच सकते थे। इस घटना ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वाकई बीजेपी और आरएसएस के सभी नेता हिंदुत्व की विचारधारा के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि हिंदुत्व के नाम बड़ी संख्या में रामलाल जैसे धिम्मियों ने घुसपैठ कर रखी है। ‘धिम्मी’ उसे कहते हैं जो खुद तो मुसलमान नहीं होता लेकिन दिमागी तौर पर इस्लाम का गुलाम होता है।

क्या है शादी की पूरी कहानी?

17 फरवरी, रविवार को लखनऊ के एक फाइवस्टार होटल में रामलाल की भतीजी श्रेया गुप्ता की शादी फैजान करीम नाम के लड़के से हुई। पूरे तामझाम से हुई इस शादी पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इस शादी में शामिल होने वाले मेहमानों में प्रमुख नाम थे- यूपी के राज्यपाल राम नाईक, केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश शर्मा, मंत्री सुरेश खन्ना, नंदगोपाल नंदी, स्वाति सिंह और दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी। मनोज तिवारी ने तो बाकायदा माइक लेकर उनके लिए शुभाशीष के गीत गाए। बताया जा रहा है कि इस सारे तामझाम का इंतजाम और खर्चा रामलाल ने खुद ही उठाया। रामलाल को अपनी इस हरकत का अहसास शायद था, इसीलिए उन्होंने कई मीडिया वालों को खुद यह जानकारी दी कि शादी वैदिक रीति-रिवाज से हो रही है। सवाल उठता है कि वैदिक रीति-रिवाज तो ठीक है, लेकिन क्या उसके लिए लड़के ने धर्मांतरण करके हिंदू धर्म अपनाया? इस बारे में कहीं कोई जानकारी सामने नहीं आई है। समझना मुश्किल नहीं है कि लड़के ने अपना धर्म नहीं छोड़ा है। जाहिर है इस मामले में भी वही होगा जो टीना डाबी जैसे मामलों में होता रहा है। शादी के कुछ दिन बाद लड़की अपना नाम बदल लेगी या अपने नाम श्रेया गुप्ता के आगे ‘करीम’ जोड़ लेगी और इस्लामी तरीके से एक बार फिर से निकाह हो जाएगा।

कौन है रामलाल का समधी?

रामलाल के दामाद फैजान करीम के अब्बा डॉक्टर वजाहत करीम गोरखपुर में स्टार नर्सिंग होम नाम से एक बड़ा अस्पताल चलाते हैं। डॉक्टर वजाहत करीम ने एक बंगाली ब्राम्हण डॉक्टर दीप्ति चटर्जी को मुस्लिम बनाकर उसका नाम डॉक्टर सुरहिता करीम रखकर निकाह किया। उनके दो बेटे हुए जिनके नाम फैजान करीम और रेहान करीम हैं। रामलाल की समधिन डॉक्टर सुरहिता करीम गोरखपुर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुकी है। ये परिवार हर साल गोरखपुर में इस्लामिक इज्तिमा का आयोजन करता है। ये एक धार्मिक आयोजन होता है जिसका मकसद इस्लाम की सत्ता स्थापित करना और उसका प्रचार-प्रसार करना होता है। इज़्तिमा का आयोजन का एक और मकसद होता है कि इसके जरिए गैर-मुस्लिमों यानी काफिरों के मन में इस्लाम के लिए खौफ बिठाया जाए। यानी आरएसएस के प्रचारक रामलाल की बेटी अब इस्लाम के प्रचार-प्रसार और काफिरों के मन में इस्लाम के ख़ौफ को बढ़ावा देने के लिए काम आएगी। रामलाल के समधी वजाहत करीम के स्टार नर्सिंग होम पर हवाला के जरिए दुबई पैसा भेजने के आरोप भी हैं। इस मामले में उस पर कार्रवाई भी हो चुकी है। कुछ समय पहले जब गोरखपुर में डॉक्टर कफील अहमद के जरिए बच्चों की मौत का राजनीतिकरण किया गया था तो उस मामले में भी डॉक्टर वजाहत करीम का नाम सामने आया था। उसने सार्वजनिक तौर पर कफील का समर्थन किया था। यह परिवार हमेशा से योगी आदित्यनाथ और गोरखनाथ मठ का दुश्मन रहा है। यह भी सवाल उठ रहा है कि भतीजी की शादी से पहले क्या रामलाल ने लड़के के घर वालों का बैकग्राउंड नहीं देखा?

ये लव जिहाद नहीं तो क्या?

सोशल मीडिया पर सक्रिय जितेंद्र सिंह लिखते हैं कि “सही मायने में देखा जाए तो रामलाल की भतीजी का विवाह असली लव जिहाद है। गोरखपुर की कुख्यात जिहादी करीम फैमिली ने बहुत ही साजिश के तहत आरएसएस के एक बड़े चेहरे और बीजेपी के महासचिव की भतीजी को फंसाया ताकि इसी बहाने हिंदू लड़की और मुस्लिम लड़के की शादी को उचित ठहाराया जा सके।” कई लोगों ने इस मामले पर बीजेपी और आरएसएस के नेताओं की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं। अक्सर देखा जाता है कि इन संगठनों में कई नेता सार्वजनिक जीवन में तो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं जबकि निजी जीवन में उनकी हरकतें संदिग्ध होती हैं। सुब्रह्मण्मय स्वामी इस कड़ी में सबसे बड़ा नाम हैं, जो कथित तौर पर हिंदुत्व की लड़ाई लड़ते हैं लेकिन उनकी इकलौती पत्रकार बेटी सुहासिनी एक मुसलमान से ब्याही है और वो हिंदू धर्म के खिलाफ खुलकर बोलती और लिखती है। जाहिर है ऐसे नेताओं की हरकतों के कारण आम हिंदुओं को शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। कई लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए अपना गुस्सा जाहिर भी किया है।

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