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तो क्या बलोचिस्तान की आजादी का समय आ गया है!

गूगल मैप्स की इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि कैसे बलोचिस्तान भारत, ईरान और अफगानिस्तान से घिरा हुआ है। ऐसे में रणनीतिक रूप से बलोचिस्तान को पाकिस्तान से अलग कराना बेहद आसान है।

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद से पूरे देश में गुस्से की लहर है। हर तरफ यह मांग उठ रही है कि पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उसे ऐसा सबक सिखाया जाए कि दोबारा वो भारत की तरफ आंख उठाकर देखने से पहले दस बार सोचे। लेकिन सवाल यह है कि वो कौन सी कार्रवाई होगी, जिससे ये सारे मकसद पूरे किए जा सकें? ज्यादातर लोग नहीं चाहते कि पाकिस्तान के साथ बड़े पैमाने पर लड़ाई लड़ी जाए। क्योंकि पाकिस्तान तो कंगाल है उसे लड़ाई से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन भारत के लिए आर्थिक तौर पर यह बड़ा झटका साबित होगा। न्यूज़लूज़ को सरकार से जुड़े सूत्रों से मिली जानकारी मुताबिक भारत इस समय पाकिस्तान की हरकतों से परेशान देशों का एक गठबंधन बना रहा है। इसमें ईरान और अफगानिस्तान जैसे शामिल हैं। इसके अलावा इलाके के कुछ और अन्य देशों को भी शामिल किया जा सकता है। कोशिश यही है कि बलोचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद करवाया जाए। यह भी पढ़ें: बलोचिस्तान से पहले पाकिस्तान से आजादी को बेताब है सिंध

तेज़ी के साथ बदल रहे हैं हालात

दरअसल बलोचिस्तान की आजादी में अब ईरान की दिलचस्पी पहले से कहीं अधिक है। अब तक इस्लामी देश के नाते ईरान और पाकिस्तान के रिश्ते मोटे तौर पर ठीक ही थे। लेकिन शिया देश होने के कारण ईरान लगातार एक तरफ सऊदी अरब और दूसरी ओर पाकिस्तान की साजिशों का शिकार हो रहा है। पिछले दिनों जब अमेरिका ने ईरान के तेल बेचने पर पाबंदी लगा दी थी तो भारत ही इकलौता देश था जिसने कहा था कि वो अमेरिका की पाबंदी की परवाह नहीं करेगा और ईरान से तेल खरीदना जारी रखेगा। इसका नतीजा यह हुआ कि ईरान और भारत के रिश्ते बेहद मजबूत हो गए। पुलवामा हमले से एक दिन पहले यानी 13 फरवरी को ईरान के सिस्तान इलाके में वहां की सेना पर आत्मघाती हमला हुआ था। इसमें उसके 27 कमांडो की मौत हो गई थी। इस हमले में जैश-ए-अदल नाम के आतंकी संगठन का हाथ था, जोकि जैश-ए-मोहम्मद का ही दूसरा नाम माना जाता है। उस हमले में जिस आतंकी का इस्तेमाल हुआ था वो भी पाकिस्तान का ही रहने वाला था। उधर अफगानिस्तान भी तालिबान और पाकिस्तान सरकार की गुपचुप बातचीतों से भड़का हुआ है। उसने इसकी शिकायत संयुक्त राष्ट्र से भी की है। अफगानिस्तान हर मंच पर पाकिस्तान के खिलाफ खुलकर बोलता रहा है और कहता रहा है कि उसके यहां आतंकवाद की सारी समस्या पाकिस्तान के कारण है। यह भी पढ़ें: एक-दो नहीं, पाकिस्तान के कुल 4 टुकड़े होंगे

हमले से पहले ईरान की दिक्कत

अंतरराष्ट्रीय मीडिया की खबरों के मुताबिक आतंकी हमले के फौरन बाद ईरान की रिवॉल्यूशनरी आर्मी ने जैश-उल-अदल के हेडक्वार्टर पर बमबारी करने की तैयारी कर ली थी। लेकिन ऐन मौके पर उसे कार्रवाई रोकना पड़ा था। दरअसल जैश-उल-अदल का हेडक्वार्टर बलोचिस्तान में ही है। जहां पर ये दफ्तर है वहां पर चीन सरकार के कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसके अलावा ईरान की सबसे बड़ी दिक्कत अमेरिका है, जिससे उसकी कट्टर दुश्मनी है। अगर ईरान पाकिस्तान की सीमा में बमबारी करता है तो ऐसा माना जाता है कि अमेरिका उसका विरोध करेगा। पुलवामा हमले के बाद ईरान सरकार भारत से कह रही है कि वो अपनी पश्चिमी सीमा से पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाए और साथ में अमेरिका को इस ऑपरेशन के लिए राजी करे। पाकिस्तान को तोड़कर अलग बलोचिस्तान देश बनाना लंबे समय में अमेरिका के लिए भी बेहतर होगा। अमेरिका के रुख को देखते हुए यह माना जा सकता है कि वो ईरान का विरोध नहीं करेगा, लेकिन चीन के रुख को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। यह भी पढ़ें: अब कराची में लगे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे

मौलाना मसूद को लेकर सौदेबाजी

सूत्रों के मुताबिक भारत और ईरान ने डिप्लोमैटिक चैनलों के जरिए चीन और अमेरिका के आगे एक शर्त रखी है कि अगर मौलाना मसूद अजहर को उन्हें सौप दिया जाता है और जैश-उल-अदल और जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को पाकिस्तान खुद बंद करवा दे तो वो हमला करने का अपना इरादा छोड़ सकते हैं। पाकिस्तान के आगे मुश्किल यह है कि वो दो तरफ से ऐसे मुल्कों से घिर चुका है जो न्यूक्लियर पावर रखते हैं। तीसरी तरफ अफगानिस्तान है जिससे उसे किसी तरह की मदद मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। किसी भी जंग की हालत में ईरान और भारत दोनों ही उसे चुटकियों में तबाह कर सकते हैं। साथ ही पाकिस्तान की सेना इतनी ताकतवर नहीं है कि वो एक साथ ईरान, अफगानिस्तान और भारत के मोर्चों पर लड़ाई कर सके। यह भी पढ़ें: पाकिस्तान के टुकड़े करने के लिए भारत ने मारा पहला हथौड़ा

यह भी पढ़ें: भारत छोड़िए ईरान भी कर रहा है पाकिस्तान की ठुकाई

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