जब आमिर खान ने ‘जॉर्ज फर्नांडिस’ को गोली मार दी थी!

बायीं तस्वीर फिल्म रंग दे बसंती का दृश्य है।

पूर्व रक्षामंत्री और इमर्जेंसी में इंदिरा गांधी की सरकार के विरोध में चले आंदोलन के नायक जॉर्ज फर्नांडिस का 88 साल की उम्र में निधन हो गया। वो कई साल से बीमार थे और सार्वजनिक जीवन से अलग हो चुके थे। जॉर्ज फर्नांडिस के निधन पर हर कोई उन्हें अपनी कांग्रेस विरोधी विचारधारा के कारण याद कर रहा है। जॉर्ज फर्नांडिस कुछ उन नेताओं में से थे जिन्होंने यह समझ लिया था कि कांग्रेस पार्टी किसी भी रूप में देश के लिए ठीक नहीं है। यही कारण है कि वो पूरी उम्र कांग्रेस के खिलाफ लड़ते रहे। इसका नतीजा हुआ कि उन्हें राजनीति से लेकर मीडिया और फिल्मों तक में छिपे कांग्रेसी तंत्र ने लगातार निशाना बनाने की कोशिश की। संसद में जॉर्ज फर्नांडिस का बायकॉट किया गया। कांग्रेस और गांधी परिवार के इशारों पर चलने वाला मीडिया का एक बड़ा वर्ग उन्हें लेकर बेहद हमलावर रहा, लेकिन सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि आमिर खान जैसे एक्टर ने अपनी फिल्म से जॉर्ज फर्नांडिस की इमेज धूमिल करने की कोशिश की थी।

फिल्म के बहाने कांग्रेस की मदद

2006 का साल वो समय था जब मनमोहन सरकार तमाम मोर्चों पर नाकाम साबित हो रही थी और देश में महंगाई आसमान में थी। ऐसे समय में आमिर खान ने यह फिल्म पिछली वाजपेयी सरकार को बदनाम करने की नीयत से बनाई थी। इस फिल्म में कांग्रेस पार्टी के करीबी चैनल एनडीटीवी की अच्छी-खासी भागीदारी थी। बताते हैं कि फिल्म के डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा को इसके लिए अलग-अलग जरियों से फंड भी मुहैया कराया गया था। फिल्म ‘रंग दे बसंती’ की कहानी 2002 में जालंधर में हुए एक मिग हादसे के इर्द-गिर्द बुनी गई थी। फिल्म में उस हादसे में पायलट की मौत दिखाई गई थी। जबकि 2002 में जो हादसा हुआ था उसमें पायलट की जान बच गई थी। इस हादसे के लिए फिल्म में रक्षामंत्री को जिम्मेदार ठहराया गया। ये किरदार दिखने और चलने-फिरने में बिल्कुल जॉर्ज फर्नांडिस जैसा दिखता था। इसके अलावा उस फिल्म में हिंदूवादी संगठनों को बहुत नकारात्मक ढंग से दिखाया गया, जबकि अशरफ नाम के एक मुस्लिम किरदार को बहुत ही अच्छा इंसान दिखाया गया।

फिल्म पर सेना को थी आपत्ति

2006 में जब ‘रंग दे बसंती’ आई थी तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। सेंसर बोर्ड भी उन्हीं का था, लिहाजा फिल्म को लेकर किसी तरह की कोई रोक-टोक का सवाल ही पैदा नहीं होता था। लेकिन एयरफोर्स ने इस फिल्म के कुछ दृश्यों पर आपत्ति जता दी। मूल फिल्म में उसे मिग हादसों में मारे गए सभी एयरफोर्स पायलटों को समर्पित बताया गया था। जिस पर वायुसेना को सख्त एतराज था। इसके बजाय उन्होंने फिल्म में तथ्यों के साथ यह सूचना चलवाई कि मिग हादसों की संख्या में कमी आई है। वायुसेना का कहना था कि इस तरह की बातें लिखने से नौजवानों में वायुसेना में शामिल होने को लेकर उत्साह कम हो सकता है। इसी तरह फिल्म में मिग हादसे की तारीख 2002 हटवाई गई। साथ ही रक्षामंत्री के लिए ‘मंत्रीजी’ का संबोधन तय किया गया। तब वायुसेना के अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा था कि मिग विमानों की खरीद के लिए इस तरह से रक्षामंत्री को खलनायक नहीं बनाया जा सकता। हालांकि जब फिल्म रिलीज हुई तो जॉर्ज फर्नांडिस से मिलती-जुलती सूरत के कारण लोगों को बार-बार उन्हीं की याद आती रही। फिल्म के कारण कई लोगों ने यकीन भी कर लिया था कि मिग हादसों के लिए असली जिम्मेदार वाजपेयी सरकार थी, जबकि तथ्य कुछ और ही हैं।

नीचे आप ‘रंग दे बसंती’ फिल्म का वो सीन देख सकते हैं:

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