सही बताना रवीश कुमार, आप मोदी के आदमी तो नहीं?

रवीश कुमार जी का सबसे बेहतरीन काम माना जाता है बिहार विधानसभा चुनाव, जिसमें उन्होंने आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान को आधार बनाकर नरेंद्र मोदी का विजय रथ रोक दिया था। तब रवीश कुमार ने जबरदस्त खेल रचा था। जिस ओर चाहा, उधर रुख मोड़ दिया बिहार चुनाव का। आज भी नशा सा हो जाता है उनको, अपनी कलाकारी ध्यान करके। एनडीटीवी इंडिया पर प्राइम टाइम में जो वो राम रहीम इंसा के टोन में पत्रकारी करते हैं, वो और कुछ नहीं, बिहार विजय के बाद पल्लवित हुई उनकी आत्ममुग्धता है। यह आत्ममुग्धता उनके व्यक्तित्व में ऐसी उतरी है कि उसका हिस्सा बन चुकी है। यह भी पढ़ें: रवीशजी पीएम के भाई से कार में तेल भरवाइएगा?

और इधर तीन राज्यों में भाजपा की हालिया हार के बाद तो रवीश कुमार की आत्ममुग्धता का स्तर यह है कि हर सुबह अपनी फोटो को प्रणाम करके घर से निकलते हैं। पेट निकल आया है, झुकने में तकलीफ होती है, नहीं तो अपने पैर छूकर ही दहलीज़ लांघते। मगर वो बेचारे अभी तक यह समझ नहीं पाए कि बिहार के पूरे खेल में बिसात नीतीश कुमार की थी जो कुल चार परसेंट सजातीय वोट होने के बावजूद लालू प्रसाद के कंधे चढ़कर मजे से मुख्यमंत्री बने, और अब भी हैं। वो भी उनकी पार्टनरशिप में, जिनके खिलाफ रवीश जी स्क्रीन काली किया करते थे। यानी रवीश जी ने मैदान तो सजाया लेकिन मैदान मार कोई और ही ले गया। यह भी पढ़ें: रवीशजी आपका पाखंड भी देश देख रहा है

वैसे अगर आप कॉन्सपिरेसी थ्योरीज़ में विश्वास रखते हैं तो रवीश जी मोदीजी के आदमी भी हो सकते है, जिनको मोदीजी ने अपने नालायक प्रचारतंत्र का घाटा पूरा करने को रखा है। उनका काम यह है कि मोदी विरोध में बेहूदगी की सीमाएं क्रॉस करके विरोधी पक्ष की विश्वसनीयता ही खत्म कर दें। जैसे अरविंद केजरीवाल ने जन आंदोलनों की कर दी और अन्ना हजारे ने अनशन की। इस तरह का एक प्रयोग मोदीजी सरदेसाई दंपत्ति के माध्यम से कर चुके हैं, जिन्होंने दो हजार दो चालीसा लिखकर उनको प्रधानमंत्री बनवा दिया। लगता है इस बार का ठेका रवीश जी के पास है। भगवान उन्हें स्क्रीन काली करने की शक्ति दें। यह भी पढ़ें: बधाई हो रवीश कुमार का बलात्कारी भाई बच गया

(विकास अग्रवाल के फेसबुक पेज से साभार)

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