Loose Top

छह महीने पहले से थी जनरल कैटेगरी आरक्षण की तैयारी

Photo Courtesy: Indian Express

मोदी सरकार ने 7 जनवरी 2019 की शाम को यह खुलासा किया कि वो जनरल कैटेगरी में आने वाले गरीबों के लिए भी आरक्षण का इंतजाम करने जा रही है। उसके बाद से ही यह कहा जाने लगा कि 3 राज्यों में विधानसभा चुनावों में हार के कारण मोदी सरकार डर गई है और अब वो नाराज वोटरों को खुश करने की कोशिश कर रही है। पहली नजर में यह बात सच भी लगती है, लेकिन तथ्य इससे बिल्कुल अलग हैं। पहली बात तो यह कि कोई भी कानून बिना तैयारी के इतनी जल्दीबाजी में नहीं बनाया जा सकता। पहले कानून का ड्राफ्ट तैयार करना होता है और देखना होता है कि उसमें कहीं कोई ऐसी बात तो नहीं है जिससे किसी तरह की व्यावहारिक या संवैधानिक समस्या खड़ी होती हो। जानी-मानी न्यूज़ वेबसाइट mynation ने करीब 4 महीने पहले सितंबर 2018 में ही यह खुलासा कर दिया था कि मोदी सरकार अपने कार्यकाल के आखिरी चरण में गरीब सवर्णों को आरक्षण देने की तैयारी में है। mynation ने अपनी रिपोर्ट में इस बात से जुड़े सबूत भी पेश किए थे।

यूपी चुनाव के बाद ही शुरू हुआ विचार

2017 में हुए यूपी चुनाव के नतीजों के बाद ही पीएम मोदी ने यह मन बना लिया था कि जनरल कैटेगरी के गरीब लोगों को कोटा के दायरे में लाया जाएगा। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को शुरुआती तैयारी करने को कह दिया था। प्रधानमंत्री को पता था कि बात बाहर आ गई तो मीडिया इसे बिल्कुल अलग रंग दे सकती है। लिहाजा उन्होंने अपने भरोसेमंद अधिकारियों को पूरी गोपनीयता बरतने को कहा था। बिल ड्राफ्ट करने का असली काम मई-जून से शुरू हुआ। विधानसभा चुनाव बीजेपी जीतती या हारती, बिल के लिए जो टाइम पहले से तय था वो संसद का शीतकालीन सत्र ही था। उन्होंने इसे लाने की हड़बड़ी कभी नहीं की। तब भी नहीं, जब एससी-एसटी बिल पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार को दलित विरोधी साबित करने की कोशिश हुई और तब भी नहीं जब एससी-एसटी बिल पर संविधान संशोधन के बाद देशभर में तथाकथित ऊंची जातियों में गुस्सा उफान पर था। इसी गुस्से का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस ने तब बीजेपी के पारंपरिक समर्थक सवर्ण वर्ग के बीच नोटा का अभियान शुरू कर दिया। एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी को इसका कुछ हद तक नुकसान भी उठाना पड़ा। यह भी पढ़ें: क्या वाकई मोदी ने हिंदुओं के लिए कुछ नहीं किया

आरक्षण पर जातीय विद्वेष का खेल खत्म

न्यूज़लूज़ के सूत्रों के मुताबिक इस कानून के पीछे एक दूसरा मकसद यह था कि इससे अलग-अलग जातियों के आधार पर आरक्षण के लिए समय-समय पर होने वाले आंदोलन भी खत्म हो जाएंगे। जैसे कि गुजरात में पटेल आरक्षण का आंदोलन इसके बाद पूरी तरह अप्रासंगिक हो गया है। इसी तरह हरियाणा में जाट और राजस्थान में गुर्जर आरक्षण का मुद्दा भी एक तरह से खत्म है। यह देखा जा रहा था कि विपक्षी कांग्रेस आरक्षण को सामाजिक विद्वेष फैलाने के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही थी, ऐसे में बीजेपी के लिए यह जरूरी था कि वो कुछ ऐसा करे कि पूरा मुद्दा ही खत्म हो जाए। क्योंकि चुनाव से पहले ऐसे कई जातीय आंदोलन शुरू करने की तैयारी थी। 2016 में हरियाणा में हुए जाट आरक्षण आंदोलन में हालात इतने बिगड़ गए थे कि 18 लोगों की मौत हो गई थी और सेना तक बुलानी पड़ी थी। राजस्थान के गुर्जर आंदोलन में रेल पटरियां जाम होने से अक्सर करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ता है। पाटीदार और मराठा आंदोलन भी समय-समय पर गुजरात और महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्यों के लिए जी का जंजाल बन चुके थे। अब जब जनरल कैटेगरी को 10 फीसदी रिजर्वेशन दिया गया है ये आग काफी हद तक काबू में पा ली गई है।

अभी और सरप्राइज की तैयारी में है सरकार

अगड़ों को आरक्षण के बाद सिलसिला थमा नहीं है। इसका इशारा खुद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में कर दिया। उन्होंने कहा है कि आखिरी ओवर में ये पहला छक्का था, अभी और बड़े फैसलों का इंतजार कीजिए। हमारी जानकारी के मुताबिक सरकार को अपना अंतरिम बजट पेश करना है, जिसमें इनकम टैक्स की सीमा बढ़ाने की उम्मीद है। इसके लिए 31 जनवरी से 13 फरवरी के बीच बजट सत्र होगा। इसके अलावा किसानों के लिए डायरेक्ट कैश ट्रांसफर जैसी कई योजनाएं भी कतार में हैं।

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।
एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:
Donate with

Polls

क्या अमेठी में इस बार राहुल गांधी की हार तय है?

View Results

Loading ... Loading ...