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पाक के लिए काम कर रहे हैं कई पत्रकार, पहली बार मिला सबूत

अक्सर यह देखा जाता है कि भारतीय मीडिया में कई पत्रकार अपने देश के बजाय पाकिस्तान के हितों को लेकर फिक्रमंद रहते हैं। इसी कारण कई लोग शक जताते हैं कि कहीं उन्हें पाकिस्तान से सैलरी तो नहीं मिलती। लेकिन पहली बार पाकिस्तान की सरकार ने भी स्वीकार किया है कि कई भारतीय पत्रकार उसके संपर्क में हैं। दरअसल पाकिस्तानी सीनेट में एक रिपोर्ट पेश की गई है जिसमें इस बात का जिक्र किया गया है। यह रिपोर्ट अपने-आप में बेहद सनसनीखेज है क्योंकि पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी पाकिस्तानी रिपोर्ट में ऐसे भारतीय पत्रकारों की बात की गई है जो पाकिस्तान के लिए काम कर रहे हैं। कुछ दिन पहले ही यह रिपोर्ट पाकिस्तानी सीनेट की वेबसाइट  पर लोड की गई थी, लेकिन बिना कोई कारण बताए इसे अब हटा लिया गया है। न्यूजलूज़ की पुख्ता जानकारी के मुताबिक ऐसे ही एक भारतीय पत्रकार ने दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास के जरिए बोल कर यह रिपोर्ट वेबसाइट से हटवाई। यह पत्रकार इन दिनों देश के बड़े समाचार समूह के अंग्रेजी न्यूज़ चैनल में काम करता है। यह जानकारी हमें उस पत्रकार के ही एक करीबी सूत्र ने बताई है। हालांकि इसका कोई दस्तावेजी सबूत न होने के कारण हम उस पत्रकार के नाम का जिक्र यहां नहीं कर रहे हैं। एक अपील: कृपया कॉपी न करें, लिंक शेयर करें

सीनेट की रिपोर्ट से सामने आया सच

29 सितंबर 2016 को पाकिस्तानी सीनेट की कमेटी ऑफ द होल (Committee of the Whole) की मीटिंग हुई। जिसमें तब के पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ और रक्षा मामलों के सचिव सरताज अजीज भी शामिल हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान सरकार को चाहिए कि वो इंटरनेशनल लॉबिस्ट, कम्युनिकेशन फर्म्स और ऐसे पाकिस्तानी नागरिकों की सेवाएं ले जो तमाम मुद्दों पर पाकिस्तान के लिए सकारात्मक पक्ष रखने का काम करें। ऐसा इसलिए ताकि अलग-अलग मुद्दों पर दुनिया में पाकिस्तान की बेहतर इमेज बने। लेकिन इसी रिपोर्ट के अगले हिस्से में एक ऐसी बात का जिक्र है जो अपने आप में काफी कुछ कहता है। इसमें लिखा गया है कि “पाकिस्तान उन भारतीय राजनीतिक दलों, पत्रकारों, सिविल सोसाइटी संगठनों और मानवाधिकार समूहों के संपर्क में है जो मोदी सरकार की कट्टरपंथी और पाकिस्तान-विरोधी नीतियों के खिलाफ खुलकर विरोध करते हैं।” यानी भारतीय मीडिया, सिविल सोसाइटी और मानवाधिकार के नाम पर चल रहे कुछ संगठन पाकिस्तान के लिए काम कर रहे हैं। भारतीय एजेंसियों की इस बैठक की कार्रवाई पर नज़र थी। आम तौर पर ऐसी बैठकों की रिपोर्ट वेबसाइट पर पोस्ट कर दी जाती है, लेकिन इसकी रिपोर्ट लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं की गई। एक अपील: कृपया कॉपी न करें, लिंक शेयर करें

भारतीय मीडिया में सक्रिय ‘पाक लॉबी’

पाकिस्तानी सीनेट में जमा की गई इस रिपोर्ट में उन लोगों के नाम नहीं बताए गए हैं जो पाकिस्तानी सरकार के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन जिस तरह से एक हाई प्रोफाइल कमेटी की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया और बाद में उसे हड़बड़ी में हटा लिया गया उससे शक पैदा होता है। यह बात हमेशा से महसूस की जाती रही है कि कुछ भारतीय पत्रकार पैसे या किसी दूसरे लालच में ऐसी खबरें उड़ा रहे हैं जिनसे पाकिस्तान को फायदा होता हो। ऐसे पत्रकारों को ‘पाकिस्तान लॉबी’ के नाम से जाना जाता है। ये वो पत्रकार होते हैं जो तमाम मुद्दों पर पाकिस्तान सरकार के पक्ष के औचित्य को समझाते हैं। उरी हमला हुआ था तो इसी वर्ग ने यह बात फैलाने की कोशिश की थी कि हमले के पीछे भारतीय सेना की खुफिया विंग की ‘राजनीति’ है। इसी तरह से कांग्रेसी फंडिंग पर चल रही ‘द क्विंट’ नाम की वेबसाइट ने कुछ दिन पहले एक रिपोर्ट पोस्ट की, जिसमें पाक जेल में बंद कुलभूषण जाधव रॉ का जासूस बताया गया था।

क्यों पाक के लिए काम करते हैं पत्रकार

मीडिया में सभी जानते हैं कि पाकिस्तान समय-समय पर भारतीय पत्रकारों के लिए अपने यहां यात्राएं आयोजित करता रहता है। इन यात्राओं में वही कुछ जाने-पहचाने पत्रकार ही हर साल जाते हैं। इनमें से ज्यादातर के नाम लोग जानते हैं। इन पत्रकारों को पाकिस्तान में वो जहां चाहें जाने की छूट होती है। इस दौरान पाक सेना उन्हें हाईप्रोफाइल सुरक्षा और अन्य सुविधाएं मुहैया कराती है। उनकी शराब और अय्याशियों का भी भरपूर इंतजाम होता है। ये एक तरह का ब्रेनवॉश होता है जिसके बाद वो पत्रकार अपने देश का पक्ष न रखकर हर मामले में पाकिस्तान के हितों की चिंता करने लगते हैं। 2014 में मोदी सरकार आने तक ऐसी यात्राएं हर साल होती थीं, लेकिन मोदी के आने के बाद इन पत्रकारों में मन में कुछ हद तक डर आया है। इस पूरी गतिविधि पर नजर रखने वाले हमारे एक सूत्र ने बताया कि एनडीटीवी समूह के लिए काम करने वाले एक पुरुष पत्रकार ने तो बाकायदा पाकिस्तानी सेना की सुरक्षा में उन-उन इलाकों की भी सैर की जहां पर जाने के लिए पाकिस्तान किसी आम भारतीय को वीज़ा तक नहीं देता। हालांकि 2014 के बाद उसकी ऐसी यात्राएं लगभग बंद हैं। फिलहाल पाकिस्तानी सीनेट की रिपोर्ट इशारा कर रही है कि पाकिस्तान अपने लिए काम कर रहे इन पत्रकारों को फिर से सक्रिय करने की सोच रहा है। हाल में ही में एनआईए ने ISIS के आतंकवादियों के एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। उसके बाद से पत्रकारों की एक लॉबी बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से उन आतंकवादियों को बरी कराने के लिए अभियान चला रहा है। कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए कि ये वही पत्रकार हों, जिनका जिक्र पाकिस्तानी सीनेट की रिपोर्ट में किया गया है। फिलहाल उस रिपोर्ट के संबंधित हिस्से आप नीचे पढ़ सकते हैं।

(सौजन्य-@TIP_Pradhanjii)

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