क्या वाकई मोदी ने हिंदुओं के लिए कुछ नहीं किया?

बांग्लादेश के ढाकेश्वरी मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

मोदी सरकार के समर्थक रहे लोग अक्सर नाराज होकर कहते हैं कि उन्होंने हिंदुओं के लिए कुछ नहीं किया, हिंदुओं के बजाय उन्होंने मुसलमानों के विकास पर अधिक ध्यान दिया। क्या वाकई यह बात सही है या इसे लेकर किसी तरह का भ्रम है? ये जवाब पाने के लिए हमें कुछ बुनियादी बातों को समझना होगा। हमें यह समझना होगा कि 2014 में नरेंद्र मोदी ने सिर्फ लोकसभा का चुनाव जीता था। राज्यसभा में अभी हाल तक कांग्रेस का सिक्का चलता था। इसके अलावा अफसरशाही, अदालतों और मीडिया में तकरीबन पूरी तरह कांग्रेस का कब्जा था। यानी लोकसभा को छोड़ लोकतंत्र के सारे खंभों पर कांग्रेस की पताका ही फहरा रही थी। बीजेपी ने 2014 में भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्सा, विकास के वादों और हिंदुत्व की लहर पर चुनाव जीता। वोटरों ने हमेशा से यह अपेक्षा रखी कि वह हिंदू हितों के लिए काम करेंगे। लेकिन बहुत सारे लोगों को लगता है कि बीजेपी हिंदुत्व के अपने वादे से मुकर गई है। लेकिन तथ्य कुछ और ही कहते हैं। 2014 के हालात की तुलना अगर 2019 के भारत से करें तो हमें समझ में आएगा कि मोदी सरकार ने हिंदुत्व के लिए क्या किया। यह भी पढ़ें:मोदी की चाणक्य नीति को जानना आपके लिए जरूरी है

1. हिंदुओं के लिए खुलकर बोलने वाली पार्टी

बीजेपी अभी तक एकमात्र ऐसी राष्ट्रीय पार्टी है जो हिंदुओं के मुद्दों पर खुलकर बोलती है। चाहे अयोध्या मामला हो या सबरीमला, केंद्र सरकार उनमें वही पक्ष लेती है जो व्यापक हिंदू भावनाओं के मुताबिक हो। सबरीमला मंदिर के खिलाफ साजिश हुई तो केंद्र सरकार ने उसके खिलाफ आवाज उठाई। गृह मंत्रालय ने वहां पर ऐसी सुरक्षा व्यवस्था पर अमल करवाया ताकि देशभर से जाने वाले हिंदू तीर्थयात्रियों को परेशान न होना पड़े और कोई दूसरे धर्म वाला महिलाओं की एंट्री के नाम पर मंदिर की पवित्रता के साथ खिलवाड़ न करने पाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह इस बात को बेझिझक बोलते भी हैं कि हिंदुओं के मामले में वो किसी तरह का समझौता नहीं करेंगे। अयोध्या मामले में भी माना जाता है कि केंद्र सरकार लगातार सुप्रीम कोर्ट पर दबाव बनाए हुए है कि वो जल्द से जल्द मामले का निपटारा करे। यह भी पढ़ें: मत देना मोदी को वोट, बेकार हल्ला मत करो

2. गंगा की सफाई को बनाया अपना एजेंडा

गंगा हिंदुओं के अस्तित्व से जुड़ी नदी है, लेकिन बीते 70 साल की सरकारों की नीतियों का नतीजा था कि कानपुर से लेकर वाराणसी के बीच गंगा नदी गंदे नाले में बदल चुकी थी। मोदी सरकार ने आने के बाद नमामि गंगे परियोजना शुरू की, जिसके तहत करीब 18 हजार करोड़ रुपये लागत वाली 100 से अधिक परियोजनाएं शुरू की गईं। गंगा किनारे बसे गांवों में खुले में शौच बंद कराने से लेकर कानपुर, प्रयागराज और काशी में गंगा में मिलने वाले सभी बड़े नालों को बंद करवाने जैसे काम इन प्रोजेक्ट्स में शामिल थे। हाल ही में कानपुर के सीसामऊ नाले पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट शुरू हो गया। अकेले ये नाला गंगा में सबसे अधिक गंदगी उड़ेलता था। ज्यादातर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट शुरू हो चुके हैं और कुछ पर काम तेजी से चल रहा है। गंगा का पानी पहले के मुकाबले काफी हद तक साफ हुआ है, जो बची-खुची गंदगी है वो भी अगले साल जून-जुलाई तक दूर हो जाएगी। गंगा के अलावा यमुना और गोमती को भी साफ करने का काम चल रहा है। यह भी पढ़ें: पाकिस्तान से आए लाखों हिंदू, सिखों के लिए खुशखबरी

3. धर्मांतरण माफिया पर लगाम कसी गई

मोदी सरकार ने बीते 4 साल साल में धर्मांतरण के कारोबार को कितना धक्का पहुंचाया है ये ईसाई मिशनरीज की बौखलाहट को देखकर ही समझा जा सकता है। सरकार ने करीब 20 हजार ऐसे एनजीओ के लाइसेंस रद्द किए हैं जो अलग-अलग नामों से विदेशों से पैसा लाते थे और भारत में गरीबों और आदिवासियों को ईसाई बनाने का कारोबार कर रहे थे। दरअसल ज्यादातर धर्मांतरण इसलिए होते हैं क्योंकि ईसाई मिशनरीज गरीबों को घर, इलाज, नौकरी जैसी कुछ बुनियादी सुविधाओं का झांसा देते हैं। मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को घर दिलाने से लेकर, मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं शुरू कीं, ताकि ईसाई मिशनरीज पर लोगों की आश्रितता खत्म हो। इसके अलावा एलईडी बल्ब, मुफ्त गैस सिलेंडर जैसी योजनाओं ने लोगों का जीवनस्तर सुधारा। इन कदमों से ईसाई मिशनरीज का स्कोप काफी कम हो गया है। यह भी पढ़ें: क्या मोदी वाकई काशी के प्राचीन मंदिर तुड़वा रहे हैं?

4. मुसलमानों के विशेष अधिकारों पर नकेल

यह शिकायत हमेशा से रही है कि भारत में मुसलमानों के लिए विशेष अधिकार और सुविधाएं दी गई हैं। जबकि संविधान सबको बराबरी का अधिकार देने की वकालत करता है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल थी हज सब्सिडी। मोदी सरकार ने इसे एक झटके में हटा दिया। इतना ही नहीं, कुंभ जैसे मेलों में जाने के लिए जो विशेष रेलगाड़ियां चलाई जाती थीं, उनके टिकट पर मेला सेस लगता था। ये एक तरह से जजिया था जो हिंदुओं से आज भी वसूला जा रहा था। मोदी सरकार ने ही इसे भी खत्म किया। अवैध रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी नागरिकों को निकालने की कोशिश भी मोदी सरकार के आने के बाद ही शुरू हुई। जम्मू में बसे 40 हजार रोहिंग्याओं को निकालने का जब अभियान शुरू किया गया तो इसे सुप्रीम कोर्ट के जरिए रुकवा दिया गया। हालांकि यह मामला भी प्रॉसेस में है और ज्यादा दिन तक कोर्ट उन्हें नहीं बचा पाएगा। अमित शाह ने इशारा किया है कि असम की तर्ज पर राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को पूरे देश में लागू किया जाएगा।

5. योग के दम से बनी हिंदुत्व की पहचान

मोदी सरकार ने पहली बार योग को भारत की धरोहर के तौर पर प्रचारित किया। यूं तो योग पहले से ही यूरोप और अमेरिका में काफी प्रचलित है। लेकिन मोदी ने विश्व योग दिवस जैसे इवेंट्स के दम पर भारत को सीधे तौर पर योग के साथ जोड़ दिया। यह भी समझाया कि योग विश्व शांति और स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण तरीका हो सकता है। आज चीन और अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में लाखों लोग योग कर रहे हैं। योग वो तरीका है जिससे लाभ लेने वाले खुद ही हिंदू धर्म के लिए भी आकर्षित हो जाते हैं। यही कारण है कि ईसाई और मुस्लिम संगठनों में योग को लेकर भारी प्रतिरोध देखने को मिलता है। लेकिन योग की लोकप्रियता दिनोदिन बढ़ रही है। दुनिया भर में भारत के योग शिक्षकों की मांग बढ़ी है। जर्मनी और स्पेन जैसे कई देश अपनी फुटबॉल टीमों के लिए योग ट्रेनर का इस्तेमाल करते हैं।

6. हिंदू धर्म की सही तस्वीर पेश की

क्या आपको पता है कि पश्चिमी देशों में हिंदू धर्म को गोमूत्र पीने वाले अंधविश्वासी धर्म के तौर पर प्रचारित किया जाता है। यूरोप के ज्यादातर देशों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से ईसाई मिशनरीज़ के हाथ में है और वो हिंदुओं की छवि खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़तीं। ईसाई मिशनरीज़ से प्रभावित अंग्रेजी मीडिया ने भी हिंदुओं की बेहद खराब छवि बनाई है। पीएम मोदी दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों को मंदिरों और गंगा आरती जैसे मौकों पर ले जा चुके हैं। जब भी ऐसा होता है उन देशों में एक तरह से हिंदू धर्म को इस रूप के लिए उत्सुकता पैदा होती है। इसके अलावा खुद मोदी भी जब-जब किसी देश गए वहां के हिंदू मंदिरों में जरूर गए। इससे उन मंदिरों को एक तरह की मान्यता मिली। वहां स्थानीय हिंदुओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में दूसरे धर्मों के लोग भी आकर्षित हो रहे हैं। यह हिंदू धर्म के प्रचार का एक ऐसा तरीका है जिसे समझना हम सबके लिए जरूरी है।

7. भारत की धरोहरें वापस लाईं गईं

बहुत कम लोगों को पता होगा कि मोदी सरकार आने के बाद पहली बार भारत की उस बेशकीमती धरोहर को वापस लाने पर काम शुरू हुआ जिसे पहले मुगलों, अंग्रेजों और बाद में कांग्रेस के राज में देश से बाहर पहुंचाया गया था। कीमती कलाकृतियों और प्राचीन मूर्तियों के तस्करों का एक नेटवर्क हमारे देश में लंबे समय से सक्रिय रहा है। दुनिया भर के संग्रहालयों में ऐसी प्राचीन मूर्तियां देखी जा सकती हैं। कई जगह हिंदुओं को अपनी खुद की विरासत को देखने के लिए टिकट खरीदना पड़ता है। मोदी सरकार ने ‘हिंदू विरासत’ को वापस लाने के लिए पहली बार औपचारिक तौर पर कोशिश शुरू की गई। इसका असर ये हुआ कि बीते 5 साल में जितने हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां वापस लाई गईं उतना पहले कभी नहीं हुआ। कुछ देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों ने खुद पीएम मोदी को ऐसी मूर्तियां तोहफे में दे दीं। उदाहरण के तौर पर सितंबर 2014 में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट जब दिल्ली आए तो अपने साथ 11वीं शताब्दी की भगवान शिव की दो मूर्तियां भी ले आए जिसे तस्करों ने वहां ले जाकर बेच दिया था। मध्य युग की ढेरों ऐसी प्रतिमाएं और कलाकृतियां लाई जा चुकी हैं जिनकी कीमत का अंदाजा लगाना मुश्किल है। हिंदू धर्म के पुनरुत्थान की सोच के तह मोदी सरकार ने ये काम शुरू किया है और यह अब भी जारी है।

8. प्राचीन हिंदू पहचान की स्थापना

मुगलों की गुलामी के दौर में कई जगहों के नाम मुस्लिम लुटेरों और आक्रमणकारियों के नाम पर रखे गए थे। आजादी के बाद भी इन्हें हटाया नहीं गया। शायद आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हमारे देश में 704 शहर, कस्बे या गांव हैं जिनके नाम मुगल हमलावरों के नाम पर रखे गए हैं। अकबर के नाम पर 251, बाबर के नाम पर 61, हुमायूँ के नाम पर 11, जहाँगीर के बाद 141, औरंगज़ेब के बाद 177 और शाहजहाँ के नाम पर 63 जगहों का नामकरण किया गया है। ये सब आजादी के 70 साल बाद भी जस का तस चल रहा था। ये ज्यादातर नाम 1526 से 1707 के बीच बदले गए थे और इनका उद्देश्य आम जनमानस के दिमाग से हिंदू धर्म की पहचान को मिटाना था। मौजूदा सरकार ने पुराने खोए हुए गौरव को पुनर्जीवित करने के लिए इलाहाबाद, मुगलसराय, फैजाबाद जैसी कई जगहों के नाम बदले। यह एक शुरुआत है जिसे आगे बढ़ाना जरूरी है।

9. गायों के संरक्षण पर विशेष ध्यान

अक्सर हम मीडिया के असर में आकर गाय और हिंदू धर्म के संबंधों की अनदेखी कर देते हैं। मोदी सरकार के आने के बाद नई पीढ़ी को पहली बार पता चला कि गाय को क्यों मां का दर्जा दिया जाता है। मोदी सरकार ने गोपालन को आर्थिक गतिविधियों के साथ जोड़ा। इसके तहत ही गोबर-धन योजना की शुरुआत की, जिसमें किसानों से गोबर और गोमूत्र एकत्रित किया जाता है जिससे बाद में कचरे से खाद, बायोगैस और जैव-सीएनजी का उत्पादन किया जा रहा है। नीति अयोग के एक अध्ययन में दावा किया गया है कि अगले कुछ साल में इससे किसानों की आय में 10 फीसदी तक की वृद्धि होगी। इस कदम से गायों की उपयोगिता बढ़ेगी और उनकी अच्छी देखभाल होगी। इसके साथ ही बूचड़खानों में गायों को काटने पर सख्ती लागू की गई है। अभी राजनीतिक कारणों से यह पूरी तरह से अमल में नहीं आ सका है लेकिन बीजेपी सरकार में यह एजेंडा सबसे ऊपर है।

10. मंदिरों और बुनियादी ढांचे पर खर्च

तीर्थ यात्राएं करना हिंदू जीवन शैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन ज्यादातर तीर्थस्थानों पर खराब सड़कें और बेहद घटिया इंतजाम होते हैं। कांग्रेस के 70 साल में काशी और अय़ोध्या जैसे तीर्थस्थलों के विकास के लिए कभी कुछ नहीं किया गया। मोदी सरकार ने “स्वदेश दर्शन योजना” को मंजूरी दी। जिसके तहत बौद्ध सर्किट, कृष्णा सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट, रामायण सर्किट और हेरिटेज सर्किट जैसे 15 तरीके के पर्यटन स्थलों के विकास के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरोडोर परियोजना के तहत ऐसा इंतजाम किया जा रहा है कि वहां पर मंदिर को तोड़कर बनाई गई मस्जिद का कोई मतलब ही न रह जाए। काशी विश्वनाथ हिंदुओं का ज्योतिर्लिंग है और उसे आदि शंकराचार्य के बताए नक्शे के हिसाब से विकसित किया जा रहा है। इसी तरह अयोध्या की साफ-सफाई और विकास के लिए करोड़ों की परियोजनाएं चल रही हैं। स्वदेश दर्शन योजना के तहत पर्यटन मंत्रालय ने 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 5700 करोड़ रुपए की 70 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, इनमें से 30 प्रमुख परियोजनाएं लगभग पूरी होने को हैं। रामायण सर्किट के विकास के लिए शुरू में बिहार के सीतामढ़ी, बक्सर और दरभंगा को चुना गया। कई पवित्र तालाबों और झीलों की सफाई करके उन्हें पुनर्जीवित किया जा रहा है। वाराणसी में गंगा नदी के किनारे के घाट अब सुंदर स्वच्छ हैं और उनपर सरकार की ओर से विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सिर्फ पुरानी धरोहरें ही नहीं, अयोध्या में भगवान राम की 221 मीटर की प्रतिमा बनाने की योजना बनाई गई है, जो दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी।

11. चारधाम यात्रा के लिए बेहतर सड़क

उत्तराखंड में मोदी सरकार ने ऑलवेदर चारधाम हाइवे की योजना शुरू की है। अब तक चारधाम यात्रा में लोगों को भारी कष्ट झेलने पड़ते थे। लाखों यात्रियों के बावजूद बीते 70 साल में सरकारों ने कभी भी उनकी सुविधा के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किए। लेकिन अब यह स्थिति बदलने वाली है। अब गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ आपस में अच्छी और चौड़ी सड़कों से जुड़ जाएंगे। जिन पर सफर करना मुश्किल नहीं होगा। 12,000 करोड़ का यह ड्रीम प्रोजेक्ट उत्तराखंड के 1100 किलोमीटर के इलाके में इन सभी तीर्थस्थानों को सभी मौसमों में जोड़े रखेगा। इस परियोजना पर जोरशोर से काम चल रहा है।

इसके अलावा, रेलवे ने चार धाम रेल संपर्क परियोजना के लिए मई 2017 में अंतिम सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। तीर्थयात्री इन स्थानों पर न सिर्फ सड़कों, बल्कि ट्रेन से भी जा सकते हैं। रेलवे ने ‘रामायण एक्सप्रेस’ के नाम से एक स्पेशल ट्रेन शुरू की है, जो 16 दिन के टूर पैकेज में भारत और श्रीलंका में फैले भगवान राम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों की यात्रा कराती है। वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए नई लाइन और ट्रेनें शुरू की गई हैं। नाथू ला पास मार्ग को खोलने के कारण कैलाश-मानसरोवर जैसे महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थ स्थलों तक पहुंच आसान हो गई है। जिसका श्रेय केवल इसी सरकार को जाता है। नेपाल के जनकपुर, सीता की जन्मस्थली और भगवान राम के जन्म स्थान अयोध्या के बीच एक सीधी बस सेवा शुरू की गई है। इन रूट पर तीर्थयात्रियों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।

करीब हजार साल की गुलामी और 70 साल तक कांग्रेस के सौतेले बर्ताव के बाद क्या हिंदुओं के लिए मोदी सरकार के इतने कदम काफी हैं? निश्चित रूप से नहीं। लेकिन जिस तरह से मीडिया, अफसरशाही और न्यायपालिका का शत्रुतापूर्ण बर्ताव रहा है, उसे देखते हुए यह रिपोर्ट कार्ड भी काफी हद तक संतोषजनक है। अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। बहुत कुछ ऐसा हुआ है जिसके नतीजे दिखना बाकी है। इसके लिए जरूरी है कि हिंदुओं के हाथ में राजनीतिक सत्ता रहे, वरना पिछले पांच साल के सब किए धरे पर पानी फिर सकता है।

(स्नेहा सिंह की कलम से)

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