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जीएसटी पर कांग्रेस का पैंतरा, दरें घटाने का किया विरोध

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अक्सर आपने जीएसटी का यह कहते हुए विरोध करते सुना होगा कि ये गब्बर सिंह टैक्स है। यानी सरकार इस टैक्स के नाम पर व्यापारियों और आम लोगों से वसूली कर रही है। लेकिन उनके इन आरोपों की पोल तब बुरी तरह से खुल गई जब शनिवार को दिल्ली में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में कांग्रेस के राज्यों ने टैक्स घटाने का खुलकर विरोध किया। जीएसटी काउंसिल में केंद्र और सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं और किसी भी सामान पर टैक्स घटाने या बढ़ाने का फैसला आमराय से लिया जाता है। बैठक में आए मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने कहा कि वो जीएसटी में किसी तरह की कटौती का समर्थन नहीं करते, क्योंकि ऐसा राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है। चूंकि इन तीनों राज्यों में अभी पूरी तरह से सरकार का गठन नहीं हुआ है, इसलिए उनकी तरफ से प्रतिनिधित्व करने के लिए अप्रत्यक्ष कर यानी इनडायरेक्ट टैक्स के अधिकारी शामिल हुए थे।

राहुल गांधी का झूठ पकड़ा गया!

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जीएसटी लागू होने के बाद से ही कहते रहे हैं कि 28 फीसदी का टैक्स स्लैब नहीं होना चाहिए। वैसे तो आर्थिक रूप से ये नासमझी भरा फैसला होगा। क्योंकि 28 फीसदी स्लैब में ज्यादातर लग्जरी सामान हैं और इन पर टैक्स कम करने का मतलब अमीरों को फायदा पहुंचाना हुआ। जीएसटी काउंसिल की बैठक में 28 फीसदी स्लैब से टीवी, कंप्यूटर, पावर बैंक, वॉशिंग मशीन और ऑटो पार्ट्स जैसे कुछ रोजमर्रा के सामान बाहर करने का प्रस्ताव था। प्रस्ताव का औपचारिक तौर पर विरोध इस बात की तरफ इशारा करता है कि राहुल गांधी जीएसटी को सिर्फ चुनावी फायदे के लिए मुद्दा बना रहे थे। क्योंकि अगर दाम कम होते हैं तो इसका फायदा कांग्रेस शासित राज्यों में उनकी पार्टी को भी होगा। लेकिन केंद्रीय स्तर पर मोदी सरकार को फायदा न मिल जाए इसकी फिक्र उन्हें अभी से खाई जा रही है। यहां हम आपको बता दें कि तीनों राज्यों के अधिकारी मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में पहुंचे थे और वहां पर उन्होंने जो भी राय रखी वो मुख्यमंत्रियों के हवाले से ही रखी।

सीमेंट का दाम घटने ज्यादा चिंता

दरअसल जीएसटी काउंसिल की बैठक में सरकार ने दबाव बनाकर सीमेंट पर टैक्स को भी 28 फीसदी से 18 फीसदी करवा दिया। मोदी सरकार ने ऐसा इसलिए किया ताकि बुनियादी ढांचे के विकास में सीमेंट का बजट कम हो। जबकि कांग्रेस को इसी से सबसे ज्यादा दिक्कत है। यही कारण है कि जब राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों ने टैक्स कम करने का विरोध किया तो कर्नाटक, पंजाब जैसे कांग्रेस के राज्यों के प्रतिनिधि चुप्पी साधे रहे। दरअसल जीएसटी में हुई इस कटौती से सरकारों की कुल आमदनी में 8000 करोड़ रुपये की कमी का अनुमान जताया जा रहा है। केंद्र यह नुकसान उठाने को तैयार है, जबकि कांग्रेस की राज्य सरकारें इसका विरोध कर रही हैं। सवाल यह उठता है कि जीएसटी काउंसिल की बैठकों में जो कांग्रेस टैक्स कम करने का विरोध करती है उसका राष्ट्रीय अध्यक्ष जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए यह क्यों कहता है कि जीएसटी से मोदी सरकार जनता को लूट रही है।

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