जब मनमोहन को अफसरों ने कराई थी प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रैक्टिस!

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दावा किया है कि वो ‘साइलेंट पीएम’ नहीं थे और अपने समय में वो मीडिया से बातचीत किया करते थे। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान ‘मौनमोहन’ के नाम से मशहूर रहे पूर्व प्रधानमंत्री के मुंह से ऐसा दावा कई लोगों को अजीब लग रहा है। खास तौर पर उन लोगों को जिन्होंने कार्यकाल के आखिरी महीनों में उनको प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रैक्टिस करवाई थी। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि वो 3 जनवरी 2014 को हुई मनमोहन सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस को कभी नहीं भूल सकते। इसे 10 साल के कार्यकाल में मनमोहन सिंह की तीसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस कहा गया था। इससे पहले 2 बार उन्होंने प्रिंट और टीवी मीडिया के संपादकों से मुलाकात की थी। लोकसभा चुनावों से ठीक पहले मनमोहन सिंह की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर कांग्रेस बेहद उत्साहित थी। कोई गड़बड़ न हो इसके लिए सिर्फ उन्हीं पत्रकारों को बुलाया गया था जो कांग्रेस के करीबी थे और मुश्किल सवाल नहीं पूछने वाले के तौर पर जाने जाते थे।

बेहद नर्वस थे मनमोहन सिंह!

कांग्रेस को लग रहा था कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से मनमोहन सिंह से लोगों की एक बड़ी शिकायत दूर हो जाएगी, लेकिन खुद मनमोहन सिंह इसे लेकर बेहद नर्वस थे। उन्हें लग रहा था कि सरकार के खिलाफ आरोपों पर जवाब देने में कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए। तब के सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री मनीष तिवारी को इंतजामों की जिम्मेदारी दी गई थी। 3 जनवरी 2014 को यह प्रेस कॉन्फ्रेंस दिल्ली के नेशनल मीडिया सेंटर में हुई। मनीष तिवारी ने इसके लिए अपने मंत्रालय के तमाम बड़े और छोटे अधिकारियों को झोंक दिया। एक दिन पहले 2 जनवरी को इसके लिए बाकायदा मनमोहन सिंह की प्रैक्टिस करवाई गई। इसमें सूचना सेवा के जूनियर अधिकारियों को सवालों की पर्ची दी गई थी, जिसे वो अपना नंबर आने पर पूछते और मनमोहन सिंह रटा-रटाया जवाब देते। अगले दिन जब प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई तो उससे पहले भी तमाम पत्रकारों को ताकीद कर दी गई थी कि वो वही सवाल पूछें जिसकी पर्ची उन्हें दी गई है। कोई बाहरी सवाल पूछने की छूट नहीं थी। उस दौरान के कई पत्रकार इस बात की पुष्टि करते हैं। लेकिन उन दिनों प्रधानमंत्री और सूचना-प्रसारण मंत्रालय के कार्यक्रमों को लेकर मीडिया में डर का माहौल हुआ करता था, लिहाजा किसी ने भी इस बारे में कुछ छापने की हिम्मत नहीं दिखाई। बाद में कुछ जगहों पर ये खबर आई भी थी, लेकिन ज्यादातर गॉसिप कॉलम के रूप में।

दिए थे सारे रटे-रटाए जवाब

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनमोहन ने वही जवाब दिए जो उन्हें लिखकर दिए गए थे। जैसे कि वो यहां तक बोल गए कि अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो देश तबाह हो जाएगा। ये जवाब तब दिया गया था जब मनमोहन सिंह के कार्यकाल में लाखों-करोड़ों के घोटालों का भंडाफोड़ हो चुका था और देश की अर्थव्यवस्था तबाही की कगार पर थी। ऐसा माना जाता है कि वो जवाब कांग्रेस दफ्तर की तरफ से तैयार करवाए गए थे। कांग्रेस पार्टी की मंशा थी कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से मनमोहन सिंह के लिए लोगों में गुस्सा कुछ कम हो जाएगा, लेकिन हुआ इसके उलट। मीडिया से प्रधानमंत्री की इस मुलाकात को उनके विदाई कार्यक्रम की तरह देखा गया। मनमोहन की ज्यादातर बातों का जमकर मजाक उड़ा और इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने उन्हें और भी कमजोर प्रधानमंत्री के तौर पर स्थापित कर दिया। इस समय तक मनमोहन कह चुके थे कि वो राहुल गांधी के नेतृत्व में काम करने को तैयार हैं। अब मनमोहन सिंह का कहना कि मैं साइलेंट था यह भी उन्हें दी गई स्क्रिप्ट का ही नतीजा मालूम होता है।

कृपया लेख कॉपी-पेस्ट न करें। कई लोग पोस्ट कॉपी करके फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर देते हैं, जिससे वेबसाइट की आमदनी काफी कम हो गई है। राष्ट्रवाद की विचारधारा पर आधारित यह वेबसाइट बंद हो जाएगी तो क्या आपको खुशी होगी? कृपया खबरों का लिंक शेयर करें।
एक अपील: न्यूज़लूज़ के जरिए हम राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इस वेबसाइट पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है और हमारी आमदनी काफी कम। हम अपने काम को जारी रख सकें इसके लिए हमें आर्थिक मदद की जरूरत है। ये हमारे लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। डोनेट करने के लिए क्लिक करें:

comments

Tags: ,

Don`t copy text!